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एक्सक्लूसिव: यूपी के इस जिले में फैल रहा अवैध कॉलोनियों जाल, दांव पर लग रहा लोगों के भविष्य का आशियाना

Sat, 23 Jan 2021 10:37 AM IST
vivek shukla अरुण चंद, गोरखपुर।
अरुण चंद, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 23 Jan 2021 10:37 AM IST
सार

  • जीडीए सीमा के भीतर से बाहर तक अवैध कॉलोनियों का फैल रहा जाल, कॉलोनाइजर हो रहे मालामाल
  • ले-आउट पास न रेरा में पंजीकरण, झांसा देकर लोगों की गाढ़ी कमाई फंसा रहे कॉलोनाइजर्स  
  • कई तो काश्तकारों से बिना पंजीकृत अनुबंध के भी उनकी जमीन पर बसा रहे कॉलोनियां
  • प्राधिकरण ने खुद अपनी सीमा में चिह्नित की हैं 153 अवैध कॉलोनियां, धूल फांक रही फाइल

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Illegal colonies being constructed from within GDA border at Gorakhpur
गोरखपुर शहर। - फोटो : राजेश कुमार

विस्तार

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की सीमा के साथ-साथ बाहर भी अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैल रहा है। मगर न तो प्राधिकरण ही इस धंधे में लगे लोगों पर नकेल कस पा रहा है, न नगर पंचायतें और जिला पंचायत। इन सब के बीच शिकार बन रहा आम आदमी। लुभावने ऑफर और ढेर सारे सपने दिखाकर अवैध कॉलोनियां बसाने वाले, लोगों की जिंदगी भर की कमाई दांव पर लगा दे रहे हैं।
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प्लॉट खरीदने के बाद जब लोग वहां रहने के लिए मकानों के मानचित्र स्वीकृत कराने जाते तो उन्हें पता चलता है कि ले-आउट नहीं स्वीकृत होने से मानचित्र नहीं पास हो पाएगा। एक बार सड़क, नाली टूटी तो दूसरी बार इन मूलभूत सुविधाओं के मिलने में अवैध का दाग आड़े आना तय है।
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प्राधिकरण क्षेत्र में जीडीए से, नगर पंचायत क्षेत्र में प्लाटिंग कर कॉलोनी बसाने के लिए नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्र के लिए जिला पंचायत से ले-आउट स्वीकृत कराना अनिवार्य है। जीडीए क्षेत्र के बाहर काम कर रहे कुछ कॉलोनाइजर्स नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्र के लिए ले-आउट नहीं पास होने की वजह से रेरा में रजिस्ट्रेशन न हो पाने की दलील दे रहे, मगर नगर पंचायतों का दावा है कि उनके पास ले-आउट के लिए कोई आवेदन नहीं करता। सिर्फ मानचित्र स्वीकृत करने के लिए आवेदन आते हैं।
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सिस्टम भी फेल, जिला पंचायत में अभी तक प्रस्ताव ही लंबित

यही नहीं, बड़ी संख्या में रियल एस्टेट कारोबारी तो काश्तकारों से मौखिक अनुबंध पर प्लॉटिंग कर रहे हैं। जैसे-जैसे प्लॉट बिकता है, काश्तकारों को तय रकम देते हैं। ऐसे में बिना जमीन की रजिस्ट्री कराए या पंजीकृत अनुबंध कराए न तो ले-आउट पास हो सकता और न रेरा में पंजीकरण। खुद जीडीए अपने दायरे में बसी 153 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर चुका है। सभी के बारे में सितंबर 2020 में रेरा को जानकारी दी गई, मगर कार्रवाई नहीं हो पाई। इन कॉलोनियों को बसाने वाले धड़ल्ले से प्लॉट बेच रहे हैं।
 
सिस्टम की उदासीनता की वजह से भी अवैध कॉलोनियों के बसने का सिलसिला थम नहीं पा रहा। रियल एस्टेट कारोबार में मनमानी पर शिकंजा कसने के लिए रेरा का गठन तो हो गया, मगर निगरानी की सुचारू व्यवस्था नहीं हो पाई। यही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में ले-आउट स्वीकृत करने के लिए अभी तक कोई नियम ही नहीं बन पाया।

लंबे समय से जिला पंचायत में प्रस्ताव लंबित है। सिस्टम में यह छेद अवैध कॉलोनियों के कारोबार को और बढ़ावा दे रहा है। कॉलोनाइजर्स अपने बचाव में तर्क देते हैं कि जब ले-आउट ही नहीं पास हो पा रहा है तो वे रेरा में पंजीकरण कैसे कराएं? मानें तो बात सही भी है।

जिला पंचायत अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि ले-आउट स्वीकृत करने संबंधी उपविधि अभी बन नहीं पाई है। प्रस्ताव विचाराधीन है। प्रयास किया जा रहा है कि इसे स्वीकृत कराया जा सके।
 
मुंडेरा बाजार नगर पंचायत नगर ईओ जितेंद्र सिंह ने बताया कि पंचायत में भवनों के मानचित्र स्वीकृत करने के लिए तो आवेदन आते हैं, मगर ले-आउट के लिए अभी तक कोई आवेदन ही नहीं आया।
 
नगर पंचायत पिपराइच ईओ आशुतोष सिंह ने बताया कि नगर पंचायत से मानचित्र के आवेदन आने पर उन्हें स्वीकृत किया जाता है। संसाधन के अभाव में यहां तो ठीक से जांच भी नहीं हो पाती कि मौके पर निर्माण भी उसी तरीके से हो रहा है या नहीं। मगर, नए निर्माण शुरू होने पर यह जरूर जांचा जाता है कि मानचित्र स्वीकृत है या नहीं। ले-आउट के स्वीकृत होने या न होने का प्रश्न तो बाद में आता है, अभी तक किसी कॉलोनाइजर ने आवेदन ही नहीं किया।
 
उप्र रियल एस्टेट एसोसिएशन अध्यक्ष विनीत चौधरी ने बताया कि शहर में अब जमीन नहीं बचने की वजह से ज्यादातर प्रोजेक्ट ग्रामीण क्षेत्र में संचालित करने की मजबूरी है, मगर जिला पंचायत से अभी तक ले-आउट पास होने की कोई व्यवस्था ही नहीं है। इस संबंध में रेरा के सचिव, कमिश्नर और शासन तक को कई बार प्रार्थनापत्र दिया जा चुका है। ले-आउट नहीं पास होने की वजह से रेरा में पंजीकरण भी नहीं हो पाता। एसोसिएशन भी चाहता है कि लोग साफ-सुथरे तरीके से काम करें। यह सच है कि कुछ लोग मुनाफे के चक्कर में जानबूझकर भी नियम-कायदों को दरकिनार करते हैं। इनकी वजह से बाकी लोगों को भी संदेह की नजर से देखा जाता है। मगर, ऐसा नहीं है कि सभी कॉलोनाइजर्स गलत तरीके से काम कर रहे हैं।

परियोजना लागत का 10 फीसदी जुर्माना लगा सकता है रेरा

जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि अवैध कॉलोनियों या भवन के निर्माण पर नजर रखी जा रही है। वीसी के निर्देश पर अभियंताओं की टीम ने करीब चार महीने पहले 153 अवैध कॉलोनियां चिह्नित की थीं। किसी का भी न तो ले-आउट पास है, न ही रेरा में पंजीकरण। सभी पर कार्रवाई के लिए रेरा को पत्र भेज दिया गया है। 

अवैध कालोनियां बसाने वाले कालोनाइजर पर रेरा परियोजना की कुल लागत (जमीन की कीमत व विकास पर खर्च) का 10 फीसदी जुर्माना लगा सकता है। इसके अतिरिक्त तीन साल की जेल भी हो सकती है।

