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पुलिस भर्ती परीक्षा: हाथ में पेपर था नहीं, किराए के 'भौकाल' से थे ठगी के चक्कर में; STF ने दिखाई 'सलाखें'
Sun, 25 Aug 2024 11:06 AM IST
रोहित सिंह
रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Sun, 25 Aug 2024 11:06 AM IST
सार
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि महिला सिपाही और दिल्ली के सफेदपोश नेता के बीच पहले फेसबुक और अन्य माध्यमों से संपर्क हुआ। पिंकी के ही मोबाइल के बिजनेस व्हाट्सएप में मेहताब सिंह सीआरपीएफ नाम से एक नंबर दर्ज है। मेहताब से ऑनलाइन (गूगल पेमेंट) के जरिए 40 हजार रुपये लिए जाने की बात चैट में है।
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गिरफ्तार महिला सिपाही और दिल्ली का युवक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सिपाही भर्ती परीक्षा में एसटीएफ की कार्रवाई की जद में आई महिला सिपाही और उसके साथी के पास पुलिस भर्ती के पेपर का कोई प्रमाण नहीं मिला है। एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास पेपर था ही नहीं। वे बस भौकाल और माहौल बनाकर अभ्यर्थियों को यह भरोसा देना चाहते थे कि उनके पास पेपर है और वे उन्हें पास करा देंगे। झूठा भरोसा दिलाकर वे माेटी कमाई के चक्कर में थे, मगर पुलिस प्रशासन के सख्त पहरे से वे बच नहीं सके।
परीक्षा शुरू होने से पहले ही इन ठगों ने जाल बिछाना शुरू कर दिया था। इसमें मुख्य भूमिका दिल्ली वाले तथाकथित नेता की सामने आई है। उसके झांसे में आकर मोटी कमाई का सपना देख बांसगांव थाना क्षेत्र की रहने वाली निलंबित महिला सिपाही ने पांच आवेदकों को परीक्षा के प्रश्नपत्रों के बदले पांच लाख रुपये देने के लिए तैयार कर लिया था।
पहले कमीशन की रकम भी ऑनलाइन मंगवा ली थी। अब एसटीएफ दिल्ली वाले नेता का रिकॉर्ड खंगाल रही है। उसे शक है कि दिल्ली वाले नेता ने भी परीक्षा के लिए युवकों से रुपये लिए होंगे।
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एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि महिला सिपाही और दिल्ली के सफेदपोश नेता के बीच पहले फेसबुक और अन्य माध्यमों से संपर्क हुआ। महिला सिपाही पिंकी के मोबाइल फोन के व्हाट्सएप में प्रताप सिंह भइया के नाम से एक नंबर मिला है। पिंकी के ही मोबाइल के बिजनेस व्हाट्सएप में मेहताब सिंह सीआरपीएफ नाम से एक नंबर दर्ज है। इस नंबर से पिंकी ने चैटिंग की थी।
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परीक्षा शुरू होने से पहले ही इन ठगों ने जाल बिछाना शुरू कर दिया था। इसमें मुख्य भूमिका दिल्ली वाले तथाकथित नेता की सामने आई है। उसके झांसे में आकर मोटी कमाई का सपना देख बांसगांव थाना क्षेत्र की रहने वाली निलंबित महिला सिपाही ने पांच आवेदकों को परीक्षा के प्रश्नपत्रों के बदले पांच लाख रुपये देने के लिए तैयार कर लिया था।
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पहले कमीशन की रकम भी ऑनलाइन मंगवा ली थी। अब एसटीएफ दिल्ली वाले नेता का रिकॉर्ड खंगाल रही है। उसे शक है कि दिल्ली वाले नेता ने भी परीक्षा के लिए युवकों से रुपये लिए होंगे।
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एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि महिला सिपाही और दिल्ली के सफेदपोश नेता के बीच पहले फेसबुक और अन्य माध्यमों से संपर्क हुआ। महिला सिपाही पिंकी के मोबाइल फोन के व्हाट्सएप में प्रताप सिंह भइया के नाम से एक नंबर मिला है। पिंकी के ही मोबाइल के बिजनेस व्हाट्सएप में मेहताब सिंह सीआरपीएफ नाम से एक नंबर दर्ज है। इस नंबर से पिंकी ने चैटिंग की थी।
एसटीएफ
- फोटो : अमर उजाला
इस चैट में मेहताब से ऑनलाइन (गूगल पेमेंट) के जरिए 40 हजार रुपये लिए जाने की बात सामने आई। जांच में सामने आया है कि दिल्ली वाले और बांसगांव की रहने वाली पिंकी ने सिपाही भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्रों के नाम पर कमीशन की रकम से 40-40 हजार रुपये लिए जाने का एक सिंडिकेट तैयार किया था।
इसका फायदा ये होता कि परीक्षा होने से पहले आवेदकों से कम से कम टोकन अमाउंट के रूप में 40 हजार रुपये लेने से अगर 10 आवेदक भी हो गए तो इनके पास एक बार में चार लाख रुपये आ जाते। प्रश्नपत्र नहीं मिलने पर 40 हजार रुपये के लिए आवेदक भी एक या दो बार इनके पास जाता, संपर्क करता, फिर थक-हार कर बैठ जाता।
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि पिंकी ने पहले टेलीग्राम से इन लोगों को संपर्क में लिया। फिर इनके नंबर अपने बिजनेस व्हाट्सएप में जोड़े। इसी के बाद इनसे समय-समय पर चैट करते हुए इन्हें परीक्षा के प्रश्नपत्रों के लिए तैयार किया था। दिल्ली का ठग देवेंद्र सिंह बेहद ही भौकाल में लखनऊ से गोरखपुर आया था। लखनऊ के लिए शिवांश पांडेय के नाम से इनोवा गाड़ी बुक कराई थी। इसपर उप्र सरकार लिखा था और अंदर की तरफ अवैध रूप से हूटर भी लगा था।
चालक से गाड़ी का प्रपत्र मांगने पर उसे भी नहीं दिखा पाया। ऐसे में एसटीएफ ने बांसगांव थाने में गाड़ी को सुपुर्द कर दिया। प्रपत्रों और अवैध तरीके से हूटर और उप्र सरकार लिखे होने के अलावा प्रपत्र नहीं होने पर गाड़ी एमवी एक्ट में सीज कर दी गई।
भाई को भर्ती करवाने के चक्कर में फंस गई महिला सिपाही
एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि पिंकी और दिल्ली वाले देवेंद्र सिंह की फेसबुक से दोस्ती हुई थी। इसके बाद ये बातचीत से विश्वास में आ गए थे। इस दौरान देवेंद्र खुद के रसूख और पहुंच की बात पिंकी से करता था और फोटो-नंबर भी पिंकी के पास भेजता था।
इसका फायदा ये होता कि परीक्षा होने से पहले आवेदकों से कम से कम टोकन अमाउंट के रूप में 40 हजार रुपये लेने से अगर 10 आवेदक भी हो गए तो इनके पास एक बार में चार लाख रुपये आ जाते। प्रश्नपत्र नहीं मिलने पर 40 हजार रुपये के लिए आवेदक भी एक या दो बार इनके पास जाता, संपर्क करता, फिर थक-हार कर बैठ जाता।
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि पिंकी ने पहले टेलीग्राम से इन लोगों को संपर्क में लिया। फिर इनके नंबर अपने बिजनेस व्हाट्सएप में जोड़े। इसी के बाद इनसे समय-समय पर चैट करते हुए इन्हें परीक्षा के प्रश्नपत्रों के लिए तैयार किया था। दिल्ली का ठग देवेंद्र सिंह बेहद ही भौकाल में लखनऊ से गोरखपुर आया था। लखनऊ के लिए शिवांश पांडेय के नाम से इनोवा गाड़ी बुक कराई थी। इसपर उप्र सरकार लिखा था और अंदर की तरफ अवैध रूप से हूटर भी लगा था।
