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Gorakhpur News: वहाब मुखबिरी कर दूसरे गैंग को पकड़वाता था ..जुबैर का जाल फैलाता था
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पशु तस्करीः पिपराइच में छात्र दीपक की हत्या का आरोपी है वहाब, जुबैर के साथ मिलकर करता था धंधा
जुबैर के एनकाउंटर के बाद अंडरग्राउंड हो गया वहाब, एसटीएफ तलाश में जुटी
गोरखपुर। पशु तस्करी का विरोध करने पर छात्र दीपक की हत्या के मामले की जांच तेज हो गई है। एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि इस मामले में आरोपी पशु तस्कर वहाब लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर खेल करते आ रहा था। वह पुलिस का मुखबिर बनकर दूसरे गैंग के तस्करों को पकड़वाता था, जबकि खुद जुबैर उर्फ कालिया के साथ मिलकर उसने पूरे इलाके में तस्करी का जाल फैला रखा था।
जुबैर के एनकाउंटर के बाद से वहाब अंडरग्राउंड हो गया है। उसकी तलाश में एसटीएफ लगातार दबिश दे रही है। पुलिस और एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, वहाब सक्रिय तस्करी नेटवर्क का बड़ा हिस्सा है। बाहरी जनपदों से लाए जाने वाले मवेशियों की तस्करी वहाब और जुबैर की साझा भागीदारी में बंटी हुई थी। दोनों की पकड़ इतनी मजबूत थी कि कोई भी उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता था।
बताया जाता है कि वहाब पुलिस को अपने ही प्रतिद्वंद्वी गिरोह की गतिविधियों की सूचना देकर खुद को सुरक्षित रखता था। इस वजह से उसका नाम बार-बार कार्रवाई से बच निकलता रहा। छात्र दीपक की हत्या के बाद जब जुबैर का नाम उभरा और पुलिस-एसटीएफ ने उसकी घेराबंदी शुरू की तो कई पुराने राज खुलने लगे।
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सूत्रों का कहना है कि जुबैर के एनकाउंटर के बाद अब वहाब पर पुलिस का पूरा फोकस है। माना जा रहा है कि वहाब इस पूरे मामले की अहम कड़ी है और छात्र की हत्या की साजिश में उसकी भी भूमिका हो सकती है। एसटीएफ की टीम पिछले एक हफ्ते से वहाब की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। कई बार दबिश के बावजूद वह हाथ नहीं आया है।
वहाब के नेपाल भाग जाने की आशंका
बताया जा रहा है कि वहाब के नेपाल या बिहार की तरफ भाग जाने की आशंका है। पुलिस की टीमें सीमावर्ती जिलों में अलर्ट हैं। पुलिस सूत्रों का दावा है कि दीपक की हत्या में सामने आए किरदारों का सीधा रिश्ता अवैध तस्करी से है। छात्र ने तस्करों की गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उसे रास्ते से हटा दिया गया। इसी साजिश का धागा जुबैर से होते हुए अब वहाब तक जा रहा है।
वहाब ने किसके संरक्षण में तस्करी का धंधा चलाया, हो रही जांच
जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक पुलिस का मुखबिर बनकर वहाब ने किसके संरक्षण में तस्करी का धंधा चलाया। पुलिस के उच्चाधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि मामले की गहन छानबीन की जा रही है और किसी भी सूरत में अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। एसटीएफ का दावा है कि जल्द ही वहाब को पकड़ लिया जाएगा और हत्या व तस्करी की इस कड़ी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया जाएगा।
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जुबैर के एनकाउंटर के बाद अंडरग्राउंड हो गया वहाब, एसटीएफ तलाश में जुटी
गोरखपुर। पशु तस्करी का विरोध करने पर छात्र दीपक की हत्या के मामले की जांच तेज हो गई है। एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि इस मामले में आरोपी पशु तस्कर वहाब लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर खेल करते आ रहा था। वह पुलिस का मुखबिर बनकर दूसरे गैंग के तस्करों को पकड़वाता था, जबकि खुद जुबैर उर्फ कालिया के साथ मिलकर उसने पूरे इलाके में तस्करी का जाल फैला रखा था।
जुबैर के एनकाउंटर के बाद से वहाब अंडरग्राउंड हो गया है। उसकी तलाश में एसटीएफ लगातार दबिश दे रही है। पुलिस और एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, वहाब सक्रिय तस्करी नेटवर्क का बड़ा हिस्सा है। बाहरी जनपदों से लाए जाने वाले मवेशियों की तस्करी वहाब और जुबैर की साझा भागीदारी में बंटी हुई थी। दोनों की पकड़ इतनी मजबूत थी कि कोई भी उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता था।
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बताया जाता है कि वहाब पुलिस को अपने ही प्रतिद्वंद्वी गिरोह की गतिविधियों की सूचना देकर खुद को सुरक्षित रखता था। इस वजह से उसका नाम बार-बार कार्रवाई से बच निकलता रहा। छात्र दीपक की हत्या के बाद जब जुबैर का नाम उभरा और पुलिस-एसटीएफ ने उसकी घेराबंदी शुरू की तो कई पुराने राज खुलने लगे।
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सूत्रों का कहना है कि जुबैर के एनकाउंटर के बाद अब वहाब पर पुलिस का पूरा फोकस है। माना जा रहा है कि वहाब इस पूरे मामले की अहम कड़ी है और छात्र की हत्या की साजिश में उसकी भी भूमिका हो सकती है। एसटीएफ की टीम पिछले एक हफ्ते से वहाब की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। कई बार दबिश के बावजूद वह हाथ नहीं आया है।
वहाब के नेपाल भाग जाने की आशंका
बताया जा रहा है कि वहाब के नेपाल या बिहार की तरफ भाग जाने की आशंका है। पुलिस की टीमें सीमावर्ती जिलों में अलर्ट हैं। पुलिस सूत्रों का दावा है कि दीपक की हत्या में सामने आए किरदारों का सीधा रिश्ता अवैध तस्करी से है। छात्र ने तस्करों की गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उसे रास्ते से हटा दिया गया। इसी साजिश का धागा जुबैर से होते हुए अब वहाब तक जा रहा है।
वहाब ने किसके संरक्षण में तस्करी का धंधा चलाया, हो रही जांच
जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक पुलिस का मुखबिर बनकर वहाब ने किसके संरक्षण में तस्करी का धंधा चलाया। पुलिस के उच्चाधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि मामले की गहन छानबीन की जा रही है और किसी भी सूरत में अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। एसटीएफ का दावा है कि जल्द ही वहाब को पकड़ लिया जाएगा और हत्या व तस्करी की इस कड़ी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया जाएगा।