जीडीए के विभिन्न जोन की अवैध कॉलोनियों की संख्या
जोन एक (क) - 13 अवैध कॉलोनी
जोन एक (ख) - 14 अवैध कॉलोनी
जोन दो (क) - 22 अवैध कॉलोनी
जोन दो (ख) - 42 अवैध कॉलोनी
जोन तीन (क) - 03 अवैध कॉलोनी
जोन तीन (ख) - 03 अवैध कॉलोनी
जोन चार (क) - 25 अवैध कॉलोनी
जोन चार (ख) - 16 अवैध कॉलोनी
जोन चार (ग) - 15 अवैध कॉलोनी

अवैध कॉलोनियों को विकसित करने वाले कॉलोनाइजर

वीके शाही, प्रेम सिंह पप्पू बाबू, हनीफ, अफजल और विमल सोनकर, अवधेश श्रीवास्तव, शोभित अग्रवाल, बृजेश सिंह, विमल चंद अग्रहरि, नंद दास, धर्मदेव चौहान, छेदी जायसवाल, राम किशुन, रामज्ञा, रवि और नरेन्द्र चौधरी, रामप्रीत चौहान, रामज्ञा चौहान, दिग्विजय सिंह, विजय कुशवाहा, पूजा जोशी, मिठाई लाल, मनोज सिंह, राम मिलन, सुरेश निषाद, रामजी चौहान, गिरधारी सोनकर, मोविन खान, सूरज सिंह, संजय अग्रवाल, अमन, अच्छे लाल गुप्ता, शेखर, राजू, कैलाश, संजीव श्रीवास्तव, अनिल यादव, गोलू, श्रीमती सुनीता सिंह, नारायण गुप्ता, राम सिंह, इशान अली, हवलदार यादव, राम सेवक निषाद, चन्द्रावती देवी, हनुमान, उमेश यादव, हरिशंकर, मथुरा प्रसाद बरनवाल, प्रशांत जोशी, जगदीश यादव, शंकर, शंभू गुप्ता, दीपक अग्रवाल, राम सिंह, जितेंद्र जायसवाल, अशोक कुमार उपाध्याय, वीरेन्द्र पासवान, किस्मती, हनुमान, सुदामा, राम नगीना मौर्या, मुरारी निषाद, रामसेवक निषाद, बजरंगी, मुखराम सिंह, भोला सिंह, नाटे, रियाजुद्दीन, अनीश, सतीश, विश्वनाथ, विमल अग्रहरि, राजकुमार, दिलशाद, अरविंद कुमार यादव, दिलीप मजीठिया, अमेरिका यादव, मनोज तिवारी, मुन्ना मल्ल, ओम प्रकाश पांडेय उदय तिवारी, देवेंद्र कुमार मौर्या, सत्या पांडेय, कलीम, बेचन प्रसाद, कोदई, बच्चा लाल, कमरूल्लाह, कलूट, अशोक यादव, छोटे लाल, विनोद मौर्या, ताहिर बंटी, दुर्गेश यादव, छोटू तिवारी, प्रह्लाद गुप्ता, विनय अग्रवाल, बबलू, पावस चौधरी, भरत राव, प्रकाश मिश्रा, शैलेष यादव, रमन शर्मा, मिथिलेश सिंह, गोरक्ष मिश्र।

जोन 1(क)- आदित्यपुरम-तरहवा, शेख बहादुर अली शाह मोहरीपुर, उमापुरी बरगदवा, बजरंग कालोनी बरगदवां, संकट मोचन नगर माधोपुर, मनमोहन माधोपुर बंधे के पास, ग्रीन सिटी-2, विनायक नगर नथमलपुर, हरीकृष्ण नगर टैगोर टाउन के पास, टैगोर टाउन, लच्छीपुर दस नंबर बोरिंग के पास, द्वारिकापुरी बरगदवां, गणेशपुरम प्रथम व द्वितीय।

