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Gorakhpur News: 30 हजार रुपये लेने के बाद नवजात को अस्पताल ने किया डिस्चार्ज
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पादरी बाजार (गोरखपुर)। शाहपुर क्षेत्र के फातिमा बाईपास स्थित एकता मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती नवजात को 30 हजार रुपये लेने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने रविवार को डिस्चार्ज कर दिया। नवजात के पिता शशि भूषण ने बताया कि बच्ची को लेकर वह आगे के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज गए हैं। इससे पहले परिजनों ने अस्पताल पर इलाज और दवा के नाम पर 96 हजार रुपये लेने के बाद डिस्चार्ज के लिए 90 हजार रुपये और मांगने का आरोप लगाया था।
कुशीनगर के तरयासुजान थाना क्षेत्र के गोपालपुर निवासी अर्जुन कुशवाहा ने बताया कि उनके बेटे शशि भूषण की पत्नी गुड़िया देवी को 29 अगस्त को प्रसव पीड़ा हुई थी। कसया के वरदान अस्पताल में ऑपरेशन से बच्ची का जन्म हुआ। सांस लेने में दिक्कत होने पर डॉक्टरों ने उसे एनआईसीयू में भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद परिजन बच्ची को पडरौना जिला अस्पताल ले गए, जहां वह छह दिन भर्ती रही। हालत में सुधार नहीं होने पर पांच सितंबर को डॉक्टरों ने उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
परिजन का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज ले जाने के दौरान एंबुलेंस चालक ने बेहतर इलाज का भरोसा देकर उन्हें गुमराह किया और बच्ची को फातिमा बाईपास स्थित एकता मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती करा दिया। अर्जुन के मुताबिक, पांच सितंबर से अस्पताल ने इलाज और दवा के नाम पर 96 हजार रुपये लिए। बच्ची की हालत में सुधार नहीं होने पर परिजनों ने बृहस्पतिवार से उसे डिस्चार्ज करने की मांग की, ताकि मेडिकल कॉलेज में इलाज कराया जा सके। आरोप है कि अस्पताल की ओर से 90 हजार रुपये और जमा करने पर ही डिस्चार्ज करने की बात कही गई। परेशान परिजनों ने शनिवार को डायल 112 पर सूचना दी। उनका आरोप था कि पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें समझाकर लौटा दिया।
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कुशीनगर के तरयासुजान थाना क्षेत्र के गोपालपुर निवासी अर्जुन कुशवाहा ने बताया कि उनके बेटे शशि भूषण की पत्नी गुड़िया देवी को 29 अगस्त को प्रसव पीड़ा हुई थी। कसया के वरदान अस्पताल में ऑपरेशन से बच्ची का जन्म हुआ। सांस लेने में दिक्कत होने पर डॉक्टरों ने उसे एनआईसीयू में भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद परिजन बच्ची को पडरौना जिला अस्पताल ले गए, जहां वह छह दिन भर्ती रही। हालत में सुधार नहीं होने पर पांच सितंबर को डॉक्टरों ने उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
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परिजन का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज ले जाने के दौरान एंबुलेंस चालक ने बेहतर इलाज का भरोसा देकर उन्हें गुमराह किया और बच्ची को फातिमा बाईपास स्थित एकता मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती करा दिया। अर्जुन के मुताबिक, पांच सितंबर से अस्पताल ने इलाज और दवा के नाम पर 96 हजार रुपये लिए। बच्ची की हालत में सुधार नहीं होने पर परिजनों ने बृहस्पतिवार से उसे डिस्चार्ज करने की मांग की, ताकि मेडिकल कॉलेज में इलाज कराया जा सके। आरोप है कि अस्पताल की ओर से 90 हजार रुपये और जमा करने पर ही डिस्चार्ज करने की बात कही गई। परेशान परिजनों ने शनिवार को डायल 112 पर सूचना दी। उनका आरोप था कि पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें समझाकर लौटा दिया।
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