फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Illegal possession will move away from Asuran Pokhara gorakhpur in seven days

गोरखपुर: सात दिन में जमीन नहीं मिली तो असुरन पोखरा से हटेगा अवैध कब्जा, कमिश्नर ने जताई नाराजगी

Sun, 21 Feb 2021 02:39 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 21 Feb 2021 02:39 AM IST
विज्ञापन
Illegal possession will move away from Asuran Pokhara gorakhpur in seven days
संबोधित करते कमिश्नर जयंत नार्लिकर। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर जिला प्रशासन को यदि सात दिन के भीतर असुरन पोखरे की अतिक्रमित हो चुकी जमीन के बराबर जमीन नहीं मिली तो मौके पर हुए निर्माण पर प्रशासन का बुलडोजर चलेगा। इस मामले में कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने फिर सख्ती दिखाई है।

विज्ञापन


कमिश्नर ने शपथपत्र देने के एक दशक बाद भी मामले के लंबित होने पर नाराजगी जताई है। निर्देश दिए हैं कि अब पोखरे की जमीन बेचने वाले ऋषभ जैन को सात दिन से अधिक का मौका न दिया जाए। तय समय में यदि उतनी ही कीमत और क्षेत्रफल की जमीन न मिले तो पोखरे की जमीन से सभी अवैध निर्माण हटाए जाएं। साथ ही उसे फिर से पोखरे का स्वरूप दिया जाए।  
विज्ञापन


उधर, ऋषभ जैन की तरफ से सदर तहसील प्रशासन को अब तक छह स्थानों पर जमीन का प्रस्ताव दिया गया है। इनमें से सिर्फ दो ही जमीन पसंद आई थी, मगर इसी बीच ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर का तबादला हो गया और मामला आगे नहीं बढ़ा। अब कमिश्नर ने वर्तमान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम कुलदीप मीणा को निर्देश दिए हैं कि सात दिन में जमीन न मिलने पर कार्रवाई कर पोखरे की जमीन खाली कराई जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर, कमिश्नर ने मानचित्र स्वीकृत करने वाले अफसरों की जवाबदेही तय करने के मामले में जीडीए को भी चेताया है। साथ ही पोखरे की जमीन पर सड़क, नाली आदि का निर्माण कराने वाले नगर निगम को भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है। बता दें कि पूर्व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की संस्तुति पर कमिश्नर ने करीब 10 दिन पहले जीडीए और नगर निगम को अपने-अपने महकमे के अफसरों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

 

13 मई 2010 को ऋषभ जैन ने किया था समझौता

असुरन पोखरे की जमीन पर कब्जे का मामला 2010 में भी गरमा चुका है। तत्कालीन कमिश्नर पीके महांति के सख्त होने पर पोखरे की करीब 3.5 एकड़ जमीन बेचने वाले ऋषभ जैन ने समझौते के आधार पर शपथ देकर कब्जा हो चुकी जमीन के बराबर और उतनी ही कीमत की जमीन प्रशासन को उपलब्ध कराने का वादा किया था। इसी बीच पीके महांति का तबादला हो गया और मामला दब गया।

करीब एक दशक बाद जब पूर्व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने पोखरे की जमीन पर कब्जा करने वालों को नोटिस भेजकर जमीन खाली करने को कहा तो उन्होंने उनसे मिलकर समझौते की जानकारी दी। इसके बाद ऋषभ जैन खुद आगे आए और समझौते के मुताबिक जमीन देने की बात कही। छह जगह का प्रस्ताव भी दिया, मगर अंतिम मुहर किसी पर नहीं लग पाई।

पोखरे की जमीन पर 45 मानचित्र भी पास
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने असुरन पोखरे की जमीन पर 45 मानचित्र स्वीकृत किए हैं। प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष राम सिंह की तरफ से 2010 में पूर्व कमिश्नर पीके महांति को सौंपी गई एक रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ। ये सभी मानचित्र वर्ष 1991 और 2008 के बीच जारी किए गए हैं। इन मानचित्रों से जुड़े आवेदन पर किस जेई, एई ने रिपोर्ट लगाई और कौन से तत्कालीन सचिव ने इसे स्वीकृति दी, यह सब स्पष्ट है।

बावजूद इसके एक दशक से प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नहीं की। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल की संस्तुति पर कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने जीडीए से संबंधित की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इस मामले में जीडीए सचिव राम सिंह गौतम का कहना है कि कमिश्नर के निर्देश पर चल रही जांच तकरीबन पूरी हो चुकी है। सोमवार को उन्हें रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाएगी।

इनके मानचित्र हुए हैं स्वीकृत
योगेंद्र त्रिपाठी, गिरजा देवी, कवलपति देवी, तुंगनाथ उपाध्याय, शीला द्विवेदी, विमला देवी, लीला देवी, बैजनाथ गुप्ता, उषा रानी, संगता देवी, रंजन मलिक, प्रदीप कुमार सिंह, छबीला साहू, संजय अग्रवाल, रवि शंकर गुप्ता, रोहिताष कुमार, श्रवण कुमार यादव, ललिता शर्मा, सुनीता पांडेय, रीता देवी, मंजुला अग्रवाल, बिंदा देवी, रत्न कुमार, रुक्मणी देवी, भरत गिरी, तपम कुमार, कार्तिक मुखर्जी, मनोज कुमार वर्मा, विजय लक्ष्मी मिश्रा, रतन कुमार, शांति देवी, मनोरमा देवी, क्रांति त्रिपाठी, धनंजय प्रसाद, सरस्वती देवी, लाल बाबू गुप्ता, उमेश चंद पटेल, विमला देवी, मिठाई लाल, चंद्र कांती शुक्ला, प्रतिमा सिंह, सेवाती देवी, शंभू नाथ गुप्ता, हरिश चंद्र सिंह, विनय कुमार लाट।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर कुलदीप मीणा ने कहा कि सात दिनों में जमीन नहीं मिलने पर कार्रवाई करने संबंधी कमिश्नर का निर्देश मिला है। छह प्रस्ताव ऋषभ जैन की तरफ से मिले थे। उनकी पड़ताल कराई जा रही है। तय समय में जमीन नहीं मिलने पर कमिश्नर के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed