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Gorakhpur News: तराई के बाघ होते हैं शक्तिशाली...दहाड़ से थर्राता है इलाका
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प्रदेश के सबसे दमदार बाघों में था केसरी, तनाव में हो गई मौत
भैरवी की मौत के बाद बाड़े में कम हो गईं भेड़िया भैरव की गतिविधियां
गोरखपुर। पीलीभीत से गोरखपुर लाए गए बाघ केसरी प्रदेश के सबसे शक्तिशाली बाघों में से एक था। तराई के बाघ काफी शक्तिशाली माने जाते हैं। उसकी एक दहाड़ से इलाके में लोग थर्राते थे। चिड़ियाघर में आने की वजह से वह तनाव में रहने लगा। तनाव अधिक होने पर उसने खुद को चोटिल कर लिया जिससे उसकी मौत हो गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि तराई के बाघ अपनी शारीरिक ताकत, मजबूत बिल्ड और शिकार के तरीके के कारण शक्तिशाली माने जाते हैं। वे बड़े शिकार को आसानी से पकड़ लेते हैं। केसरी ने पीलीभीत में करीब 13 इंसानों पर हमला किया था। इसके बाद उसे रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर लाया गया। यहां चार महीने रेस्क्यू सेंटर में रखने के बाद उसे बाड़े में छोड़ा गया। अधिकांश जीवन जंगल में व्यतीत करने के बाद वह चिड़ियाघर में तनाव में रहने लगा था। बाड़े में भी उसकी गतिविधियां काफी कम थीं जबकि पीलीभीत में यह काफी सक्रिय रहता था।
चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि केसरी प्रदेश के सबसे शक्तिशाली बाघों में से एक था। कद-काठी से वह दूसरे बाघों की तुलना में काफी बड़ा था। तराई के बाघों की बड़ी मांसपेशियां, मजबूत हड्डियां और मजबूत जबड़े होते हैं, जो उन्हें शिकार को पकड़ने के लिए शक्तिशाली बनाते हैं। तराई क्षेत्र में शिकार की प्रचुरता होती है, जिससे बाघों को पर्याप्त भोजन मिलता है और वे शक्तिशाली बनते हैं। यहां की जलवायु और वनस्पति बाघों के लिए उपयुक्त होती है, जिससे वे स्वस्थ रहते हैं। तराई क्षेत्र के वन बाघों के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करते हैं, जिससे वे अपनी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं।
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भेड़िया भैरव की कम हुईं गतिविधियां
मादा भेड़िया भैरवी की मौत के बाद चिड़ियाघर में भेड़िया भैरव की गतिविधियां भी कम हो गई हैं। दोनों में काफी नजदीकियां थीं। वह साथ में ही भोजन करते थे। भैरवी की मौत के बाद भैरव अकेला पड़ गया है। पहले वह बाहर निकलने के लिए काफी उछलकूद करता था लेकिन अब वह भी थोड़ा कम हो गया है। चिड़ियाघर की टीम इसकी निगरानी कर रही है।
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भैरवी की मौत के बाद बाड़े में कम हो गईं भेड़िया भैरव की गतिविधियां
गोरखपुर। पीलीभीत से गोरखपुर लाए गए बाघ केसरी प्रदेश के सबसे शक्तिशाली बाघों में से एक था। तराई के बाघ काफी शक्तिशाली माने जाते हैं। उसकी एक दहाड़ से इलाके में लोग थर्राते थे। चिड़ियाघर में आने की वजह से वह तनाव में रहने लगा। तनाव अधिक होने पर उसने खुद को चोटिल कर लिया जिससे उसकी मौत हो गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि तराई के बाघ अपनी शारीरिक ताकत, मजबूत बिल्ड और शिकार के तरीके के कारण शक्तिशाली माने जाते हैं। वे बड़े शिकार को आसानी से पकड़ लेते हैं। केसरी ने पीलीभीत में करीब 13 इंसानों पर हमला किया था। इसके बाद उसे रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर लाया गया। यहां चार महीने रेस्क्यू सेंटर में रखने के बाद उसे बाड़े में छोड़ा गया। अधिकांश जीवन जंगल में व्यतीत करने के बाद वह चिड़ियाघर में तनाव में रहने लगा था। बाड़े में भी उसकी गतिविधियां काफी कम थीं जबकि पीलीभीत में यह काफी सक्रिय रहता था।
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चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि केसरी प्रदेश के सबसे शक्तिशाली बाघों में से एक था। कद-काठी से वह दूसरे बाघों की तुलना में काफी बड़ा था। तराई के बाघों की बड़ी मांसपेशियां, मजबूत हड्डियां और मजबूत जबड़े होते हैं, जो उन्हें शिकार को पकड़ने के लिए शक्तिशाली बनाते हैं। तराई क्षेत्र में शिकार की प्रचुरता होती है, जिससे बाघों को पर्याप्त भोजन मिलता है और वे शक्तिशाली बनते हैं। यहां की जलवायु और वनस्पति बाघों के लिए उपयुक्त होती है, जिससे वे स्वस्थ रहते हैं। तराई क्षेत्र के वन बाघों के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करते हैं, जिससे वे अपनी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं।
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भेड़िया भैरव की कम हुईं गतिविधियां
मादा भेड़िया भैरवी की मौत के बाद चिड़ियाघर में भेड़िया भैरव की गतिविधियां भी कम हो गई हैं। दोनों में काफी नजदीकियां थीं। वह साथ में ही भोजन करते थे। भैरवी की मौत के बाद भैरव अकेला पड़ गया है। पहले वह बाहर निकलने के लिए काफी उछलकूद करता था लेकिन अब वह भी थोड़ा कम हो गया है। चिड़ियाघर की टीम इसकी निगरानी कर रही है।