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लघु उद्योग दिवस: गोरखपुर के टेराकोटा से जगमगाती है दिल्ली के दृष्टिबाधित स्कूल की दिवाली

Sun, 30 Aug 2020 09:16 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 30 Aug 2020 09:16 AM IST
सार

  • पिछले करीब तीन दशक से टेराकोटा शिल्पकार गुलाब प्रजापति भेजते हैं मूर्तियां
  • स्कूल के दिव्यांग बच्चे उसका डेकोरेशन और पैकिंग कर लगाते हैं स्टॉल

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Gorakhpur Terracottas special story on Small Industries Day
गोरखपुर टेराकोटा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इस बार भी दिल्ली के दृष्टिबाधित स्कूल के बच्चों की दिवाली गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों से जगमगाएगी। इसके लिए गोरखपुर के औरंगाबाद के टेराकोटा शिल्पकार गुलाब प्रजापति विभिन्न कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। 15 सितंबर तक गुलाब कलाकृतियों को स्कूल के लिए रवाना कर देंगे।

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गोरखपुर का टेराकोटा शिल्प देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुका है। करीब तीन दशक पहले दिल्ली के ‘द ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन’ की सचिव मंजु भरत राम ने गुलाब प्रजापति के टेराकोटा शिल्प को देखकर हरेक दिवाली पर टेराकोटा की कलाकृतियां मंगानी शुरू कर दीं। यह सिलसिला आज भी जारी है। इन कलाकृतियों में स्कूल के दिव्यांग बच्चे मोम भरकर उनका डेकोरशन करते हैं। फिर उनकी प्लास्टिक से काफी अच्छे से पैकेजिंग करते हैं।
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दिवाली के दिन प्रदर्शनी में लगता है स्टॉल
दिवाली के दिन द ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन की ओर से लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित एसोसिएशन के दृष्टिबाधित स्कूल में प्रदर्शनी लगाई जाती है। जिसमें विभिन्न प्रकार के स्टॉल लगाए जाते हैं। इसमें दृष्टिबाधित स्कूल की ओर से टेराकोटा उत्पादों का स्टॉल लगाया जाता है। गुलाब प्रजापति की ओर से भेजे गए टेराकोटा कलाकृतियों की मदद से बच्चों की अच्छी आय हो जाती है।
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टेराकोटा शिल्पकार गुलाब प्रजापति ने बताया कि इस बार भी दो हजार से ज्यादा टेराकोटा उत्पाद का आर्डर द ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन से मिला है। कोरोना संक्रमण फैलने के बाद मार्च में जब पहली बार लॉकडाउन लगा था तो मई में एसोसिएशन की ओर से आर्डर कैंसिल कर दिया गया था। लेकिन अनलॉक के बाद उन्होंने फिर से आर्डर दिया। 15 सितंबर तक सारा माल भेज देना है। करीब तीन दशक से यह सिलसिला चल रहा है। एसोसिएशन की ओर से चैरिटी के रूप में स्टॉल लगाया जाता है। ऐसे में हम भी इसकी कीमत काफी कम रखते हैं।

 

गोरखपुर के टेराकोटा को हासिल है जीआई टैग

गोरखपुर के परंपरागत टेराकोटा शिल्पकारी को जियोग्रैफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग मिल चुका है। वहीं यह उत्तर प्रदेश सरकार की योजना ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ में भी शामिल है। गोरखपुर के टेराकोटा को जीआई टैग दिलवाने में वाराणसी संस्था ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन ने काफी मदद की।

संस्था से जुड़े डॉक्टर रजनीकांत ने बताया कि टेराकोटा की मूर्तियां बनाने का काम गोरखपुर के औरंगाबाद, लंगड़ी गुलहरिया, भरवलिया, अमवां, बुढ्ढाडीह, एकला, बेलवा रायपुर और चरगांवां इलाकों में होता है। ये कलाकार इन मूर्तियों को केवल हाथ से बनाते हैं और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करते हैं। टेराकोटा की मूर्तियां बनाने वाले कलाकार आमतौर पर हाथी, घोड़े, ऊंट और बकरी जैसे जानवरों की ही मूर्तियां बनाते हैं। वहीं अब कुछ कलाकार बुद्ध और गणेश के साथ-साथ कुछ सजावटी सामान भी बनाने लगे हैं।

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