{"_id":"5fb8b3d48ebc3e9b9575e8ee","slug":"gorakhpur-railway-station-front-luxury-illegal-construction-in-crisis-due-to-gda-accepted-nazul-land","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Exclusive: संकट में हैं गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने आलीशान निर्माण, प्रशासन चाहे तो चला सकता है बुलडोजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Exclusive: संकट में हैं गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने आलीशान निर्माण, प्रशासन चाहे तो चला सकता है बुलडोजर
Sat, 21 Nov 2020 11:59 AM IST
vivek shukla
संतोष सिंह, गोरखपुर।
संतोष सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 21 Nov 2020 11:59 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर रेलवे स्टेशन।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने बने शानदार होटल, व्यावसायिक कांप्लेक्स, दुकान और मकानों पर गाज गिर सकती है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) प्रशासन ने इस परिधि की भूमि को नजूल की बताते हुए, फ्री होल्ड करने से इनकार कर दिया है। जीडीए के इस रुख से कब्जेदारों में खलबली मची है।
दरअसल, बिना फ्री होल्ड हुए इस भूमि पर मालिकाना हक मिलना मुश्किल है। जब तक भूमि का मालिकाना हक नहीं मिलेगा, तब तक उस पर किया गया निर्माण वैध नहीं होगा। अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन के हालिया रुख के मद्देनजर कब्जेदार सांसत में हैं कि कहीं उनकी बनाई आलीशान इमारतों पर बुलडोजर न चल जाए।
गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने (रोडवेज बस स्टेशन की ओर) करीब 400 से ज्यादा आलीशान मकान, दुकान, होटल और व्यावसायिक कांप्लेक्स बने हैं। लीज होल्ड जमीन पर मालिकाना हक किसी को मिल नहीं सकता, बावजूद इसके इस भूमि पर भव्य निर्माण भी हो गए। अपनी इस कमजोरी को समझते हुए, कब्जेदारों ने भूमि को फ्री होल्ड कराने का आवेदन पत्र जीडीए में जमा किया। यह मामला उपाध्यक्ष अनुज सिंह के सामने आया तो उन्होंने एक कमेटी गठित करके मामले की जांच कराई, फिर भूमि को फ्री होल्ड करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल, बिना फ्री होल्ड हुए इस भूमि पर मालिकाना हक मिलना मुश्किल है। जब तक भूमि का मालिकाना हक नहीं मिलेगा, तब तक उस पर किया गया निर्माण वैध नहीं होगा। अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन के हालिया रुख के मद्देनजर कब्जेदार सांसत में हैं कि कहीं उनकी बनाई आलीशान इमारतों पर बुलडोजर न चल जाए।
विज्ञापन
गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने (रोडवेज बस स्टेशन की ओर) करीब 400 से ज्यादा आलीशान मकान, दुकान, होटल और व्यावसायिक कांप्लेक्स बने हैं। लीज होल्ड जमीन पर मालिकाना हक किसी को मिल नहीं सकता, बावजूद इसके इस भूमि पर भव्य निर्माण भी हो गए। अपनी इस कमजोरी को समझते हुए, कब्जेदारों ने भूमि को फ्री होल्ड कराने का आवेदन पत्र जीडीए में जमा किया। यह मामला उपाध्यक्ष अनुज सिंह के सामने आया तो उन्होंने एक कमेटी गठित करके मामले की जांच कराई, फिर भूमि को फ्री होल्ड करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
कब्जेदारों को 99 साल की लीज पर दी गई थी भूमि
गोरखपुर विकास प्राधिकरण।
