Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   IMRC's Prof. Gaurav and Dr. Rajeev Receive National Recognition

Gorakhpur News: आईएमआरसी के प्रो. गौरव और डॉ. राजीव को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

Fri, 05 Dec 2025 01:43 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2025 01:43 AM IST
विज्ञापन
IMRC's Prof. Gaurav and Dr. Rajeev Receive National Recognition
गोरखपुर। क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) के वैज्ञानिक जल्द ही एक नवीन डायग्नोस्टिक डिवाइस विकसित करेंगे, जो एक ही परीक्षण में डेंगू संक्रमण का पता लगाने के साथ-साथ मौजूद डेंगू वायरस के सीरो-टाइप की पहचान भी कर सकेगा। इसे लेकर गोरखपुर आरएमआरसी के निदेशक प्रो. (डॉ.) हरि शंकर जोशी,डॉ. गौरव राज द्विवेदी और डॉ. राजीव सिंह की टीम ने एक प्रस्ताव तैयार किया था। इसे दिल्ली आईसीएमआर के समक्ष रखा गया। 27 अन्य प्रस्तावों में गोरखपुर के प्रस्ताव को दूसरा स्थान मिला है।
विज्ञापन

आरएमआरसी के निदेशक प्रो. डॉ. हरि शंकर जोशी ने बताया कि डेंगू विश्वभर में एक प्रमुख समस्या बनी हुई है, जो डेंगू वायरस के चार विभिन्न सीरो-टाइप्स के कारण होता है। इनमें से कुछ सीरो-टाइप्स और उनके संयोजन गंभीर डेंगू के मामलों से अधिक जुड़े होते हैं। इसलिए ऐसी सटीक जांच अत्यंत आवश्यक है जो न केवल डेंगू संक्रमण की पुष्टि करे, बल्कि यह भी बताए कि कौन-सा सीरो-टाइप मौजूद है। यह जानकारी रोगी प्रबंधन, प्रकोप निगरानी और प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल के समय में रियल-टाइम पीसीआर आधारित डेंगू टाइपिंग किट से जांच की जाती है। लेकिन, ये किट काफी महंगी होती है।इसी क्रम में राष्ट्रीय प्रयास के अनुरूप, आईसीएमआर नई दिल्ली ने भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व की बीमारियों के लिए स्वदेशी डायग्नोस्टिक किट विकसित करने का प्रस्ताव सभी आरएमआरसी को दिया था। गोरखपुर आरएमआरसी के निदेशक प्रो. (डॉ.) हरि शंकर जोशी, डॉ. गौरव राज द्विवेदी और डॉ. राजीव सिंह की टीम ने इस संबंध में एक थ्रीडी प्रस्ताव तैयार कर दिल्ली भेजा था। देशभर से प्राप्त 27 प्रस्तावों में से गोरखपुर का यह प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है और राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। अब, इस प्रस्ताव के स्वीकृत होने के बाद आरएमआरसी के वैज्ञानिक एक नई डायग्नोस्टिक डिवाइस विकसित करेंगे, जो एक ही परीक्षण में डेंगू संक्रमण का पता लगाने के साथ-साथ मौजूद डेंगू वायरस के सीरो-टाइप की पहचान भी कर सकेगा।
विज्ञापन

-----------
जानिए,क्या होता है सीनो-टाइप
डेंगू के चार अलग-अलग सीरोटाइप्स (डीईएनवी-1, डीईएनवी-2,डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4) होते हैं। किसी एक सीरोटाइप से संक्रमण होने पर उपचार के बाद उस सीरोटाइप के प्रभाव से तो निजात मिल जाती है, लेकिन अन्य सीरोटाइप से दोबारा संक्रमण का खतरा बना रहता है। दूसरी बार किसी दूसरे सीरोटाइप से संक्रमण होने पर ही गंभीर बीमारी डेंगू (जैसे कि डेंगू रक्तस्रावी बुखार) होने का खतरा बढ़ जाता है। प्रस्ताव के सफल प्रयोग से अब जांच सीधे हो सकेगी और सुविधाजनक भी हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed