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Gorakhpur News: सदर तहसील में पक्षकार और अधिवक्ताओं का हंगामा
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एकपक्षीय आदेश का आरोप लगाकर किया प्रदर्शन
गोरखपुर। तहसील सदर के नायब तहसीलदार, जंगल कौड़िया के कोर्ट के सामने बृहस्पतिवार को जमीन विवाद के मामले में एक पक्षकार और उनके साथ आए अधिवक्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने एकपक्षीय आदेश का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया। कुछ देर में ही दूसरे पक्ष से आए अधिवक्ता भी पहुंच गए और आदेश को सही होने की बात कहकर नाराजगी जताई।
चौरीचौरा क्षेत्र के पंचदेवरी के राजीव कुमार दुबे और उनके साथ अधिवक्ताओं ने नायब तहसीलदार जंगल कौड़िया के कोर्ट के बार पहुंचकर नारेबाजी शुरू की तो अन्य अधिवक्ता भी समर्थन में पहुंच गए। इस दौरान कर्मचारी कोर्ट के गेट पर ताला जड़कर बाहर चले गए, जबकि अधिकारी मौजूद नहीं थे। राजीव कुमार दुबे ने आरोप लगाया कि उनके पक्ष को सुना बिना नामांतरण आदेश जारी कर दिया गया है।
उनका आरोप है कि महादेव झारखंडी के टुकड़ा नंबर दो में एक एकड़ छह डिसमिल का विवाद 27 साल पुराना है। उनकी मां शशिप्रभा पक्षकार थीं, जिनका निधन 11 जनवरी को हो गया, जबकि उन्होंने 14 जनवरी को उन्होंने मुकदमे में अपना प्रतिस्थापना पत्र दे दिया था, लेकिन उनका पक्ष नहीं सुना गया। इस मामले में अधिवक्ता उपेंद्र धर दुबे ने कहा कि मृतक विरूद्ध आदेश करना विधि संगत नहीं है।
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लगाए गए आरोप निराधार हैं। अगर उन्हें लगता है कि आदेश सही नहीं है तो अपील कर सकते हैं।
-हिमांशु सिंह, नायब तहसीलदार, जंगल कौड़िया
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गोरखपुर। तहसील सदर के नायब तहसीलदार, जंगल कौड़िया के कोर्ट के सामने बृहस्पतिवार को जमीन विवाद के मामले में एक पक्षकार और उनके साथ आए अधिवक्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने एकपक्षीय आदेश का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया। कुछ देर में ही दूसरे पक्ष से आए अधिवक्ता भी पहुंच गए और आदेश को सही होने की बात कहकर नाराजगी जताई।
चौरीचौरा क्षेत्र के पंचदेवरी के राजीव कुमार दुबे और उनके साथ अधिवक्ताओं ने नायब तहसीलदार जंगल कौड़िया के कोर्ट के बार पहुंचकर नारेबाजी शुरू की तो अन्य अधिवक्ता भी समर्थन में पहुंच गए। इस दौरान कर्मचारी कोर्ट के गेट पर ताला जड़कर बाहर चले गए, जबकि अधिकारी मौजूद नहीं थे। राजीव कुमार दुबे ने आरोप लगाया कि उनके पक्ष को सुना बिना नामांतरण आदेश जारी कर दिया गया है।
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उनका आरोप है कि महादेव झारखंडी के टुकड़ा नंबर दो में एक एकड़ छह डिसमिल का विवाद 27 साल पुराना है। उनकी मां शशिप्रभा पक्षकार थीं, जिनका निधन 11 जनवरी को हो गया, जबकि उन्होंने 14 जनवरी को उन्होंने मुकदमे में अपना प्रतिस्थापना पत्र दे दिया था, लेकिन उनका पक्ष नहीं सुना गया। इस मामले में अधिवक्ता उपेंद्र धर दुबे ने कहा कि मृतक विरूद्ध आदेश करना विधि संगत नहीं है।
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लगाए गए आरोप निराधार हैं। अगर उन्हें लगता है कि आदेश सही नहीं है तो अपील कर सकते हैं।
-हिमांशु सिंह, नायब तहसीलदार, जंगल कौड़िया