- फोटो : अमर उजाला।
जीडीए उपाध्यक्ष ने पहली बार लिखकर दिया कि रेलवे स्टेशन के सामने की भूमि नजूल की है। इसे फ्री होल्ड करने का अधिकार प्राधिकरण के पास नहीं है। नजूल की भूमि राजस्व की होती है। इसे फ्री होल्ड करने का अधिकार सिर्फ जिलाधिकारी के पास है। लिहाजा, फ्री होल्ड कराने का आवेदन पत्र जिलाधिकारी कार्यालय में जमा कराना होगा।
जीडीए उपाध्यक्ष की इस स्वीकारोक्ति से कब्जेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसी को समझ में नहीं आ रहा कि आलीशान अवैध निर्माण को वैध कैसे कराएं? पूरे मामले से जीडीए प्रशासन ने पल्ला झाड़ लिया है। इसलिए कब्जेदारों को नए आवेदन पत्र के साथ प्रशासन के पास जाना पड़ेगा। हाल के दिनों में प्रशासन जिस तरह से ऐसी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की है, इस लिहाज से इस मुद्दे पर प्रशासन का क्या रुख रहता है, यह देखने लायक होगा।
जीडीए प्रशासन के मुताबिक रेलवे स्टेशन के सामने की भूमि पर कब्जा था। इसे रेलवे सुंदरीकरण योजना के तहत जीडीए, नगर निगम व जिला प्रशासन ने विकसित कराया था। जो कब्जेदार थे, उन्हीं को 99 साल के लीज पर दुकान दी गई थी। लीज होल्ड का काम जीडीए ने 1995-96 में पूरा किया था।
प्राधिकरण ने ही क्षेत्र का विकास (सड़क, नाली, पानी सहित अन्य सुविधा) कराया था। बाद में बड़े लोगों ने दुकानें खरीद लीं और पुराने निर्माण को ढहाकर लीज होल्ड की भूमि पर आलीशान मकान, दुकान, व्यावसायिक कांप्लेक्स व होटल खड़े कर दिए। अब इसी भूमि को फ्री होल्ड कराके मालिकाना हक लेने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे जीडीए प्रशासन ने तगड़ा झटका दिया है।
जीडीए उपाध्यक्ष की इस स्वीकारोक्ति से कब्जेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसी को समझ में नहीं आ रहा कि आलीशान अवैध निर्माण को वैध कैसे कराएं? पूरे मामले से जीडीए प्रशासन ने पल्ला झाड़ लिया है। इसलिए कब्जेदारों को नए आवेदन पत्र के साथ प्रशासन के पास जाना पड़ेगा। हाल के दिनों में प्रशासन जिस तरह से ऐसी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की है, इस लिहाज से इस मुद्दे पर प्रशासन का क्या रुख रहता है, यह देखने लायक होगा।
जीडीए प्रशासन के मुताबिक रेलवे स्टेशन के सामने की भूमि पर कब्जा था। इसे रेलवे सुंदरीकरण योजना के तहत जीडीए, नगर निगम व जिला प्रशासन ने विकसित कराया था। जो कब्जेदार थे, उन्हीं को 99 साल के लीज पर दुकान दी गई थी। लीज होल्ड का काम जीडीए ने 1995-96 में पूरा किया था।
प्राधिकरण ने ही क्षेत्र का विकास (सड़क, नाली, पानी सहित अन्य सुविधा) कराया था। बाद में बड़े लोगों ने दुकानें खरीद लीं और पुराने निर्माण को ढहाकर लीज होल्ड की भूमि पर आलीशान मकान, दुकान, व्यावसायिक कांप्लेक्स व होटल खड़े कर दिए। अब इसी भूमि को फ्री होल्ड कराके मालिकाना हक लेने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे जीडीए प्रशासन ने तगड़ा झटका दिया है।
तब भूमि की कीमत कम थी, अब बेशकीमती
स्टेशन के सामने की भूमि जब लीज पर दी गई थी, तब कीमत बहुत कम थी। अब सिंचाई विभाग के कार्यालय से यातायात तिराहा (बाएं तरफ की) के बीच की भूमि बेशकीमती हो गई है। यदि वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से भूमि को फ्री होल्ड कराने की नौबत आई तो कब्जेदारों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसे लेकर कब्जेदार सहमे हैं।
