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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Gorakhpur Weather Forecast Update Today 14 February 2024

Gorakhpur Weather: दिन में गरमाहट, रात में ठंड... गड़बड़ा रहा बीपी-शुगर

Wed, 14 Feb 2024 11:58 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 14 Feb 2024 11:58 AM IST
सार

पतंजलि योग पीठ के जिला प्रभारी हरिनारायण दूबे बताते हैं कि शरीर को फिट रखने के लिए हमें वात, कफ व पित्त को नियंत्रित करना होता है। वात पर नियंत्रण के लिए नियमित तौर पर भोर में साढ़े तीन से पांच बजे के बीच उठना और नित्यक्रिया से निबटना जरूरी है।

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Gorakhpur Weather Forecast Update Today 14 February 2024
जिला अस्पताल में दवा लेने व पर्ची कटाने के लिए लगी लाइन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

फरवरी की शुरुआत के साथ ही मौसम का मिजाज भी एकदम से बदल गया है। दिन का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है तो वहीं रात का तापमान लगातार कम-ज्यादा हो रहा है। इससे लोग बीमार पड़ने लगे हैं। सबसे अधिक असर मधुमेह व रक्तचाप के मरीजों पर है।

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फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि मौसम में उतार-चढ़ाव का स्वास्थ्य पर सीधा असर होता है। जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, वे ऐसे बदलाव को आसानी से सहन नहीं कर पाते। इसलिए खुद को मौसम के अनुरूप बनाकर रखना पड़ता है। मौसम में बदलाव के चलते सबसे अधिक मरीज सर्दी, खांसी, बुखार के आ रहे हैं। इसके अलावा मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।
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जनरल फिजिशियन डॉ. आरपी त्रिपाठी बताते हैं कि इन दिनों जो मरीज बढ़े हैं, उनमें से अधिकतर अनियमित दिनचर्या के चलते बीमार हुए हैं। अभी लोग सर्दी के चलते व्यायाम कम कर रहे हैं और खाने में भी परहेज नहीं कर रहे। इसका असर उनके शुगर लेवल पर पड़ रहा है। वहीं दिन गर्म होने के चलते लोग कम गर्म कपड़ों के साथ बाहर निकल रहे हैं, और शाम को ठंड बढ़ने पर वही लोग चपेट में आ रहे हैं। ऐसे लोगों का ब्लड प्रेशर भी बढ़ा रह रहा है।
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योग व प्राणायाम से मिल सकता है आराम
मधुमेह रोग हार्माेंस के अनियंत्रित स्राव के चलते होता है। इंसुलिन को संतुलित रखने के लिए खुद को फिट रखना जरूरी है। इसके लिए अनुलोम-विलोम की क्रिया होती है। लेकिन इसके करने से पहले शरीर के अन्य सभी अंगों को सक्रिय करने के लिए कुछ आसान और भी करने होते हैं। इसके अलावा मस्तिष्क को एकाग्रचित्त व शांत रखने के लिए भी कुछ योगाभ्यास व प्राणायाम आदि कराए जाते हैं। ये सभी क्रियाएं नियमित अभ्यास से आसान हो जाती हैं।

इसी प्रकार उच्च रक्तचाप के लिए भी अनियमित दिनचर्या ही जिम्मेदार है। इन दोनों बीमारियों पर नियंत्रण के लिए योग व प्राणायाम सबसे बेहतर माध्यम है। इसके अलावा अपने भोजन पर भी नियंत्रण करना बहुत जरूरी है। आयुर्वेद ही नहीं ऐलोपैथ के विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आहार का स्वास्थ्य पर सीधा असर होता है।

 

दिनचर्या नियमित रखना सबसे जरूरी
पतंजलि योग पीठ के जिला प्रभारी हरिनारायण दूबे बताते हैं कि शरीर को फिट रखने के लिए हमें वात, कफ व पित्त को नियंत्रित करना होता है। वात पर नियंत्रण के लिए नियमित तौर पर भोर में साढ़े तीन से पांच बजे के बीच उठना और नित्यक्रिया से निबटना जरूरी है। कफ को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक व्यायाम कराया जाता है।

वहीं पित्त को नियंत्रित करने के लिए सुबह साढ़े आठ बजे तक भोजन करना होता है। सायंकाल भी इसी प्रकार से वात, कफ व पित्त को नियंत्रित किया जाता है। आहार व दिनचर्या के बीच संतुलन जरूरी है। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि भोजन के जरिए जितनी उर्जा शरीर को मिल रही है, उतनी खपत भी होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भी शरीर अस्वस्थ हो जाएगा।

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