चालक से गाड़ी का प्रपत्र मांगने पर उसे भी नहीं दिखा पाया। ऐसे में एसटीएफ ने बांसगांव थाने में गाड़ी को सुपुर्द कर दिया। प्रपत्रों और अवैध तरीके से हूटर और उप्र सरकार लिखे होने के अलावा प्रपत्र नहीं होने पर गाड़ी एमवी एक्ट में सीज कर दी गई।
भाई को भर्ती करवाने के चक्कर में फंस गई महिला सिपाही
एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि पिंकी और दिल्ली वाले देवेंद्र सिंह की फेसबुक से दोस्ती हुई थी। इसके बाद ये बातचीत से विश्वास में आ गए थे। इस दौरान देवेंद्र खुद के रसूख और पहुंच की बात पिंकी से करता था और फोटो-नंबर भी पिंकी के पास भेजता था।
यूपीपी( सांकेतिक)
- फोटो : फेसबुक पेज
इसी से प्रभावित होकर पिंकी ने देवेंद्र से अपने भाई के लिए सिपाही भर्ती परीक्षा में किसी तरह जुगाड़ लगाने की बात कही। जांच में सामने आया कि देवेंद्र सिंह ने पिंकी से कुछ और भी आवेदकों के इंतजाम करने की बात कही। आधार दिया कि इससे कमाई भी हो जाएगी और उसके भाई का बिना रुपये लगे ही भर्ती करवा देगा।
इस झांसे में आकर पिंकी ने अपने प्रभाव से लोगों से संपर्क बनाया और पांच लोगों को तैयार किया था। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि पिंकी भी जान गई थी कि इस बार प्रवेश परीक्षा में सेंध लगाना मुश्किल होगा तो भी उसने इसी बहाने मोटी रकम कमाने में देवेंद्र का साथ देना शुरू कर दिया।
गूगल से प्रश्नपत्र कर ठगी करने की थी योजना
एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि इस बार सिपाही भर्ती परीक्षा की सख्ती और पुलिस व एजेंसी की सख्ती को देखते हुए आरोपी खुद डरे हुए थे, लेकिन पेपर दिलाने के दावे के साथ लोगों के साथ ठगी की योजना थी। सूत्रों की मानें तो जांच में सामने आया कि इसी वजह से उन्होंने गूगल से 2023 और 2022 के प्रश्नपत्रों को डाउनलोड कर उसमें संशोधन कर उसे 2024 के पुलिस प्रवेश परीक्षा की तरह तैयार किया था।
सूत्रों ने बताया कि शनिवार को पकड़े गए ठग के पास भी ऐसे ही 2023 की परीक्षा का प्रश्नपत्र मिला। इसे ये 2024 की परीक्षा का बताकर आवेदकों के साथ सौदा कर रहा था।
मोबाइल में मिले 2023 प्रवेश परीक्षा के प्रवेश पत्र
एसटीएफ की जांच में पिंकी और दिल्ली के देवेंद्र प्रताप सिंह के मोबाइल फोन में 2023 आरक्षी नागरिक पुलिस पद के पांच आवेदकों का प्रवेश पत्र मिला। ये अभित कुमार सोनकर, पंकज सोनकर, गुरुपाल सिंह, कुमारी सुमन, चंद्रपाल नाम से थे। एसटीएफ इसकी भी जांच कर रही है।
अंदेशा है कि ऐसे ही फर्जी तरीके से कहीं पिछली बार भी तो इन्होंने परीक्षार्थी के साथ ठगी नहीं की। इसके अलावा पांच मार्कशीट भी मोबाइल से मिले हैं। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि इन्हीं पांच मार्कशीट वाले अभ्यर्थियों को ही पिंकी ने झांसे में लिया था। इनमें से एक की तरफ से 40 हजार रुपये भेज भी दिए गए थे।