कब्जेदार चाहते हैं कि पुराने लीज होल्ड के हिसाब से ही जीडीए प्रशासन भूमि को फ्री होल्ड कर दे। भूमि पर 15-20 बड़े होटल बन चुके हैं। हालांकि, जीडीए उपाध्यक्ष ने फ्री होल्ड का आवेदन सिरे से खारिज कर दिया है। जीडीए उपाध्यक्ष ने साफ कहा कि गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने सुंदरीकरण होना था। लिहाजा, सरकारी भूमि के कब्जेदारों को समयानुसार दुकान का लीज होल्ड किया गया था। अब भूमि नजूल की मिली है। इसे किसी भी तरह से जीडीए फ्री होल्ड नहीं कर सकता है।
क्या है लीज होल्ड
सरकारी भूमि को लीज होल्ड पर दिया जाता है। अलग-अलग अवधि की लीज होती है। भूमि की कुल कीमत की 10 फीसदी धनराशि जमा कराके लीज दी जाती है। इस व्यवस्था में भूमि का मालिकाना हक नहीं मिलता है। लीज की अवधि समाप्त होने पर प्राधिकरण या फिर प्रशासन भूमि को कब्जे में ले सकता है। यही व्यवस्था रेलवे स्टेशन के सामने की भूमि पर लागू होगी।
कब्जेदार चाहते हैं कि पुराने लीज होल्ड के हिसाब से ही जीडीए प्रशासन भूमि को फ्री होल्ड कर दे। भूमि पर 15-20 बड़े होटल बन चुके हैं। हालांकि, जीडीए उपाध्यक्ष ने फ्री होल्ड का आवेदन सिरे से खारिज कर दिया है। जीडीए उपाध्यक्ष ने साफ कहा कि गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने सुंदरीकरण होना था। लिहाजा, सरकारी भूमि के कब्जेदारों को समयानुसार दुकान का लीज होल्ड किया गया था। अब भूमि नजूल की मिली है। इसे किसी भी तरह से जीडीए फ्री होल्ड नहीं कर सकता है।
क्या है लीज होल्ड
सरकारी भूमि को लीज होल्ड पर दिया जाता है। अलग-अलग अवधि की लीज होती है। भूमि की कुल कीमत की 10 फीसदी धनराशि जमा कराके लीज दी जाती है। इस व्यवस्था में भूमि का मालिकाना हक नहीं मिलता है। लीज की अवधि समाप्त होने पर प्राधिकरण या फिर प्रशासन भूमि को कब्जे में ले सकता है। यही व्यवस्था रेलवे स्टेशन के सामने की भूमि पर लागू होगी।
क्या है फ्री होल्ड
भूमि का मालिकाना हक मिल जाता है, फिर किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है। जो नक्शा पास हो, उस हिसाब से दुकान, मकान, व्यावसायिक कांप्लेक्स या होटल का निर्माण कराया जा सकता है। इसके लिए भूमि की कुल कीमत की 12 फीसदी धनराशि जमा कराई जाती है, फिर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करके फ्री होल्ड किया जाता है।
उपाध्यक्ष जीडीए अनुज सिंह ने बताया कि रेलवे स्टेशन के सामने की भूमि जीडीए की नहीं है। जो भूमि हमारी नहीं है, उसे फ्री होल्ड कैसे कर सकते हैं। नजूल की भूमि राजस्व की होती है। इसे फ्री होल्ड करने का अधिकार सिर्फ जिलाधिकारी के पास है। इसकी जानकारी सभी आवेदनकर्ताओं को दी जा चुकी है। भूमि के लीज होल्ड का सारा रिकार्ड जीडीए के पास है। जब जरूरत होगी तो प्रशासन को उपलब्ध करा दिया जाएगा।
उपाध्यक्ष जीडीए अनुज सिंह ने बताया कि रेलवे स्टेशन के सामने की भूमि जीडीए की नहीं है। जो भूमि हमारी नहीं है, उसे फ्री होल्ड कैसे कर सकते हैं। नजूल की भूमि राजस्व की होती है। इसे फ्री होल्ड करने का अधिकार सिर्फ जिलाधिकारी के पास है। इसकी जानकारी सभी आवेदनकर्ताओं को दी जा चुकी है। भूमि के लीज होल्ड का सारा रिकार्ड जीडीए के पास है। जब जरूरत होगी तो प्रशासन को उपलब्ध करा दिया जाएगा।