{"_id":"67c59eade4484be93609ef8c","slug":"in-gorakhpur-more-than-20-tonnes-of-dates-are-consumed-during-ramadan-2025-03-03","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"माह-ए-रमजान: सिर्फ रमजान नहीं... अब साल भर होता है खजूर का इस्तेमाल-गोरखपुर में जानिए कितनी है खपत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माह-ए-रमजान: सिर्फ रमजान नहीं... अब साल भर होता है खजूर का इस्तेमाल-गोरखपुर में जानिए कितनी है खपत
Mon, 03 Mar 2025 05:51 PM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: रोहित सिंह
Updated Mon, 03 Mar 2025 05:51 PM IST
सार
रमजान में खजूर की अहमियत और जरूरत बढ़ जाती है। खजूर में प्राकृतिक शर्करा होने से यह ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है। वहीं फाइबर की भी अच्छी मात्रा होते से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में भी यह मदद करता है। इतना ही नहीं इसमें विटामिन ए, सी, ई, के और बी विटामिन के साथ-साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे मिनरल्स भी होते हैं।
विज्ञापन
माह ए रमजान।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
माह-ए-रमजान शुरू हो चुका है। इस दौरान रोजा खोलने के लिए रोजेदार खजूर का इस्तेमाल 1400 सालों से करते आ रहे हैं। यह नबी मोहम्मद साहब की सुन्नत भी है। मगर, कोरोना का खौफनाक दौर बीतने के बाद अब इसका इस्तेमाल सिर्फ रोजा खोलने के लिए नहीं, बल्कि सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए किया जाने लगा है।
विज्ञापन
यही वजह है कि अब बजाए सिर्फ रमजान में इस्तेमाल होने के खजूर साल भर खाई जाने लगी है, जिससे इसकी खपत भी बढ़ गई है। मुस्लिम समुदाय ही नहीं बल्कि अब सभी समुदाय के लोग इसका इस्तेमाल करने लगे हैं। यही वजह है कि सिर्फ रमजान में करीब 20 टन खजूरें खा ली जा रही हैं।
विज्ञापन
रमजान में खजूर की अहमियत और जरूरत बढ़ जाती है। खजूर में प्राकृतिक शर्करा होने से यह ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है। वहीं फाइबर की भी अच्छी मात्रा होते से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में भी यह मदद करता है। इतना ही नहीं इसमें विटामिन ए, सी, ई, के और बी विटामिन के साथ-साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे मिनरल्स भी होते हैं।
विज्ञापन
ऐसे में लोगों को सिर्फ एक खजूर से ही काफी फायदा होने से इसका इस्तेमाल बढ़ गया है। खजूर के व्यापारियों की मानें तो गोरखपुर में करीब 12 थोक की दुकानें हैं। जहां अब पूरे साल खजूर की मांग रहती है। दुकानदारों की मानें तो रमजान में इसकी मांग आम महीनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है, जबकि रमजान के बाद एक महीने और बकरीद के दौरान दो-तीन महीनों में इनकी मांग आम महीनों की अपेक्षा कुछ कम हो जाती है।
खजूर का फायदा मालूम होने और सुन्नत अदा करने के लिहाज से पहले रोजेदार सिर्फ किसी भी खजूर से लोग काम चला लेते थे। मगर जब खजूर की मांग दिन ब दिन बढ़ने लगी तो व्यापारियों ने भी बाहर से उम्दा क्वालिटी की खजूरें मंगवानी शुरु कर दीं। क्वालिटी की बात करें तो गोरखपुर में विदेशी खजूर की भरमार है।
खासतौर पर सऊदी अरब और ईरान की खजूरें सबसे ज्यादा पसंद की जा रही हैं। वहीं अलजीरिया और ट्यूमिनिशिया की खजूरें भी बाजार में उपलब्ध हैं जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। ईरानी खजूर के दाम की शुरुआत 100 रुपए से होती है।
बाजार में कीमिया डेट्स (ईरान) 250-300 रुपया, डेट क्राउन (यूएई) 125-300 रुपया, सफीर (दुबई) 250- 300 रुपया, मरहबा (ईरानी) 100 रुपया, अल मदीना 130 रुपया, रॉयल 180 रुपया, गल्फ 130 रुपया, फैल्कॉन 150 रुपया, तैबा 160 रुपया, बूमान 150 रुपया में मिल जा रही हैं।
खजूर में शिफा हैं : कारी अनस
आलिम कारी मोहम्मद अनस कादरी ने बताया कि पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब को खजूर बेहद पसंद थी। इसमें बहुत शिफा है। खजूर से रोजा खोलना पैगंबरे इस्लाम की सुन्नत है। खजूर जन्नत का फल है और इसमें जहर से भी शिफा है।
खजूर में फाइबर, विटामिन ए, सी, ई, के और बी विटामिन के साथ-साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे मिनरल्स होते हैं। इसका इस्तेमाल सेहत के लिए फायदेमंद हैं। इससे इम्युनिटी भी बढ़ती है। इसका इस्तेमाल करने से कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं: डॉ. राजेश कुमार, फिजिशियन
गोरखपुर में सऊदी और इरान की खजूरों की सबसे ज्यादा मांग है। अलजीरिया और ट्यूनिशिया की खजूर भी उपलब्ध हैं। 150 से 1200 तक की खजूर उपलब्ध है: मुहम्मद फैजान, व्यापारी
खजूर की मांग रमजान में और महीनों के मुकाबले बढ़ जाती है। मगर कोरोना के बाद से इसे अब लोग साल भर इस्तेमाल कर रहे हैं। रमजान के बाद इसकी मांग कुछ कम होती है: ताज मुहम्मद, व्यापारी
खजूर मोहम्मद साहब की सुन्नत है, इसलिए रमजान में रोजेदार इससे रोजा खोलने के लिए इस्तेमाल करते हैं। सेहत के लिए भी यह फायदेमंद है: मोहम्मद अतहर
खजूर का इस्तेमाल 1400 साल पहले हमारे नबी रोजा खोलने के लिए करते आए हैं, तबसे इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। हम भी करते हैं: गुफरानुल्लाह