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Gorakhpur News: लग्जरी होटलों में प्रेमिकाओं को बांटता था गिफ्ट..केस हुआ तो गली-मुहल्ले में जा छिपा
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- बिहार और शहर की प्रेमिकाओं को ज्वेलरी, मोबाइल, कपड़े व महंगे गिफ्ट देकर जीत लेता था भरोसा
- बिहार में भंडाफोड़ के बाद गोरखपुर में किराए के मकान में रह रहा था छिपकर
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बिहार के सीतामढ़ी मेहसौल निवासी फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार सिंह की जांच में पता चला है कि बिहार में उसकी करतूतों का भंडाफोड़ होने से पहले वहां की एक युवती को लगातार शहर के लग्जरी होटलों में बुलाता था। गोरखपुर में भी तीन प्रेमिकाओं को लग्जरी होटलों में बुलाकर महंगे मोबाइल, ज्वेलरी, ब्रांडेड कपड़े व गिफ्ट देकर वह उनका भरोसा जीतता था। बिहार में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज होने के बाद गौरव ने अपना ठिकाना बदल लिया और गुलरिहा के मुहल्ले झुंगिया-मुड़िला की गली में किराए के मकान में छिपकर रहने लगा।
सोशल मीडिया पर आईएएस अफसर के तौर पर प्रोफाइल बनाकर वह लोगों को झांसे में लेता रहा। पुलिस की जांच में सामने आया है कि गौरव जब भी गोरखपुर में होता तो बिहार की एक प्रेमिका को शहर के महंगे होटलों में बुलाता था। खुद को 2022 बैच का आईएएस बताते हुए कहता था कि उसका ट्रांसफर कभी भी हो सकता है इसलिए होटल में रुकना मजबूरी है। युवती को झांसे में रखने के लिए अक्सर महंगी ज्वेलरी गिफ्ट करता था। होटल, कैब, डिनर सभी खर्च का डिजिटल पेमेंट करता था ताकि रुतबा और विश्वसनीयता बनी रहे।
गौरव ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर शहर में रहने वाले पटेल से 30 हजार रुपये प्रतिमाह व बिजली बिल पर किराए पर मकान लिया था। जांच में यह भी पता चला है कि उसने यहां रहने वाली तीन युवतियों से नजदीकियां बना रखीं थीं जिन्हें सरकारी योजनाओं में मदद, नौकरी और ठेका दिलाने का झांसा देता था। महंगे मोबाइल फोन, कपड़े और उपहार देकर उन्हें प्रभाव में बनाए रखता था। सूत्रों के अनुसार, ये तीनों युवतियां फर्जी निरीक्षण के दौरान ही उसके संपर्क में आईं थीं। स्थानीय स्तर पर उसने चार लोगों की टीम भी बना रखी थी। इन्हें सरकारी विभागों में अपने संपर्कों का हवाला देकर प्रभावित करता था।
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बिहार में मामला खुला तो गोरखपुर में आकर छिपा
बिहार के मोकामा में जब ललित के फर्जीवाड़े की शिकायत हुई और पुलिस उसकी तलाश में जुटी तो वह गोरखपुर आ गया। यहां वह गौरव कुमार सिंह के नाम से रह रहा था और लगातार सोशल मीडिया पर खुद को आईएएस बताने वाली पोस्ट कर रहा था। जांचकर्ताओं के अनुसार वह बिहार, लखनऊ, दिल्ली, मध्यप्रदेश और झारखंड में समय बिताता था। सोशल मीडिया पर उसकी लग्जरी लाइफस्टाइल देखकर लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे।
भंडाफोड़ के बाद प्रेमिका ने पुलिस से किया संपर्क
गोरखपुर में ललित की गिरफ्तारी के बाद जब मामले की जानकारी सोशल मीडिया और स्थानीय चैनलों के जरिये फैलने लगी तब बिहार की रहने वाली उसकी प्रेमिका ने पुलिस से संपर्क किया। उसने बताया कि गौरव ने नौकरी और आर्थिक मदद का वादा करके लाखों रुपये लिए थे। कई बार महंगे होटल में बुलाकर कहता था कि वह प्रोजेक्ट फंड्स और सरकारी मीटिंग्स में व्यस्त है। पुलिस के मुताबिक युवती के बयान धोखाधड़ी की पूरी साजिश को मजबूत करते हैं। अब तक कई और लोग आगे आ चुके हैं, जिन्होंने गौरव पर ठगी के आरोप लगाए हैं।
ठगी में इस्तेमाल पुराना मोबाइल और सिमकार्ड तोड़कर फेंका
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी आईएएस ललित ने ठगी से जुड़े सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, गोरखपुर छोड़ने से पहले उसने अपना वह पुराना मोबाइल नष्ट कर दिया, जिसमें ठगी से संबंधित चैट, कॉल रिकॉर्ड और लेन-देन के प्रमाण थे। मोबाइल के साथ उसने इस्तेमाल सिमकार्ड भी तोड़कर फेंक दिए, ताकि पुलिस उसकी लोकेशन या पुराने नेटवर्क तक न पहुंच सके। विशेषज्ञ टीम अब उसके डिजिटल फुटप्रिंट को जोड़कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है।
कोट
पुलिस ललित की संपत्ति, बैंक खातों, डिजिटल गतिविधियों और उन लोगों की सूची खंगाल रही है जिनसे उसने खुद को अधिकारी बताकर संपर्क किया था। माना जा रहा है कि यह नेटवर्क और बड़ा है और आने वाले दिनों में कई पर्दाफाश और हो सकते हैं।
