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Gorakhpur News: निलंबित 14 दृष्टिबाधित छात्रों को स्कूल-हॉस्टल से निकाला
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छात्रावास से निकाले गए दिव्यांग छात्र रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के लिए इकठ्ठा हुए।
गोरखपुर। स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज के जिन छात्रों ने बृहस्पतिवार को डीएम कार्यालय पर मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया था, अब उनके खिलाफ सख्ती शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार की दोपहर में अचानक 14 छात्रों को निलंबित करते हुए उन्हें तत्काल विद्यालय और हॉस्टल खाली करने का आदेश दे दिया गया। निरीह छात्र बिना किसी गार्जियन के अपना सामान लिए घर के लिए चल दिए। बच्चों ने आपस में चंदा कर एक ऑटो तय किया और बस और रेलवे स्टेशन पहुंचकर अपने-अपने घर को रवाना हो गए। बच्चों की निगरानी के लिए पुलिस लगाई गई थी।
बृहस्पतिवार को दृष्टिबाधित छात्र स्कूल में शिक्षकों की कमी, छोटे बच्चों का अटेंडेंट नहीं होने समेत कई मुद्दों को लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे थे। उनका कहना था कि वहां एक अफसर बात करने आए थे, लेकिन वे लोग डीएम से मिलकर अपनी बात कहना चाहते थे। इस पर कर्मचारियों ने दफ्तर का गेट बंद कर दिया। कुछ छात्रों ने अपनी बात रखने के लिए दरवाजा पीटा, जिससे नाराज अफसरों और कर्मचारिनों ने उन्हें बुरी तरह से पीटा। कई के पीठ और शरीर पर निशान पड़ गए हैं। पिटाई के बाद सभी को जबरन बस में भरकर विद्यालय भेज दिया गया।
शुक्रवार को विद्यालय के प्रधानाचार्य लक्ष्मी शंकर जायसवाल ने विद्यालय के 14 छात्रों को निलंबित कर दिया। दोपहर बाद छात्रों को विद्यालय और छात्रावास खाली करने के लिए भी कह दिया गया। निकाले गये छात्र वाराणसी, हरदोई, बस्ती, बलिया, सिद्धार्थनगर सहित अन्य जिलों के रहने वाले हैं। विद्यालय से निकले छात्र बहुत देर तक गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर बैठे रहे। शाम तक छात्र विभिन्न ट्रेनों से अपने घर के लिए रवाना हुए।
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बोले छात्र
हमारे विद्यालय में पहले से शिक्षक कम हैं, ऐसे में मिड सेशन में अध्यापकों का तबादला रोकने की मिन्नत करने पर हमें पीटा गया है। विद्यालय में हमें खाने, पानी से लेकर पढ़ने तक की सुविधा नहीं मिल रही है।
अमित यादव, भदौही
दोपहर में अचानक हमसे हॉस्टल खाली करने के लिए कह दिया गया। हम हॉस्टल खाली करके आ गए हैं। यहां से कैसे घर जाना है, कुछ समझ नहीं आ रहा है।
रवि, हरदोई
प्रदर्शन में 50 से अधिक छात्र शामिल थे। डीएम से मिलकर अपनी मांग रखना चाहते थे। बदले में हमें पीटकर भगा दिया गया और हमें उग्र और भड़काऊं छात्र घोषित करके हॉस्टल से भी निकाल दिया गया।
उमेश चंद्रा, सिद्धार्थनगर
अभिभावकों को बुलाए बिना घर भेजा जा रहा है। कल की पिटाई के बाद कई छात्रों की तबीयत भी खराब हो गई है। उसकी परवाह किए बिना हमें सामान समेत बाहर कर दिया गया।
फैजल अंसारी, सिद्धार्थनगर
1500 रुपये में महीने भर भोजन-नाश्ता, ध्यान रखने वाला भी कोई नहीं
- स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज में दृष्टिबाधित बच्चों को रोज झेलनी पड़ती हैं मुसीबतें
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज, लालडिग्गी के छात्रावास में रहने वाले दिव्यांग छात्र अपनी जिंदगी में छाए अंधेरे को दूर करने के लिए तो संघर्ष कर ही रहे हैं, रहने-खाने के लिए भी जूझ रहे हैं। 50 रुपये में दो टाइम भोजन के साथ वह अन्य जरूरी आवश्यकताओं को खुद पूरा करते हैं। छात्रावास में रहने वाले इन बच्चों को अपने से छोटे बच्चों को भी संभालना पड़ता है। स्कूल से खाना बनाने के लिए रसोइया मिली है, लेकिन राशन से लेकर साग-सब्जी तक का इंतजाम उनको ही करना होता है। रुपये कम पड़ते हैं तो आपस में चंदा लगाकर जरूरी सामान मंगाते हैं।
