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त्रिस्तरीय पंचाय चुनाव 2021: शासन को बैठे-बिठाए मुफ्त में मिले 3 करोड़, जानिए कैसे
Mon, 16 Aug 2021 04:15 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 16 Aug 2021 04:15 PM IST
सार
जीत की खुशी और हार के गम में प्रत्याशियों ने न जमानत राशि वापस ली न ही खर्च का ब्यौरा ही दिया। 3 अगस्त तक जमानत राशि वापस लेने के लिए आवेदन की थी अंतिम तिथि।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में शासन- प्रशासन को बैठे-बैठे तीन करोड़ से अधिक की राशि मिलने की उम्मीद है। पंचायत चुनाव में जीत की खुशी और हार के गम में प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य के साथ ही जिला पंचायत सदस्य के हजारों प्रत्याशियों ने न तो जमानत राशि वापस ली और ना ही खर्च का ब्यौरा दिया। चुनाव खत्म होने कि 3 महीने के भीतर जमानत राशि वापस लेने के लिए आवेदन करना था। मगर गिनती के कुछ एक प्रत्याशियों को छोड़ किसी ने भी आवेदन नहीं किया।
3 अगस्त आवेदन करने की आखरी तिथि थी। ऐसे में अब ये प्रत्याशी जमानत राशि नहीं पा सकेंगे। इसी तरह से चुनाव खत्म होने के 3 महीने के भीतर ही सभी प्रत्याशियों को खर्च का ब्यौरा देना था। मगर तय अवधि 3 अगस्त तक किसी भी प्रत्याशी ने खर्च का हिसाब नहीं दिया। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार खर्च का हिसाब न देने पर जमानत राशि जब्त कर लेने का प्रावधान है।
जरूरी मत न हासिल कर पाने पर भी तमाम प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हो गई है। निर्वाचन कार्यालय अब दोनों ही मदों में कितनी धनराशि बची है इसका आकलन कर रहा है। सहायक निर्वाचन अधिकारी जयनारायण मौर्या के मुताबिक जमानत राशि नहीं लेने और खर्च का ब्यौरा न देने पर जब्त जमानत धनराशि को मिलाकर करीब 3 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग और शासन को भेजी जा रही है।
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प्रधान- बीडीसी सदस्य के अनारक्षित वर्ग की जमानत राशि 2000 रुपये
निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक प्रधान और बीडीसी सदस्य के आरक्षित पदों के लिए 1000 और अनारक्षित के लिए 2000 रुपये जमानत राशि तय थी। इसी तरह ग्राम पंचायत सदस्य के आरक्षित पद के लिए 500, अनारक्षित के लिए 2500 और जिला पंचायत सदस्य के आरक्षित पदों के लिए 2500 और अनारक्षित के लिए 5000 रुपये जमानत राशि तय थी। जिले में 1294 प्रधान पद के लिए 4500 से अधिक जबकि 1700 बीडीसी सदस्य के लिए 2500 से अधिक प्रत्याशी मैदान में थे। चारों ही पदों के लिए करीब 10 हजार प्रत्याशी चुनाव मैदान में खड़े हुए थे।
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3 अगस्त आवेदन करने की आखरी तिथि थी। ऐसे में अब ये प्रत्याशी जमानत राशि नहीं पा सकेंगे। इसी तरह से चुनाव खत्म होने के 3 महीने के भीतर ही सभी प्रत्याशियों को खर्च का ब्यौरा देना था। मगर तय अवधि 3 अगस्त तक किसी भी प्रत्याशी ने खर्च का हिसाब नहीं दिया। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार खर्च का हिसाब न देने पर जमानत राशि जब्त कर लेने का प्रावधान है।
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जरूरी मत न हासिल कर पाने पर भी तमाम प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हो गई है। निर्वाचन कार्यालय अब दोनों ही मदों में कितनी धनराशि बची है इसका आकलन कर रहा है। सहायक निर्वाचन अधिकारी जयनारायण मौर्या के मुताबिक जमानत राशि नहीं लेने और खर्च का ब्यौरा न देने पर जब्त जमानत धनराशि को मिलाकर करीब 3 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग और शासन को भेजी जा रही है।
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प्रधान- बीडीसी सदस्य के अनारक्षित वर्ग की जमानत राशि 2000 रुपये
निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक प्रधान और बीडीसी सदस्य के आरक्षित पदों के लिए 1000 और अनारक्षित के लिए 2000 रुपये जमानत राशि तय थी। इसी तरह ग्राम पंचायत सदस्य के आरक्षित पद के लिए 500, अनारक्षित के लिए 2500 और जिला पंचायत सदस्य के आरक्षित पदों के लिए 2500 और अनारक्षित के लिए 5000 रुपये जमानत राशि तय थी। जिले में 1294 प्रधान पद के लिए 4500 से अधिक जबकि 1700 बीडीसी सदस्य के लिए 2500 से अधिक प्रत्याशी मैदान में थे। चारों ही पदों के लिए करीब 10 हजार प्रत्याशी चुनाव मैदान में खड़े हुए थे।