गोरखपुर में 73 वर्षों बाद टूटेगी परंपरा, नहीं लगेगा रेलवे स्कूल का ऐतिहासिक मेला
- दशहरे पर एनई रेलवे बालक इंटर कॉलेज में लगता है शहर का सबसे बड़ा मेला
- कोरोना से बचाव के लिए समिति ने इस बार मेला नहीं लगाने का लिया निर्णय
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एनई रेलवे दुर्गा पूजा समिति असुरन चौक की ओर से बंगाली रीति रिवाज से दुर्गा पूजा का आयोजन 73 वर्षों से हर साल एनई रेलवे बालक इंटर कॉलेज के मैदान में होता रहा है। यहां नवरात्र की षष्ठी से दुर्गा पूजा महोत्सव की शुरुआत हो जाती है। कॉलेज के मैदान में व्यवस्थित रूप से जिले का सबसे भव्य मेला दुर्गा पूजा पर लगता है।
नवरात्र शुरू होते ही देशभर से सैकड़ों की संख्या में व्यापारी यहां पहुंचकर अपनी दुकानें सजाना शुरू कर देते हैं। बच्चों और बड़ों दोनों के लिए मनोरंजन के व्यापाक इंतजाम रहते हैं। मेला प्रांगण में ही तमाम सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं जिनका देर रात तक लोग आनंद लेते रहते हैं। लेकिन 73 वर्षों बाद कोरोना ने मेले की रौनक पर ग्रहण लगा दिया।
समिति ने शासन के गाइडलाइन के पूर्व ही लोगों की सुरक्षा के दृष्टि से इस बार मेला नहीं लगवाने का निर्णय लिया है। समिति के सह सचिव देवेंद्र पांडेय ने बताया की लोगों की सुरक्षा के दृष्टि से इस बार मेला नहीं लगाया जाएगा। लेकिन दुर्गा पूजा का स्वरूप कोरोना काल में कैसा होगा इसके लिए शासन की गाइडलाइन का इंतजार रहेगा।
ज्ञापन सौंप वेदी पर कलश स्थापना की मांगी अनुमति
एनई रेलवे दुर्गा पूजा समिति रेलवे बालक इंटर कॉलेज के पदाधिकारियों ने बुधवार को एडीएम को ज्ञापन सौंप वेदी पर कलश स्थापित कर दुर्गा पूजा में पूजन-अर्चन की अनुमति मांगी। प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र पांडेय ने कहा कि हम सब प्रशासन के साथ हैं। हमें दुर्गा पूजा अपनी वेदी पर कलश स्थापना की अनुमति दी जाए, हम किसी प्रकार का कोई भव्य मेला का आयोजन या जुलूस नहीं निकालेंगे।
इस पर एडीएम ने कहा कि जब तक शासन का दुर्गा पूजा के संबंध में कोई आदेश नहीं आएगा हम उस पर कोई आश्वासन या आदेश नहीं दे सकते हैं। प्रतिनिधि मंडल में दिलीप चटर्जी संयोजक, विनय चौधरी, प्रमोद राय आदि शामिल रहे।