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प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड ने दी चेतावनी: गोरखपुर शहर में संकट खड़ा कर रहा भूगर्भ जल दोहन, 122 होटलों को नोटिस

Wed, 28 Jun 2023 03:38 PM IST
vivek shukla अरुण मुन्ना, गोरखपुर।
अरुण मुन्ना, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 28 Jun 2023 03:38 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गोरखपुर वैज्ञानिक सहायक राममिलन वर्मा ने कहा कि बिना एनओसी के लोग भूगर्भ जल का दोहन कर रहे हैं। इस मामले में चिह्नित किए गए 122 होटल और बैंक्वेट हॉल संचालकों को नोटिस भेजा गया है।

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Ground water exploitation creating crisis in Gorakhpur notice to 122 hotels
पानी की समस्या - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर शहर में भूगर्भ जल दोहन बड़ा संकट खड़ा कर रहा है। यदि ऐसा जारी रहा तो आने वाले समय में बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। इसी के चलते बिना एनओसी लिए भूगर्भ जल का दोहन करने वाले 122 होटल और बैंक्वेट हाॅल संचालकों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने बताया कि अभी सिर्फ नोटिस भेजा गया है। यदि होटल संचालकों ने एनओसी नहीं लिया तो जुर्माना और नियमानुसार अन्य कार्रवाई की जाएगी।

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जानकारी के मुताबिक, शहर में संचालित होने वाले होटल, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हाॅल में भूगर्भ जल का इस्तेमाल होता है। भूगर्भ जल विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी- नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लिए बिना ही तमाम जगहों पर पानी का इस्तेमाल जमकर होता है। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सूची तैयार गई। शहर के कुल 122 होटल, बैंक्वेट हाॅल और रेस्टाेरेंट की सूची बनाकर बीते सप्ताह ही उनको नोटिस भेजा गया है। इसमें सभी को एनओसी लेने का निर्देश दिया गया है।
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प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, भूगर्भ जल अधिनियम 2019 के तहत कृषि और घरेलू प्रयोग को छोड़कर सभी प्रकार की संस्थाओं को भूगर्भ जल विभाग की ओर से एनओसी लेने का नियम है। ऐसे संचालकों को बोरवेल बंद करके नगर निगम के पानी का इस्तेमाल करना होगा।

यह है एनओसी लेने का तरीका

एनओसी के लिए पांच हजार रुपये का शुल्क निर्धारित है। एक हजार लीटर पर 1.20 रुपये का शुल्क शहरी क्षेत्र में लिया जाता है।भूगर्भ जल विभाग के पोर्टल पर एनओसी लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था है। इस पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भूगर्भ जल विभाग के पोर्टल पर मांगी गई जानकारी भरें। आवेदन के बाद संबंधित विभाग के कर्मचारी, आवेदक के संस्थान का भौतिक निरीक्षण करके एनओसी की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

अत्यधिक दोहन का दुष्प्रभाव सेहत पर भी
उप्र भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) कानून 2019 के तहत कृषि एवं घरेलू उपयोग के लिए भूजल दोहन की छूट है। लेकिन इस कानून की आड़ में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान व संस्थान भूगर्भ जल का अत्यधिक दोहन करते हैं। इसका दुष्परिणाम यह है कि जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। पानी की बर्बादी से कई इलाकों में जल संकट भी खड़ा हो रहा है। भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन का दुष्प्रभाव लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है।

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पर्यावरणविद प्रो गोविंद पांडेय ने बताया कि राज्य में भूजल दोहन का सबसे बड़ा नुकसान है कि इससे पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा बढ़ रही है। मानक से अधिक आर्सेनिकयुक्त पानी लंबे समय तक पीने से आर्सेनिक किरैटोसिस होती है।

इसके अलावा त्वचा के कैंसर, मूत्राशय, फेफड़े और गुर्दे के कैंसर की आशंका रहती है। गैंगरीन, हाई ब्लड प्रेशर की समस्याएं भी हो सकती हैं। फ्लोराइड की अधिकता से डेंटल फ्लोरोसिस और स्केल्टल (बोन) फ्लोरोसिस जैसी बीमारियों की आशंका रहती है।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गोरखपुर वैज्ञानिक सहायक राममिलन वर्मा ने कहा कि बिना एनओसी के लोग भूगर्भ जल का दोहन कर रहे हैं। इस मामले में चिह्नित किए गए 122 होटल और बैंक्वेट हॉल संचालकों को नोटिस भेजा गया है। इसमें सभी को पंजीकरण कराने और एनओसी लेने का निर्देश दिया गया है।

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