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Gorakhpur News: कुत्ता काटे तो सुई लगवाने मत आइए, पहले चार और लोग खोजकर लाइए, तब लगेगी वैक्सीन

Fri, 19 Apr 2024 10:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला, गोरखपुर
अमर उजाला, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 19 Apr 2024 10:17 AM IST
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If a dog bites, find 4 more people and bring them then the vaccine will be administered in gorakhpur
शहर की सड़कों और गलियों में घूम रहे कुत्ते आए दिन लोगों पर हमला कर घायल कर रहे हैं - फोटो : अमर उजाला

अगर आप देहात इलाके में रहते हैं और गली में घूमने वाले कुत्तों ने काट लिया हो तो फिर वैक्सीन लगवाने के लिए जिला अस्पताल ही आना होगा। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रैबीज वैक्सीन तो मौजूद है, लेकिन सिस्टम की खामियों के चलते दूरदराज के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।

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वजह यह है कि इन स्वास्थ्य केंद्रों पर वॉयल तभी खुलता है, जब वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या पांच हो। स्टाफ भी पीड़ित से कहता है कि वैक्सीन लगवानी है तो चार ऐसे लोग और लेकर आओ। इसी गणित के चलते देहात के लोगों को ज्यादा खर्च कर जिला अस्पताल आना पड़ रहा है।
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हालांकि, स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन लगवाने के लिए बुधवार और शनिवार का दिन निर्धारित है, लेकिन यह समझने वाली बात है कि 48 घंटे के भीतर ही पहली डोज अनिवार्य है, तो ऐसे में इंतजार मुसीबत को दावत देने जैसी है।
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यह दिक्कत नया नहीं है। लंबे समय से इसके समाधान की प्रक्रिया तो चल रही है, लेकिन कुछ ठोस अब तक नहीं हो सका है। ऐसा भी नहीं है कि अगर मरीज, जिला अस्पताल आ जाए तो उसे तुरंत ही इंजेक्शन लग जाएगी। इसकी भी एक लंबी प्रक्रिया है। सुबह आठ बजे से नंबर लगने की शुरुआत होती है। फिर डॉक्टर देखने के बाद तय करते हैं कि वैक्सीन की डोज कितनी होनी चाहिए।

ऐसे में अगर 60 किलोलीटर दूर बड़हलगंज में किसी को कुत्ते ने काट लिया तो इस प्रक्रिया में उलझ कर ही रह जाएगा। उसे मजबूरन प्राइवेट वैक्सीन खरीदनी पड़ेगी, जिसकी कीमत वर्तमान में 800 से 1000 रुपये के बीच है।

शहर में भी कुत्तों का आतंक.. बच्चे-बुजुर्ग सभी परेशान
देहात इलाके में हालात तो खराब हैं ही, शहर में भी कुत्तों का आतंक कम नहीं है। सिद्धार्थनगर और फिर देवरिया में कुत्तों के हमले में दो बच्चों की मौत की घटना ने शहरवासियों को डरा दिया है। इन घटनाओं ने लोगों को बेचैन कर दिया है, क्योंकि शहर का शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला बचा है, जहां पर आक्रामक छुट्टा कुत्ते न हों।

सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग और बच्चों को हो रही है। उनका घर से निकलना ही मुश्किल हो गया है। यही वजह है जिला अस्पताल में आम दिनों में औसतन 70 से 80 लोगों को वैक्सीन लगाई जाती थी, जो अब बढ़कर औसतन 250 के करीब पहुंच गई है।

नगर निगम के पास इंतजाम ही नहीं
शहर की गलियों में और सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों से अपने बच्चों और खुद को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आप ही की है, क्योंकि इसके लिए जिम्मेदार विभाग नगर निगम के पास फिलहाल कोई इंतजाम ही नहीं है।

नगर निगम छुट्टा कुत्तों की आबादी पर रोक लगाने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का निर्माण जरूर करा रहा है, लेकिन उसे बनने में भी एक महीने का समय लगेगा। एक महीने बाद गलियों और सड़कों से छुट्टा कुत्ते खत्म हो जाएंगे, ऐसा भी नहीं है, क्योंकि यहां पर भी कुत्तों की नसबंदी ही की जाएगी, उन्हें रखने का इंतजाम नहीं होगा।

हां, इतना जरूर है कि आने वाले समय में इसका असर जरूर होगा, क्योंकि अगर इस पर ठीक से काम हुआ तो कुत्तों की आबादी नहीं बढ़ने पाएगी।

तेज गर्मी व भोजन की कमी से आक्रामक हो जाते हैं कुत्ते
गर्मी के मौसम में कुत्ते ज्यादा आक्रामक होते हैं। इस वजह से वह सड़कों पर आने-जाने वालों को दौड़ाते हुए काटते हैं। इसके पीछे पशु चिकित्सक भोजन की कमी और तापमान में उतार-चढ़ाव को कारण मान रहे हैं।

डाॅ. राजेश बताते हैं कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, कुत्तों में चिड़चिड़ापन और बेचैनी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कुत्ते जीभ से तापमान का नियंत्रण करते हैं। छाया और ताजे पानी की कमी से कभी-कभी उनके अंदर कई तरह के व्यवहार परिवर्तन देखने को मिलते हैं।

इसमें भौंकना, आक्रामकता आदि शामिल हैं। वह आते-जाते किसी को भी दौड़ाने लगते हैं और मौका पाते ही काट लेते हैं। पशु चिकित्सक डाॅ. आशुतोष पांडेय बताते हैं- दिन में गर्मी होने के कारण कुत्ते ठंड वाली जगहों पर बैठकर समय काटते हैं।

रात के समय हल्की ठंड होने पर वे झुंड में सड़कों पर चलते हैं। दिनभर की गर्मी व भोजन नहीं मिलने से आने-जाने वालों को दौड़ाते हैं। इन दिनों कुत्तों के काटने की संख्या भी बढ़ जाती है।


एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बनकर तैयार
 नगर निगम, गुलरिहा में 1.85 करोड़ रुपये खर्च कर एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर (एबीसीएस) तैयार करेगा। इसके साथ ही वहीं डॉग केयर सेंटर भी बनेगा। 1700 वर्ग मीटर में बनाए जाने वाले एबीसीएस व केयर सेंटर के लिए 80 लाख रुपये भी अवमुक्त कर दिए गए हैं। इसे कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएनडीएस) बनाकर तैयार कराएगी। उम्मीद है कि एक महीने में यह तैयार हो जाएगा। एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर पर प्रतिदिन 41 कुत्तों की नसबंदी कराई जाएगी। जबकि, केयर सेंटर में 30 कुत्तों की देखभाल की योजना है।

ऐसे करें बचाव
कुत्तों से बच्चों को दूर रखें, दौड़ाने पर रुक जाएं।
कुत्तों के काटने के बाद 10 से 12 बार काटने वाले स्थान को साबुन से धोएं। डाॅक्टर से संपर्क कर उपचार कराएं।

घर के आसपास रहने वाले कुत्तों के पानी और भोजन की व्यवस्था करें।
गर्मी के समय कुत्तों को परेशान न करें, न ही उन्हें मारें, इससे वह और आक्रामक हो जाते हैं।

पालक अपने कुत्तों को रैबीज वाले टीके अवश्य लगवा लें।


 

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