जोन 1(ख)- गायत्रीपुरम द्वितीय नकहा नकहा नंबर एक, चमनगंज नकहा नंबर एक, राजीव नगर बशारतपुर, चन्द्रगुप्त नगर बशारतपुर, हरिद्वारपुरम बशारतपुर, हरिद्वारपुरम द्वितीय, चंद्र विहार कालोनी, कृष्णानगर प्राइवेट कालोनी, प्रोफेसर कालोनी रामजानकी नगर, कौशलपुरम रामजानकी नगर, हरिहरपुरम, इंद्रप्रस्थ कालोनी, करीमनगर, मिलियम सिटी द्वितीय, शिवाजी नगर

जोन 2(क)- शक्तिनगर बशारतपुर पूर्वी, महादेवपुरम, सुशांत सिटी जंगल धूसड़, गांधी नगर हरिसेवक पुर, सुभाषिनी नगर, जंगल धूसड़, बशारतपुर, हनुमंत नगर, लतीफ नगर, महावीरपुरम, पवनपुरम, रेल विहार/साईधाम कालोनी हरसेवकपुर, हैदरगंज, कमलानगर सेमरा नंबर एक, पार्वतीपुरम, नारायण नगरी, लक्ष्मीनगर, मायानगरी, तारानगरी, द्वारिकापुरम सेमरा, स्नेह सिटी सेमरा

जोन 2(ख)- ईस्टनपुर कालोनी, आर्यापुरम, विवेकानंदपुरी, श्रीराम नगर कालोनी, गायत्रीनगर लालगंज, मौर्या टोला, नंदानगर दरगहिया, सैनिक कुंज, सैनिक विहार विस्तार, काशीपुरम, आदर्श नगर, राहुल नगर अकोलवा, पवन विहार, बेनाम कालोनी, मैत्रीपुरम कालोनी, सरस्वतीपुरम, नारायण पुरम, जंगल हकीम नंबर दो, विश्वनाथपुरम, सैनिक विहार, पवन विहार, आकाश विहार गेट, नंदानगर, मुक्तेश्वर नगर सिंहासनपुर, तुलसीपुरम, काशीपुरम, सर्वोदय नगर, खुद्दी टोला, झरना टोला, गायत्रीनगर, राहुल नगर, विवेक नगर, मोहम्मद नगर कालोनी, आमिना नगर, मीरापुरम कालोनी, जानकीपुरम

जोन 3(क)- बहादुर शाह जफर कालोनी बहरामपुर, माईधिया इलाहीबाग, सुमेर सागर,
जोन 3(ख)- मुंडेरी चक, मुंडेरी चक दो, चकरा अब्वल

जोन 4(क)- स्वर्ण सिटी, स्वर्ण सिटी दो, कबीरनगर, कबीर नगर दो, मजिठिया श्रवण नगर, मजिठिया श्रवण नगर दो, तीन, चार, पांच व छह, जंगल सिकरी खोराबार, जंगल सिकरी दो व तीन, वंश राजपुरम, दो व तीन, जंगल सिकरी खोराबार एक कव दो, रानीडिहा, दो व तीन, आरके पुरम, दो व तीन।

जोन 4(ख)- विवेकपुरम कालोनी, प्रयागपुरम कालोनी, पथरा कालोनी, महुईसुधरपुर, सिद्धार्थनगर, पार्वतीपुरम, साउथ बेतियाहाता, महेवा, शक्तिनगर, साकेत नगर, राजीव नगर, अश्वमेध नगर, बुद्ध विहार, चिलमापुर, न्यू शिवपुरी कालोनी, शिवाजी नगर,  

जोन 4(ग)- गोकुल नगरी रामपुर उर्फ चकरी, गोरखधाम रामपुर चकरी, डिभिया महादेव झारखंडी टुकड़ा नगर एक, मून इन्फ्रासीट रामपुर उर्फ चकरी, शैलम सिटी, शिव नगरी जंगल सिकरी खोराबार, राधे गोविंद सिटी, सिक्टौर जूही इन्क्लेव, राम अवध नगर जंगल सिकरी, अल्कापुरी सिक्टौर, मालवीय नगर कौशलपुर, अभिषेक नर्ग, गोरक्षपुरम, भरवलिया।
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