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गोरखपुर विश्वविद्यालय: निर्माण में गड़बड़ी की जांच पर कुंडली मारकर बैठे हैं जिम्मेदार, जानिए क्या है पूरा मामला
Mon, 04 Oct 2021 03:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Oct 2021 03:40 PM IST
सार
विश्वविद्यालय में रूसा के तहत करीब 18 करोड़ रुपये आए थे। जिसे वर्ष 2018-19 में खर्च किया गया। ज्यादातर रकम सुंदरीकरण पर ही खर्च हुई। इसमें कैंटीन मरम्मत पर पांच लाख रुपये खर्च कर दिए गए। इसकी शिकायत राजभवन में हुई।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय उच्चस्तर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत कराए गए कार्यों की जांच करने वाले जिम्मेदारों ने जांच ठंडे बस्ते में डाल दी है। इससे न तो फिर से मरम्मत हो पा रही है और कार्रवाई भी अटकी पड़ी है। बीते दिनों रूसा की बैठक में कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने नाराजगी जताते हुए जांच समितियों से तत्काल रिपोर्ट मांगी है।
दरअसल, विश्वविद्यालय में रूसा के तहत करीब 18 करोड़ रुपये आए थे। जिसे वर्ष 2018-19 में खर्च किया गया। ज्यादातर रकम सुंदरीकरण पर ही खर्च हुई। इसमें कैंटीन मरम्मत पर पांच लाख रुपये खर्च कर दिए गए। इसकी शिकायत राजभवन में हुई। शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों से साथ कहा कि प्रशासनिक भवन में कभी कैंटीन थी ही नहीं तो मरम्मत कहां हुई। हालांकि मरम्मत के नाम पर एक ढांचा खड़ा कर दिया गया। इसकी भी जांच शुरू कराई गई लेकिन रिपोर्ट का पता नहीं है।
इसके अलावा परिसर में भवनों और प्रशासनिक भवन की मरम्मत में सबसे ज्यादा तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। चार हॉस्टलों में शौचालय की मरम्मत की गई। आठ महीने पहले कुलपति ने हॉस्टल में निरीक्षण के दौरान गड़बड़ी पाई तो जांच बैठा दी। वह जांच रिपोर्ट भी अभी तक नहीं मिली है।
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कुलपति गोविवि प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि रूसा के तहत हुए निर्माण कार्यों की गड़बड़ी की शिकायत पर जांच का आदेश दिया था। अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच समितियों से तत्काल रिपोर्ट देने के लिए निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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दरअसल, विश्वविद्यालय में रूसा के तहत करीब 18 करोड़ रुपये आए थे। जिसे वर्ष 2018-19 में खर्च किया गया। ज्यादातर रकम सुंदरीकरण पर ही खर्च हुई। इसमें कैंटीन मरम्मत पर पांच लाख रुपये खर्च कर दिए गए। इसकी शिकायत राजभवन में हुई। शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों से साथ कहा कि प्रशासनिक भवन में कभी कैंटीन थी ही नहीं तो मरम्मत कहां हुई। हालांकि मरम्मत के नाम पर एक ढांचा खड़ा कर दिया गया। इसकी भी जांच शुरू कराई गई लेकिन रिपोर्ट का पता नहीं है।
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इसके अलावा परिसर में भवनों और प्रशासनिक भवन की मरम्मत में सबसे ज्यादा तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। चार हॉस्टलों में शौचालय की मरम्मत की गई। आठ महीने पहले कुलपति ने हॉस्टल में निरीक्षण के दौरान गड़बड़ी पाई तो जांच बैठा दी। वह जांच रिपोर्ट भी अभी तक नहीं मिली है।
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कुलपति गोविवि प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि रूसा के तहत हुए निर्माण कार्यों की गड़बड़ी की शिकायत पर जांच का आदेश दिया था। अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच समितियों से तत्काल रिपोर्ट देने के लिए निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।