- रवि सिंह, सीओ गोरखनाथ
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- बिहार में भंडाफोड़ के बाद गोरखपुर में किराए के मकान में रह रहा था छिपकर
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बिहार के सीतामढ़ी मेहसौल निवासी फर्जी आईएएस ललित किशोर उर्फ गौरव कुमार सिंह की जांच में पता चला है कि बिहार में उसकी करतूतों का भंडाफोड़ होने से पहले वहां की एक युवती को लगातार शहर के लग्जरी होटलों में बुलाता था। गोरखपुर में भी तीन प्रेमिकाओं को लग्जरी होटलों में बुलाकर महंगे मोबाइल, ज्वेलरी, ब्रांडेड कपड़े व गिफ्ट देकर वह उनका भरोसा जीतता था। बिहार में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज होने के बाद गौरव ने अपना ठिकाना बदल लिया और गुलरिहा के मुहल्ले झुंगिया-मुड़िला की गली में किराए के मकान में छिपकर रहने लगा।
सोशल मीडिया पर आईएएस अफसर के तौर पर प्रोफाइल बनाकर वह लोगों को झांसे में लेता रहा। पुलिस की जांच में सामने आया है कि गौरव जब भी गोरखपुर में होता तो बिहार की एक प्रेमिका को शहर के महंगे होटलों में बुलाता था। खुद को 2022 बैच का आईएएस बताते हुए कहता था कि उसका ट्रांसफर कभी भी हो सकता है इसलिए होटल में रुकना मजबूरी है। युवती को झांसे में रखने के लिए अक्सर महंगी ज्वेलरी गिफ्ट करता था। होटल, कैब, डिनर सभी खर्च का डिजिटल पेमेंट करता था ताकि रुतबा और विश्वसनीयता बनी रहे।
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गौरव ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर शहर में रहने वाले पटेल से 30 हजार रुपये प्रतिमाह व बिजली बिल पर किराए पर मकान लिया था। जांच में यह भी पता चला है कि उसने यहां रहने वाली तीन युवतियों से नजदीकियां बना रखीं थीं जिन्हें सरकारी योजनाओं में मदद, नौकरी और ठेका दिलाने का झांसा देता था। महंगे मोबाइल फोन, कपड़े और उपहार देकर उन्हें प्रभाव में बनाए रखता था। सूत्रों के अनुसार, ये तीनों युवतियां फर्जी निरीक्षण के दौरान ही उसके संपर्क में आईं थीं। स्थानीय स्तर पर उसने चार लोगों की टीम भी बना रखी थी। इन्हें सरकारी विभागों में अपने संपर्कों का हवाला देकर प्रभावित करता था।
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बिहार में मामला खुला तो गोरखपुर में आकर छिपा
बिहार के मोकामा में जब ललित के फर्जीवाड़े की शिकायत हुई और पुलिस उसकी तलाश में जुटी तो वह गोरखपुर आ गया। यहां वह गौरव कुमार सिंह के नाम से रह रहा था और लगातार सोशल मीडिया पर खुद को आईएएस बताने वाली पोस्ट कर रहा था। जांचकर्ताओं के अनुसार वह बिहार, लखनऊ, दिल्ली, मध्यप्रदेश और झारखंड में समय बिताता था। सोशल मीडिया पर उसकी लग्जरी लाइफस्टाइल देखकर लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे।
भंडाफोड़ के बाद प्रेमिका ने पुलिस से किया संपर्क
गोरखपुर में ललित की गिरफ्तारी के बाद जब मामले की जानकारी सोशल मीडिया और स्थानीय चैनलों के जरिये फैलने लगी तब बिहार की रहने वाली उसकी प्रेमिका ने पुलिस से संपर्क किया। उसने बताया कि गौरव ने नौकरी और आर्थिक मदद का वादा करके लाखों रुपये लिए थे। कई बार महंगे होटल में बुलाकर कहता था कि वह प्रोजेक्ट फंड्स और सरकारी मीटिंग्स में व्यस्त है। पुलिस के मुताबिक युवती के बयान धोखाधड़ी की पूरी साजिश को मजबूत करते हैं। अब तक कई और लोग आगे आ चुके हैं, जिन्होंने गौरव पर ठगी के आरोप लगाए हैं।
ठगी में इस्तेमाल पुराना मोबाइल और सिमकार्ड तोड़कर फेंका
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी आईएएस ललित ने ठगी से जुड़े सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, गोरखपुर छोड़ने से पहले उसने अपना वह पुराना मोबाइल नष्ट कर दिया, जिसमें ठगी से संबंधित चैट, कॉल रिकॉर्ड और लेन-देन के प्रमाण थे। मोबाइल के साथ उसने इस्तेमाल सिमकार्ड भी तोड़कर फेंक दिए, ताकि पुलिस उसकी लोकेशन या पुराने नेटवर्क तक न पहुंच सके। विशेषज्ञ टीम अब उसके डिजिटल फुटप्रिंट को जोड़कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है।
कोट
पुलिस ललित की संपत्ति, बैंक खातों, डिजिटल गतिविधियों और उन लोगों की सूची खंगाल रही है जिनसे उसने खुद को अधिकारी बताकर संपर्क किया था। माना जा रहा है कि यह नेटवर्क और बड़ा है और आने वाले दिनों में कई पर्दाफाश और हो सकते हैं।
- रवि सिंह, सीओ गोरखनाथ