भारत-चीन के बीच झड़प को लेकर शहरवासियों का भड़का गुस्सा, बोले- 'भारत को तोड़नी होगी चीन की आर्थिक कमर'
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लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सैनिकों से झड़प में भारतीय सैनिकों की शहादत ने चीन से चल रहे आर्थिक रिश्ते पर सोचने को मजबूर कर दिया है। लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस के चलते विश्व भर के देशों की आंख की किरकिरी बने चीन को माकूल जवाब देने का यह सही समय आया है। इसके लिए भारत को आत्मनिर्भर योजना को बढ़ावा देकर चीन की आर्थिक कमर तोड़नी होगी।
तानाशाह चीनी नेतृत्व को यह संदेश देने की सख्त जरूरत है कि ताली एक हाथ से नहीं बज सकती। जिन चीनी कंपनियों को दुनिया के अन्य देश दरवाजा दिखा रहे हैं उन्हें भारत में भी पांव रखने की जगह नहीं मिलनी चाहिए। साथ ही भारत को शंघाई सहयोग परिषद जैसे मंचों से भी बाहर निकलने की तैयारी कर लेनी चाहिए। झड़प में देश को हुए सैन्य नुकसान के बाद देशवासियों में आक्रोश है। इस घटना को लेकर समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने अपनी अलग-अलग राय दी।
एनसीसी कैप्टन डॉ. राकेश पांडे ने बताया कि कोविड-19 से उत्पन्न समस्या के पश्चात अंतरराष्ट्रीय फलक पर चीन की थू-थू होने के बाद यह चीन की बौखलाहट है। यह हरकत उसकी एक बानगी है, जिसे किसी भी कीमत पर हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि चीन हमारा ऐसा पड़ोसी नहीं है जो पाकिस्तान की तरह अप्रभावी रहेगा।
यह हमें आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टि से हतोत्साहित करने का कुत्सित प्रयास कर सकता है। हमारी सरकार को किसी भी कीमत पर देशवासियों के साथ साथ अपने जांबाज सैनिकों का मनोबल नहीं गिरने देना चाहिए।
भाजपा नेता प्रेमशंकर मिश्र ने बताया कि भारतीय होने का तात्पर्य है भारतीय संस्कृति, मर्यादा, परंपरा और संप्रभुता के प्रति पूर्ण समर्पण, कोई व्यक्ति, संस्था या राष्ट्र हमारी संप्रभुता पर आघात करे इसे सहन नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान व बंगलादेश की तरह चीन ने भी कई बार यह दु:साहस किया है।
यदि समय रहते इसका समुचित प्रतिकार नही हुआ तो इसकी आड़ में खड़े नेपाल जैसी छोटी शक्तियां भी सिर उठाएंगी। सरकार को पूरी ताकत से ऐसी शक्तियों को कुचलना होगा। देश पहले सब कुछ बाद में... इसे व्यवहारिक स्वरूप देने का समय है।
सर्जन डॉ. मनोज यादव ने बताया कि चीन की रणनीति और उसका रवैया हमेशा से ही अप्रत्याशित रहा है। शक्ति और प्रतिष्ठा की दृष्टि से चीन के लिए हाल के वर्षों में यह सबसे निर्णायक समय है। हालांकि चीन को जवाबी कार्रवाई ही बेहतर विकल्प है मगर कोरोना संक्रमण के खतरों से जूझते समय भारत और चीन जैसे शक्तिशाली देशों के बीच तनाव को कम करने का प्रयास होना चाहिए। हमारे सैनिकों व देशवासियों का मनोबल नहीं गिरने देना चाहिए।
नम आंखों से शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि
अधिवक्ता वीरबहादुर चंद ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका के साथ भारत की नजदीकियां भी चीन के बौखलाहट का बड़ा कारण है। यह कोविड-19 के बाद आर्थिक वर्चस्व बनाए रखने की जंग के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
संभवत: यही चीन की साजिश भी है, क्योंकि चीन के लिए यह अप्रत्याशित नहीं है। वैसे भी हमारा देश किसी भी समस्या के बाद और मजबूत होकर उभरता है, इसके बाद भी यही होगा। हम ना केवल सामरिक रूप से वरन आर्थिक रूप से भी सबल होने का प्रयास करेंगे।
गोला ब्लॉक के जगरनाथपुर गांव स्थित गोपालपुर भाजपा मंडल अध्यक्ष के आवास पर दो मिनट का मौन रखकर गलवां घाटी में हुए हिंसक झड़प में शाहिद कर्नल संतोष सहित 20 जवानों को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी गयी।
मंडल अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा की देश व राष्ट्र की सुरक्षा व एकता तथा अखंडता को कायम रखने के लिए भारतीय सेना के जवान जीरो डिग्री तापमान पर भी चट्टानों की तरह डिगे रहते हैं ताकि हम सब यहां अमन चैन से अपनों के बीच रह सकें। इस त्याग और बलिदान के लिए देश का बच्चा, बूढ़ा व जवान सदैव रीढी रहेगा। इस अवसर पर मुकेश दुबे, डॉ. वीरेंद्र दुबे, प्रभुनाथ तिवारी, जयप्रकाश तिवारी, हरीओम तिवारी, पुनीत दुबे, मंटू तिवारी, प्रदुम्न निषाद, रंजित मौर्य मौजूद थे।