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Exclusive: आंख की पुतली स्कैन कर पता चल जाएगा एनीमिया है या नहीं, 99.18 फीसदी सटीकता का दावा; जानें क्या है ये
Wed, 01 Jul 2026 03:24 PM IST
Sharukh Khan
निखिल तिवारी, अमर उजाला, गोरखपुर
निखिल तिवारी, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 01 Jul 2026 03:24 PM IST
सार
अब आंख की पुतली स्कैन कर पता चल जाएगा कि एनीमिया है या नहीं। एमएमएमयूटी के शोधार्थियों ने एआई आधारित मॉडल तैयार किया है। 99.18 फीसदी सटीकता का दावा है। ईरानियन जर्नल ऑफ ब्लड एंड कैंसर में शोध प्रकाशित हुआ है।
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फाइल फोटो
- फोटो : AI
विस्तार
अब एनीमिया (खून की कमी) की जांच के लिए खून का नमूना देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के शोधार्थियों ने ऐसा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित मॉडल विकसित किया है जो आंख की पुतली के अंदर दिखाई देने वाले हिस्से की तस्वीर देखकर यह बता सकता है कि व्यक्ति को एनीमिया है या नहीं।
शोधकर्ताओं ने आठ महीने के दौरान 400 मरीजों पर के आंकड़ों पर परीक्षण किए हैं जिसमें इस मॉडल से 99.18 प्रतिशत तक सटीक परिणाम मिले हैं। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है और इसे ईरानियन जर्नल ऑफ ब्लड एंड कैंसर में प्रकाशित किया गया है।
यह शोध कंप्यूटर साइंस विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रोहित तिवारी, डॉ. सुशील कुमार सरोज और एमटेक छात्र अभिषेक राव ने किया है। प्रकाशन के बाद अब टीम इसे पेटेंट कराने की तैयारी में है। इसके बाद इसे आम लोगों तक पहुंचाने और बाजार में उतारने की दिशा में काम किया जाएगा।
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शोधकर्ताओं ने आठ महीने के दौरान 400 मरीजों पर के आंकड़ों पर परीक्षण किए हैं जिसमें इस मॉडल से 99.18 प्रतिशत तक सटीक परिणाम मिले हैं। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है और इसे ईरानियन जर्नल ऑफ ब्लड एंड कैंसर में प्रकाशित किया गया है।
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यह शोध कंप्यूटर साइंस विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रोहित तिवारी, डॉ. सुशील कुमार सरोज और एमटेक छात्र अभिषेक राव ने किया है। प्रकाशन के बाद अब टीम इसे पेटेंट कराने की तैयारी में है। इसके बाद इसे आम लोगों तक पहुंचाने और बाजार में उतारने की दिशा में काम किया जाएगा।
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डॉ. रोहित के अनुसार, एनीमिया दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इसका सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। अभी एनीमिया की पहचान के लिए खून की जांच करानी पड़ती है, जिसमें समय लगता है और कई जगह इसकी सुविधा भी आसानी से उपलब्ध नहीं होती।
ऐसे में आंख की तस्वीर के आधार पर जांच करने वाली यह तकनीक सस्ती, आसान और बिना दर्द वाली साबित हो सकती है। इसके पहले भी कुछ शोधकर्ताओं ने इस विषय पर काम किया है लेकिन पहली बार 99.18 प्रतिशत तक सटीक परिणाम आए हैं।
शुरुआती स्तर पर ही हो सकेगी पहचान
शोध में मरीजों की आंख के अंदर के हिस्से की तस्वीरों का विश्लेषण कर एआई मॉडल को प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद मॉडल ने एनीमिया और सामान्य मरीजों के बीच अंतर करने में 99.18 प्रतिशत तक सटीकता दिखाई। डॉ. रोहित का कहना है कि इस तकनीक से शुरुआती स्तर पर ही बीमारी की पहचान संभव हो सकेगी।
शोध में मरीजों की आंख के अंदर के हिस्से की तस्वीरों का विश्लेषण कर एआई मॉडल को प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद मॉडल ने एनीमिया और सामान्य मरीजों के बीच अंतर करने में 99.18 प्रतिशत तक सटीकता दिखाई। डॉ. रोहित का कहना है कि इस तकनीक से शुरुआती स्तर पर ही बीमारी की पहचान संभव हो सकेगी।
खासकर ग्रामीण और संसाधनों की कमी वाले क्षेत्रों में यह काफी उपयोगी साबित हो सकती है। भविष्य में अधिक मरीजों के आंकड़े और इसे अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों से जोड़ने पर इसकी क्षमता और बेहतर हो सकती है। यदि यह तकनीक व्यावहारिक रूप से लागू होती है तो एनीमिया की जांच पहले की तुलना में अधिक तेज, सरल और कम खर्च में संभव हो सकेगी।
क्या है एनीमिया
एनीमिया ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में खून की कमी या हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। इससे कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सांस फूलना और काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।
एनीमिया ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में खून की कमी या हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। इससे कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सांस फूलना और काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।