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Gorakhpur News: मोटरबोट से हो रही धूप की लकड़ी की तस्करी, धंधेबाज मालामाल

Mon, 03 Nov 2025 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Mon, 03 Nov 2025 01:16 AM IST
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Incense wood is being smuggled by motorboat, making the smugglers rich.
निचलौल। नेपाल के नवलपरासी जिला अंतर्गत सुस्ता क्षेत्र की मोटरबोट ने धूप की लकड़ी की तस्करी के काम को बेहद आसान कर दिया है। धंधेबाज मोटरबोट के जरिए नदी के रास्ते धूप की लकड़ी के खेप को भारतीय सीमा क्षेत्र में पहुंचा देते हैं।
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धंधेबाज यहां से कुशीनगर, गोरखपुर, बस्ती, कानपुर सहित कई बड़े शहरों में भेजकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। बीते दिन बरामद धूप की लकड़ी भी इसी मोटरबोट के जरिए लाई जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियां अब
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धूप की लकड़ी से जुड़े एक धंधेबाज ने बातचीत में बताया कि कुछ धंधेबाज नेपाल राष्ट्र के भी रहने वाले हैं। नेपाल के धंधेबाज नारायणी नदी के किनारे और घने जंगलों से घिरे सुस्ता घाट तक ही समिति रहते हैं।
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मोटरबोट के जरिए भारतीय क्षेत्र में धूप की लकड़ी पहुंचते ही स्थानीय धंधेबाज उसे खरीदारों तक पहुंचाने में जुट जाते हैं। धंधेबाज के साथ मौजूद एक शख्स ने बताया कि नेपाल के चितवन जंगल से धूप की लकड़ी काटी जाती है। लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बोरे में भरकर रात में मोटरबोट के जरिए भारतीय सीमा क्षेत्र की ओर रवाना कर दिया जाता है। यह मोटरबोट नाव की अपेक्षा काफी तेजी से चलती है और नदी की धारा के विपरीत भी तेजी से भागती है।
मोटरबोट का ठहराव भारतीय क्षेत्र में नारायणी नदी के धोबीनीया और साधु घाट पर होता है। यहां से धंधेबाज धूप की लकड़ी को ट्रॉली से बंधे तक लाते हैं। फिर पिकअप में रखकर रात में ही कुशीनगर, गोरखपुर, कानपुर सहित कई शहरों के लिए भेज देते हैं। निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने बताया कि धूप की लकड़ी के तस्करी की सूचना मिलने के बाद से वन कर्मियों की टीम लगाकर नदी और जंगल के रास्तों पर निगरानी कर रही है। धूप की लकड़ी से जुड़े धंधेबाजों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। धंधेबाजों के हर ठिकानों को चिह्नित कर आगे की कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती दे रहे धंधेबाज : भारत-नेपाल के सरहद पर पगडंडी रास्ते पर शिकंजा बढ़ने के बाद अब नारायणी नदी के रास्ते लगातार तस्करी बढ़ने लगी है। यह तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बनने लगी है। इन इलाकों में पुलिस के अलावा अन्य सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी के बावजूद धंधेबाज सक्रिय हैं। क्योंकि धंधेबाज नारायणी नदी के हर रास्ते से परिचित हैं। नदी के कई घाट भी जंगल से घिरे हुए हैं। धंधेबाजों ने इन घाटों को ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
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