कॉलेज के छात्रावास में कक्षा एक से 12वीं तक के 100 छात्र हैं। 35 कमरों के छात्रावास में प्रत्येक कमरे में तीन छात्र रहते हैं। इन छात्रों को शासन से 2000 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। इसमें से 1500 रुपये खाने के लिए मेस में जमा कर देते हैं। इससे किचन के सामान के साथ सर्फ, साबुन और पेस्ट आदि का इंतजाम वह करते हैं। शेष 500 रुपये में उनकी अन्य जरूरतें पूरी होती हैं। विद्यालय की तरफ से खाना बनाने के लिए चार रसोइयाें की तैनाती की गई है। रसोई गैस सिलिंडर से लगायत राशन-सब्जी, चावल और दाल समेत अन्य सामान छात्रों की तरफ से जमा पैसे से आता है। छात्र बताते हैं कि सामान कम पड़ने पर वे फिर आपस में चंदा लगाते हैं। इसके लिए एक कमेटी भी बनी हुई है।
भइया! प्राइमरी के बच्चों के लिए मांग रहे थे वाशिंग मशीन
छात्रावास में रहने वाले छात्रों को अपना कार्य स्वयं करना होता है। इसके लिए कोई सहायक नहीं है। बड़े छात्र तो अपने कपड़े धो लेते हैं, लेकिन कक्षा एक से पांच में पढ़ने वाले छोटे बच्चे कपड़े नहीं धो पाते। उनकी दिक्कत जानकर बृहस्पतिवार को आंदोलित छात्र प्रशासन से प्राइमरी के बच्चों के लिए वाशिंग मशीन की मांग कर रहे थे। कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों की मार से खौफजदा छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह तीन वाशिंग मशीन की मांग कर रहे थे। इस पर उनको बेरहमी से पिटाई कर खदेड़ दिया गया। वह बहुत आस लेकर डीएम साहब के दरबार गए थे। लेकिन, उनको मिले सिर्फ आंसू...। छात्रों का कहना था कि अधिकारियों से अपनी दिक्कत बताने पर वह लिखित प्रार्थना-पत्र देने को कहने के सिवाय कुछ कार्रवाई नहीं करते हैं। विद्यालय में खेल, कंप्यूटर, संगीत सहित अन्य विषयों के शिक्षक नहीं है। हॉस्टल में बिजली-पानी की समस्या रहती है। पानी की टंकी की कोई साफ-सफाई नहीं है। इसकी शिकायत कई बार वार्डन से कर चुके हैं। ब्रेल की किताबें भी सही नहीं होती हैं।
वर्जन...
छात्रावास में रहने वाले छात्र शासन से मिलने वाली रकम से ही अपने खाने व अन्य जरूरतों को पूरा करते हैं। इसके लिए छात्रों की कमेटी गठित है। अन्य आवश्यकताओं को पूरा कराने का प्रयास किया जाता है।
लक्ष्मी शंकर जायसवाल, प्रधानाचार्य, राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज, लालडिग्गी
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बृहस्पतिवार को दृष्टिबाधित छात्र स्कूल में शिक्षकों की कमी, छोटे बच्चों का अटेंडेंट नहीं होने समेत कई मुद्दों को लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे थे। उनका कहना था कि वहां एक अफसर बात करने आए थे, लेकिन वे लोग डीएम से मिलकर अपनी बात कहना चाहते थे। इस पर कर्मचारियों ने दफ्तर का गेट बंद कर दिया। कुछ छात्रों ने अपनी बात रखने के लिए दरवाजा पीटा, जिससे नाराज अफसरों और कर्मचारिनों ने उन्हें बुरी तरह से पीटा। कई के पीठ और शरीर पर निशान पड़ गए हैं। पिटाई के बाद सभी को जबरन बस में भरकर विद्यालय भेज दिया गया।
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शुक्रवार को विद्यालय के प्रधानाचार्य लक्ष्मी शंकर जायसवाल ने विद्यालय के 14 छात्रों को निलंबित कर दिया। दोपहर बाद छात्रों को विद्यालय और छात्रावास खाली करने के लिए भी कह दिया गया। निकाले गये छात्र वाराणसी, हरदोई, बस्ती, बलिया, सिद्धार्थनगर सहित अन्य जिलों के रहने वाले हैं। विद्यालय से निकले छात्र बहुत देर तक गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर बैठे रहे। शाम तक छात्र विभिन्न ट्रेनों से अपने घर के लिए रवाना हुए।
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बोले छात्र
हमारे विद्यालय में पहले से शिक्षक कम हैं, ऐसे में मिड सेशन में अध्यापकों का तबादला रोकने की मिन्नत करने पर हमें पीटा गया है। विद्यालय में हमें खाने, पानी से लेकर पढ़ने तक की सुविधा नहीं मिल रही है।
