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जीएसटी : कारण बताओ नोटिस जारी होने के पहले टैक्स जमा करने पर जुर्माना कम
Sun, 12 Jan 2020 10:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2020 10:31 AM IST
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जीएसटी
- फोटो : self
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी होने के पहले टैक्स जमा अदा कर देने पर मात्र 10 प्रतिशत जुर्माना अदा करना पड़ेगा। अन्यथा 100 प्रतिशत तक जुर्माना अदा करना पड़ेगा। वहीं विभाग कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना कोई भी कार्रवाई नहीं कर सकता है।
शनिवार को गोरखपुर क्लब की उत्तरप्रदेश कर अधिवक्ता संगठन के प्रांतीय सम्मेलन में जीएसटी के संबंध में आयोजित कार्यशाला में इलाहाबाद के जीएसटी विशेषज्ञ प्रांजल त्रिपाठी ने उक्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीएसटी में कारण बताओ नोटिस के संबंध में कई तरह के प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में जीएसटी के अधिवक्ताओं को इस संबंध में जानकारी रखनी बहुत जरूरी है।
थोड़ी सी लापरवाही से जुर्माने की रकम काफी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में नोटिस जारी होने से लेकर कार्रवाई संबंधी आदेश जारी होने के बाद जुर्माने की रकम के संबंध में जानना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अगर किसी व्यापारी के खिलाफ जीएसटी के संबंध में वाणिज्य कर विभाग कारण बताओ नोटिस करने के पहले ही टैक्स की रकम जमा कर दिया जाता है तो मात्र 10 प्रतिशत ही जुर्माना देना होगा।
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वहीं नोटिस जारी होने के 30 दिन के अंदर जुर्माने की रकम 25 प्रतिशत और 30 दिन के बाद 50 प्रतिशत तक जुर्माना देना होगा। वहीं कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद समय सीमा बीतने के बाद विभाग की ओर से कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया जाता है तो 100 प्रतिशत तक जुर्माना देना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि हालांकि बिना नोटिस जारी किए किसी व्यापारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है, लेकिन टर्नओवर लिमिट से ज्यादा के टैक्स के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना भी कार्रवाई की जा सकती है।
वरिष्ठ टैक्स अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बताया कि एसआईबी जांच के मामले में टीम को एनएसआई-01 लेकर जाना जरूरी है, लेकिन सामान्य तौर पर एसआईबी टीम एनएसआई-02 से शुरुआत करती है। ऐसे में व्यापारी और टैक्स अधिवक्ताओं को इस संबंध में टीम से एनएसआई-01 की मांग करनी चाहिए। इस दौरान उत्तरप्रदेश कर अधिवक्ता संगठन के संस्थापक अध्यक्ष हर्ष सिन्हा ने जीएसटी के संबंध में कई जानकारियां दीं। इस दौरान काफी संख्या में टैक्स अधिवक्ता मौजूद रहे।
इन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को किया गया सम्मानित
उत्तरप्रदेश कर अधिवक्ता संगठन की ओर से अधिवक्ता के तौर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिवक्ताओं को सम्मानित किया गया। इनमें वीरेंद्र नाथ गुप्ता, सुशील श्रीवास्तव, मधुसूदन दास, महेंद्र कुमार अग्रवाल, बीपी द्विवेदी, मुस्ताक अहमद खान, राधेश्याम श्रीवास्तव, रामकृष्ण तिवारी, देवेंदु नाथ, मुमताज अली, सुरेंद्र जायसवाल, सुरेश चंद्र गुप्ता, सुनील यादव, हरि लाल, दीपक कुमार श्रीवास्तव, प्रभात रंजन पाठक शामिल रहे।
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शनिवार को गोरखपुर क्लब की उत्तरप्रदेश कर अधिवक्ता संगठन के प्रांतीय सम्मेलन में जीएसटी के संबंध में आयोजित कार्यशाला में इलाहाबाद के जीएसटी विशेषज्ञ प्रांजल त्रिपाठी ने उक्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीएसटी में कारण बताओ नोटिस के संबंध में कई तरह के प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में जीएसटी के अधिवक्ताओं को इस संबंध में जानकारी रखनी बहुत जरूरी है।
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थोड़ी सी लापरवाही से जुर्माने की रकम काफी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में नोटिस जारी होने से लेकर कार्रवाई संबंधी आदेश जारी होने के बाद जुर्माने की रकम के संबंध में जानना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अगर किसी व्यापारी के खिलाफ जीएसटी के संबंध में वाणिज्य कर विभाग कारण बताओ नोटिस करने के पहले ही टैक्स की रकम जमा कर दिया जाता है तो मात्र 10 प्रतिशत ही जुर्माना देना होगा।
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वहीं नोटिस जारी होने के 30 दिन के अंदर जुर्माने की रकम 25 प्रतिशत और 30 दिन के बाद 50 प्रतिशत तक जुर्माना देना होगा। वहीं कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद समय सीमा बीतने के बाद विभाग की ओर से कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया जाता है तो 100 प्रतिशत तक जुर्माना देना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि हालांकि बिना नोटिस जारी किए किसी व्यापारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है, लेकिन टर्नओवर लिमिट से ज्यादा के टैक्स के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना भी कार्रवाई की जा सकती है।
वरिष्ठ टैक्स अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बताया कि एसआईबी जांच के मामले में टीम को एनएसआई-01 लेकर जाना जरूरी है, लेकिन सामान्य तौर पर एसआईबी टीम एनएसआई-02 से शुरुआत करती है। ऐसे में व्यापारी और टैक्स अधिवक्ताओं को इस संबंध में टीम से एनएसआई-01 की मांग करनी चाहिए। इस दौरान उत्तरप्रदेश कर अधिवक्ता संगठन के संस्थापक अध्यक्ष हर्ष सिन्हा ने जीएसटी के संबंध में कई जानकारियां दीं। इस दौरान काफी संख्या में टैक्स अधिवक्ता मौजूद रहे।
इन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को किया गया सम्मानित
उत्तरप्रदेश कर अधिवक्ता संगठन की ओर से अधिवक्ता के तौर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिवक्ताओं को सम्मानित किया गया। इनमें वीरेंद्र नाथ गुप्ता, सुशील श्रीवास्तव, मधुसूदन दास, महेंद्र कुमार अग्रवाल, बीपी द्विवेदी, मुस्ताक अहमद खान, राधेश्याम श्रीवास्तव, रामकृष्ण तिवारी, देवेंदु नाथ, मुमताज अली, सुरेंद्र जायसवाल, सुरेश चंद्र गुप्ता, सुनील यादव, हरि लाल, दीपक कुमार श्रीवास्तव, प्रभात रंजन पाठक शामिल रहे।