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Gorakhpur News: रेतवहिया गांव का विदुर देता था तस्करों को सूचनाएं, हिरासत में

Fri, 19 Sep 2025 01:49 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 19 Sep 2025 01:49 AM IST
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Gorakhpur News: Vidur of Retvahiya village used to give information to smugglers, in custody
तीन अन्य संदिग्धों से पूछताछ, कई स्थानीय भी पुलिस के रडार पर
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पिपराइच। दीपक गुप्ता हत्याकांड में पुलिस ने बृहस्पतिवार को नौसड़ दरगहिया से पकड़े गए चार आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की। मोबाइल नंबर से बातचीत की कड़ियां जोड़ जा रही हैं। महुआ चापी गांव के आसपास के चार स्थानीय भी संदेह के घेरे में हैं। इसमें से रेतवहिया गांव के मुन्नू निषाद उर्फ विदुर संलिप्तता पाई गई है। पुलिस ने देर शाम उसे हिरासत में ले लिया है। पूछताछ में पता चला है कि वह पशु तस्करी में स्थानीय स्तर पर सूचनाएं देता था।
सूत्रों के अनुसार, हसनगंज, रेतवहिया, हरि सेवकपुर और दहला टोला के कुछ युवकों की भूमिका संदिग्ध है, जिनमें कुछ पहले जेल जा चुके हैं। एसटीएफ ने भी बंजारा समाज व कुछ घुसपैठियों को हिरासत में लिया है। इस मामले में पुलिस मोबाइल लोकेशन का भी पता लगा रही है। देखा जा रहा है कि पशु तस्करों से इन संदिग्धों की कब-कब बात हुई है। सूत्रों की माने तो कुछ और लोगों को जल्द ही पुलिस हिरासत में ले सकती है। एसपी नार्थ जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जांच जारी है, जल्द पूरी जानकारी सामने आएगी।
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पशु तस्करों के लिए मुफीद जगह पिपराइच
क्षेत्र में फैला जंगल तस्करों की गतिविधियों को बनाता है आसान
पिपराइच। थाना क्षेत्र पशु तस्करों के लिए मुफीद जगह बन गया है। इसकी एक बड़ी वजह क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जिम्मेदारों की नाकामी और स्थानीय मददगारों की भरमार मानी जा रही है। यहां घूमंतु पशु आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन जब कमी होती है तो तस्कर दुधारु पशुओं को भी उठा ले जाते हैं।
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क्षेत्र में फैला बड़ा जंगल पशु तस्करों की गतिविधियों को आसान बनाता है। बताया जाता है कि जंगल के किनारे विशेष लोगों की ओर से बाड़े बनाए गए हैं। जहां चारा डालकर घुमंतू पशुओं को एकत्र किया जाता है। जैसे ही पर्याप्त पशु इकट्ठा हो जाते हैं, तस्करों को सूचना दे दी जाती है। इस गोरखधंधे में स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली और कथित धर्म के ठेकेदारों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पिपराइच से बिहार बॉर्डर की दूरी करीब 60 किलोमीटर है, जो तस्करों के लिए आसान रास्ता साबित होती है। यहां सक्रिय गिरोह पेशेवर हत्यारों की तरह काम करते हैं। उनकी गाड़ियां देखकर ग्रामीण और पुलिस तक डरकर पीछे हट जाते हैं। तस्कर न सिर्फ पथराव करते हैं बल्कि गाड़ी चढ़ाकर कुचलने या गोली चलाने तक से नहीं चूकते। यही वजह है कि लोग मुकाबला करने के बजाय जान बचाकर भागने में ही भलाई समझते हैं।



ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर कई मददगार पुलिस और जनता की गतिविधियों की खबर तस्करों तक पहुंचाते हैं। यही वजह है कि पुलिस की बड़ी कार्रवाई अक्सर नाकाम साबित होती है। अब यह क्षेत्र तस्करों का सुरक्षित अड्डा बन चुका है, जिससे उनकी हिम्मत लगातार बढ़ रही है।

नकारा साबित हो रहे हैं पशु आश्रय स्थल

सरकार की ओर से क्षेत्र में निराश्रित पशुओं के लिए कई पशु आश्रय स्थल बनवाया गया है। लेकिन पिपराइच नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में शाम के समय एक साथ दर्जनों पशु खड़े दिखाई देते हैं। दिन में तो कुछ पशु लोगों पर हमला भी कर देते हैं। कुछ रास्ता रोककर सड़क हादसे को दावत देते हैं। पशु आश्रय स्थल तथा घुमंतू पशुओं को पकड़ने तथा उन्हें आश्रम स्थल में रखने के नाम पर प्रति माह लाखों रुपये खर्च भी हो जाते हैं। ग्रामीणों ने गंभीर मुद्दे की जांच की मांग की है।




तस्करी पर अंकुश लगाने में पीआरवी नाकाम



पिपराइच। थाने क्षेत्र में अपराध रोकने के लिए दो चारपहिया और दो दोपहिया पीआरवी है। संवेदनशील जगहों पर इनकी तैनाती बदलती भी रहती है, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में पशु तस्करी, चोरी, लूट और शराब तस्करी की घटनाएं थम नहीं रही हैं। 26 अगस्त को पिपराइच चीनी मिल परिसर में पशु तस्करों ने सुरक्षा प्रभारी दुर्गेश तिवारी पर हमला किया, जबकि पास ही पीआरवी खड़ी थी। इसी तरह हाल ही में दो दुधारू गायों की चोरी का मामला भी दबा दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि घटनाओं के बावजूद पीआरवी की निष्क्रियता पर जांच जरूरी है।
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