अमित यादव, भदौही
दोपहर में अचानक हमसे हॉस्टल खाली करने के लिए कह दिया गया। हम हॉस्टल खाली करके आ गए हैं। यहां से कैसे घर जाना है, कुछ समझ नहीं आ रहा है।
रवि, हरदोई
प्रदर्शन में 50 से अधिक छात्र शामिल थे। डीएम से मिलकर अपनी मांग रखना चाहते थे। बदले में हमें पीटकर भगा दिया गया और हमें उग्र और भड़काऊं छात्र घोषित करके हॉस्टल से भी निकाल दिया गया।
उमेश चंद्रा, सिद्धार्थनगर
अभिभावकों को बुलाए बिना घर भेजा जा रहा है। कल की पिटाई के बाद कई छात्रों की तबीयत भी खराब हो गई है। उसकी परवाह किए बिना हमें सामान समेत बाहर कर दिया गया।
फैजल अंसारी, सिद्धार्थनगर
1500 रुपये में महीने भर भोजन-नाश्ता, ध्यान रखने वाला भी कोई नहीं
- स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज में दृष्टिबाधित बच्चों को रोज झेलनी पड़ती हैं मुसीबतें
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज, लालडिग्गी के छात्रावास में रहने वाले दिव्यांग छात्र अपनी जिंदगी में छाए अंधेरे को दूर करने के लिए तो संघर्ष कर ही रहे हैं, रहने-खाने के लिए भी जूझ रहे हैं। 50 रुपये में दो टाइम भोजन के साथ वह अन्य जरूरी आवश्यकताओं को खुद पूरा करते हैं। छात्रावास में रहने वाले इन बच्चों को अपने से छोटे बच्चों को भी संभालना पड़ता है। स्कूल से खाना बनाने के लिए रसोइया मिली है, लेकिन राशन से लेकर साग-सब्जी तक का इंतजाम उनको ही करना होता है। रुपये कम पड़ते हैं तो आपस में चंदा लगाकर जरूरी सामान मंगाते हैं।
कॉलेज के छात्रावास में कक्षा एक से 12वीं तक के 100 छात्र हैं। 35 कमरों के छात्रावास में प्रत्येक कमरे में तीन छात्र रहते हैं। इन छात्रों को शासन से 2000 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। इसमें से 1500 रुपये खाने के लिए मेस में जमा कर देते हैं। इससे किचन के सामान के साथ सर्फ, साबुन और पेस्ट आदि का इंतजाम वह करते हैं। शेष 500 रुपये में उनकी अन्य जरूरतें पूरी होती हैं। विद्यालय की तरफ से खाना बनाने के लिए चार रसोइयाें की तैनाती की गई है। रसोई गैस सिलिंडर से लगायत राशन-सब्जी, चावल और दाल समेत अन्य सामान छात्रों की तरफ से जमा पैसे से आता है। छात्र बताते हैं कि सामान कम पड़ने पर वे फिर आपस में चंदा लगाते हैं। इसके लिए एक कमेटी भी बनी हुई है।
भइया! प्राइमरी के बच्चों के लिए मांग रहे थे वाशिंग मशीन
छात्रावास में रहने वाले छात्रों को अपना कार्य स्वयं करना होता है। इसके लिए कोई सहायक नहीं है। बड़े छात्र तो अपने कपड़े धो लेते हैं, लेकिन कक्षा एक से पांच में पढ़ने वाले छोटे बच्चे कपड़े नहीं धो पाते। उनकी दिक्कत जानकर बृहस्पतिवार को आंदोलित छात्र प्रशासन से प्राइमरी के बच्चों के लिए वाशिंग मशीन की मांग कर रहे थे। कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों की मार से खौफजदा छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह तीन वाशिंग मशीन की मांग कर रहे थे। इस पर उनको बेरहमी से पिटाई कर खदेड़ दिया गया। वह बहुत आस लेकर डीएम साहब के दरबार गए थे। लेकिन, उनको मिले सिर्फ आंसू...। छात्रों का कहना था कि अधिकारियों से अपनी दिक्कत बताने पर वह लिखित प्रार्थना-पत्र देने को कहने के सिवाय कुछ कार्रवाई नहीं करते हैं। विद्यालय में खेल, कंप्यूटर, संगीत सहित अन्य विषयों के शिक्षक नहीं है। हॉस्टल में बिजली-पानी की समस्या रहती है। पानी की टंकी की कोई साफ-सफाई नहीं है। इसकी शिकायत कई बार वार्डन से कर चुके हैं। ब्रेल की किताबें भी सही नहीं होती हैं।
वर्जन...
छात्रावास में रहने वाले छात्र शासन से मिलने वाली रकम से ही अपने खाने व अन्य जरूरतों को पूरा करते हैं। इसके लिए छात्रों की कमेटी गठित है। अन्य आवश्यकताओं को पूरा कराने का प्रयास किया जाता है।
लक्ष्मी शंकर जायसवाल, प्रधानाचार्य, राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज, लालडिग्गी