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UP: पीलीभीत से गोरखपुर चिड़ियाघर लाए गए बाघ की मौत, कैसे पड़ा था नाम 'केसरी'- 13 लोगों को बना चुका था निवाला

Mon, 31 Mar 2025 01:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 31 Mar 2025 01:17 AM IST
सार

जंगल से आने की वजह से यह क्वारंटीन सेल में काफी बेचैन रहता था। धीरे-धीरे इसका व्यवहार शांत हुआ तो इसे क्रॉल में भी छोड़ा जाने लगा। इसकी ताकत को देखते हुए ही क्राॅल की ग्रिल को मजबूत किया गया था। 20 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे बाड़े में छोड़कर केसरी नाम दिया था।

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In Gorakhpur, Tiger Kesari brought from Pilibhit to Gorakhpur zoo dies
मृत बाघ केसरी( फाइल फोटो) - फोटो : स्रोत: चिड़ियाघर

विस्तार

पीलीभीत से छह माह पहले रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर लाए गए बाघ केसरी की रविवार भोर में चार बजे अचानक मौत हो गई। शनिवार से ही उसके व्यवहार में परिवर्तन आ गया था। वह काफी बेचैन था। शाम को उसका पोस्टमॉर्टम हुआ। मौत की वजह उसके दिमाग में पानी भरना बताई गई। जांच के लिए इसका सैंपल आईवीआरआई बरेली भेजा गया।

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केसरी (बाघ) शनिवार सुबह से ही बेचैन था। वह क्रॉल में काफी उग्र व्यवहार कर रहा था। चिड़ियाघर के चिकित्सकों की टीम उसे दवा देकर शांत करने की कोशिश कर रही थी। शनिवार शाम वह शांत भी हो गया, लेकिन रविवार की भोर में उसने दम तोड़ दिया।
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इसके बाद इंडियन वेटनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) बरेली और लखनऊ चिड़ियाघर से आए पशु चिकित्सकों की टीम ने बाघ का पोस्टमॉर्टम किया। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के मुताबिक उसके दिमाग में पानी भरा था। बाघ पहले से ही काफी तनाव में था। इसकी विस्तृत जांच के लिए सैंपल आईवीआरआई, बरेली भी भेजा गया है।
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पीलीभीत में 13 लोगों को शिकार बनाया था 275 किलो के बाघ ने
बाघ को 27 सितंबर 2024 को पीलीभीत से गोरखपुर लाया गया था। पीलीभीत में उसने करीब 13 इंसानों पर हमला किया था। शुरुआत में इसे शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के अस्पताल में रखा गया। यह चिड़ियाघर का सबसे विशालकाय बाघ था। वजन करीब 275 किलो था।

जंगल से आने की वजह से यह क्वारंटीन सेल में काफी बेचैन रहता था। धीरे-धीरे इसका व्यवहार शांत हुआ तो इसे क्रॉल में भी छोड़ा जाने लगा। इसकी ताकत को देखते हुए ही क्राॅल की ग्रिल को मजबूत किया गया था। 20 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे बाड़े में छोड़कर केसरी नाम दिया था। बाड़े में भी इसे जंगल की याद सता रही थी। शुरुआत में यह बाड़े में कम निकलता था। एक बार निकल जाए तो फिर इसे वापस लाने में काफी परेशानी होती थी।


बाघ केसरी की रविवार भोर में मौत हो गई। शनिवार को वह तनाव में था, जिसके बाद उसे निगरानी में रखा गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके दिमाग में पानी निकला है। विस्तृत जांच के लिए सैंपल बरेली भेजा गया है: डॉ. योगेश प्रताप सिंह, उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चिड़ियाघर

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