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Gorakhpur AIIMS: चेहरे पर चीरा लगाए बिना निकाल दी महिला के जबड़े की हड्डी, लोगों ने माना आश्चर्य
Fri, 08 Sep 2023 02:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 08 Sep 2023 02:46 PM IST
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महिला के जबड़े की हड्डी बदलने वाले एम्स के डॉक्टरों की टीम।
- फोटो : अमर उजाला।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के दंत शल्य विभाग में चेहरे की हड्डी में ट्यूमर से परेशान सोनबरसा की 33 वर्षीय महिला का ऑपरेशन किया गया। खास बात यह है कि यह आपरेशन बीना चीरा लगाए किया गया।
महिला का ऑपरेशन करने वाले एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डाॅ. शैलेश कुमार ने बताया कि यह जटिल सर्जरी थी। सोनबरसा निवासी महिला कुछ वर्षों से चेहरे की हड्डी के ट्यूमर से ग्रसित थी। जांच में पता चला कि चेहरे के निचले जबड़े की हड्डी खोखली हो चुकी है।
ऑपरेशन की जटिलता और ऑपरेशन के बाद चेहरे की विकृति की चिंता से महिला और अधिक परेशान थी। ऐसे में ऑपरेशन का निर्णय लिया। चार घंटे चले ऑपरेशन में निचले जबड़े की गली हुई हड्डी को बिना चेहरे पर चीरा लगाए निकाला गया। फिर कृत्रिम जबड़े को लगाया गया।
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इस ऑपरेशन के दौरान एनेस्थिसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वर्धान सेठ, डाॅ. विजेता वाजपेयी, डाॅ. रवि शंकर भी मौजूद रहे। डाॅ. शैलेश कुमार ने बताया कि ऐसे जटिल ऑपरेशन को बिना चेहरे पर चीरा लगाए करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है। मरीज़ की सर्जरी पूर्ण बेहोशी में की जाती है। कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन करने वाली टीम को बधाई दी है।
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महिला का ऑपरेशन करने वाले एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डाॅ. शैलेश कुमार ने बताया कि यह जटिल सर्जरी थी। सोनबरसा निवासी महिला कुछ वर्षों से चेहरे की हड्डी के ट्यूमर से ग्रसित थी। जांच में पता चला कि चेहरे के निचले जबड़े की हड्डी खोखली हो चुकी है।
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ऑपरेशन की जटिलता और ऑपरेशन के बाद चेहरे की विकृति की चिंता से महिला और अधिक परेशान थी। ऐसे में ऑपरेशन का निर्णय लिया। चार घंटे चले ऑपरेशन में निचले जबड़े की गली हुई हड्डी को बिना चेहरे पर चीरा लगाए निकाला गया। फिर कृत्रिम जबड़े को लगाया गया।
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इस ऑपरेशन के दौरान एनेस्थिसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वर्धान सेठ, डाॅ. विजेता वाजपेयी, डाॅ. रवि शंकर भी मौजूद रहे। डाॅ. शैलेश कुमार ने बताया कि ऐसे जटिल ऑपरेशन को बिना चेहरे पर चीरा लगाए करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है। मरीज़ की सर्जरी पूर्ण बेहोशी में की जाती है। कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन करने वाली टीम को बधाई दी है।