UP News: दिल्ली की तरह गोरखपुर में बन सकता है हुनर हाट, बैठक में तलाशी गई संभावनाएं
गोरखपुर जिले के प्रभारी व वित्त मंत्री दो दिवसीय दौरे पर रविवार को गोरखपुर आए हैं। उन्होंने सर्किट हाउस में उद्यमियों के साथ बैठक की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उद्यमियों ने बैंकों के प्रोसेसिंग फीस पर आपत्ति जताई और कहा कि इस मद में सात से आठ लाख रुपये देने पड़ रहे हैं।
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स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली की तरह गोरखपुर में भी हुनर हाट स्थापित हो सकता है। इसकी संभावना प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने रविवार को तलाशी है। इसी सिलसिले में प्रमुख उद्यमियों के साथ बैठक भी की है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए हुनर हाट बनाया जा सकता है। इसका विस्तृत खाका तैयार कराया जा रहा है।
गोरखपुर जिले के प्रभारी व वित्त मंत्री दो दिवसीय दौरे पर रविवार को गोरखपुर आए हैं। उन्होंने सर्किट हाउस में उद्यमियों के साथ बैठक की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उद्यमियों ने बैंकों के प्रोसेसिंग फीस पर आपत्ति जताई और कहा कि इस मद में सात से आठ लाख रुपये देने पड़ रहे हैं।
उद्यमियों के मुताबिक, इस मसले पर मंत्री ने नाराजगी जताई और बैंक अधिकारियों को तलब करके सवाल किया। साथ ही कहा कि शुल्क वसूली गलत है। पूरी रिपोर्ट बनाकर दी जाए। मंत्री ने समस्या के समाधान का आश्वास भी दिया है। इस बीच उद्यमियों ने जिले के पांच विभागों के कामकाज को लेकर असंतोष जताया।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष दीपक कारीवाल ने कहा कि इंडस्ट्रियल स्टेट जिला उद्योग केंद्र के अंतर्गत आता है। इंडस्ट्रियल एरिया यूपीएसआईडीसी के अंतर्गत है तो वहीं विकास नगर एरिया जीडीए के तहत आता है। सहजनवां का औद्योगिक क्षेत्र गीडा है। नए बनने वाले इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को यूपीडा देख रहा है। उद्योग से संबंधित पांच विभाग और सबके नियम अलग-अलग हैं। विभागों में एकरूपता जरूरी है।
कुछ उद्यमियों ने कहा कि गोरखपुर के विद्युत विभाग का कार्यालय मोहद्दीपुर में है, जो औद्योगिक क्षेत्र गीडा से काफी दूर है। अब गीडा स्थित सब स्टेशन से सभी विभागीय कार्य की व्यवस्था कराने की आवश्यकता है। बैठक में उद्योगपति एसके अग्रवाल, सनूप कुमार साहू, भोला जायसवाल, अशोक शाव, अचिंत्य लाहिड़ी, मनोज अग्रवाल, उमेश छापड़िया, रमाशंकर शुक्ला, लक्ष्मी शास्त्री आदि मौजूद रहे।
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज ने दिया ज्ञापन, ये हैं मांगें
- दूसरे प्राधिकरणों से ट्रांसफर होकर गीडा आ रहे अधिकारी कम से कम तीन साल रहें।
- इंडस्ट्रियल स्टेट में हथकरघा विभाग की लगभग 4,000 वर्गमीटर भूमि एवं जर्जर भवन है। यहां फ्लैटेड फैक्ट्री का निर्माण हो।
- गीडा बोर्ड की बैठक में दो उद्यमियों को शामिल किया जाए।
- महायोजना में औद्योगिक भू उपयोग की जमीन को बढ़ाया जाए।
- औद्योगिक मानचित्रों में विकास शुल्क रियायती दर पर हो।