यूपी एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि 15 से 20 टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुपों पर एसटीएफ की नजर है। इन्हें संचालित करने वाले रडार पर हैं। कुछ जेल भेजे जा चुके हैं, बचे जल्द ही पकड़ में आ जाएंगे। अभ्यर्थी भी इस बात का ध्यान रखें कि किसी के बहकावे में परीक्षा के नाम पर एक रुपये भी न दें।
गोरखपुर के अलावा अन्य जहां-जहां ऐसे मामले सामने आए हैं, सभी पेपर के नाम पर ठगी करने की फिराक में थे। युवा खुद जागरूक बनें। अगर उनसे कोई ऐसे प्रश्नपत्र के नाम पर रुपयों का मांग या नौकरी दिलाने का झांसा देता है तो इसकी शिकायत संबंधित एजेंसियों से कर सकते हैं। उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
इस झांसे में आकर पिंकी ने अपने प्रभाव से लोगों से संपर्क बनाया और पांच लोगों को तैयार किया था। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि पिंकी भी जान गई थी कि इस बार प्रवेश परीक्षा में सेंध लगाना मुश्किल होगा तो भी उसने इसी बहाने मोटी रकम कमाने में देवेंद्र का साथ देना शुरू कर दिया।
गूगल से प्रश्नपत्र कर ठगी करने की थी योजना
एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि इस बार सिपाही भर्ती परीक्षा की सख्ती और पुलिस व एजेंसी की सख्ती को देखते हुए आरोपी खुद डरे हुए थे, लेकिन पेपर दिलाने के दावे के साथ लोगों के साथ ठगी की योजना थी। सूत्रों की मानें तो जांच में सामने आया कि इसी वजह से उन्होंने गूगल से 2023 और 2022 के प्रश्नपत्रों को डाउनलोड कर उसमें संशोधन कर उसे 2024 के पुलिस प्रवेश परीक्षा की तरह तैयार किया था।
सूत्रों ने बताया कि शनिवार को पकड़े गए ठग के पास भी ऐसे ही 2023 की परीक्षा का प्रश्नपत्र मिला। इसे ये 2024 की परीक्षा का बताकर आवेदकों के साथ सौदा कर रहा था।
मोबाइल में मिले 2023 प्रवेश परीक्षा के प्रवेश पत्र
एसटीएफ की जांच में पिंकी और दिल्ली के देवेंद्र प्रताप सिंह के मोबाइल फोन में 2023 आरक्षी नागरिक पुलिस पद के पांच आवेदकों का प्रवेश पत्र मिला। ये अभित कुमार सोनकर, पंकज सोनकर, गुरुपाल सिंह, कुमारी सुमन, चंद्रपाल नाम से थे। एसटीएफ इसकी भी जांच कर रही है।
अंदेशा है कि ऐसे ही फर्जी तरीके से कहीं पिछली बार भी तो इन्होंने परीक्षार्थी के साथ ठगी नहीं की। इसके अलावा पांच मार्कशीट भी मोबाइल से मिले हैं। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि इन्हीं पांच मार्कशीट वाले अभ्यर्थियों को ही पिंकी ने झांसे में लिया था। इनमें से एक की तरफ से 40 हजार रुपये भेज भी दिए गए थे।
यूपी एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि 15 से 20 टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुपों पर एसटीएफ की नजर है। इन्हें संचालित करने वाले रडार पर हैं। कुछ जेल भेजे जा चुके हैं, बचे जल्द ही पकड़ में आ जाएंगे। अभ्यर्थी भी इस बात का ध्यान रखें कि किसी के बहकावे में परीक्षा के नाम पर एक रुपये भी न दें।
गोरखपुर के अलावा अन्य जहां-जहां ऐसे मामले सामने आए हैं, सभी पेपर के नाम पर ठगी करने की फिराक में थे। युवा खुद जागरूक बनें। अगर उनसे कोई ऐसे प्रश्नपत्र के नाम पर रुपयों का मांग या नौकरी दिलाने का झांसा देता है तो इसकी शिकायत संबंधित एजेंसियों से कर सकते हैं। उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।