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शिक्षक वरिष्ठता विवाद : प्रो. सुधा यादव ने दर्ज कराई आपत्ति
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डीडीयू : विज्ञान संकाय में वरिष्ठता निर्धारण का पत्र सार्वजनिक होने के बाद मचा घमासान
कुलपति और कुलसचिव को पत्र लिखकर की शिकायत, पुरानी सूची का भी किया उल्लेख
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में दो शिक्षकों के वरिष्ठता निर्धारण का मामला गरमा गया है। केमिस्ट्री की प्रो. सुधा यादव ने असंतुष्टि जताते हुए शुक्रवार को अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कुलपति और कुलसचिव को पत्र लिखकर अपने पक्ष में कई तथ्यों को रखा है।
प्रो. सुधा की शिकायत के मुताबिक, कॅरिअर एडवांसेमेंट स्कीम (कैस) के तहत केमिस्ट्री के उपाचार्य पद पर प्रोन्नत होकर अपनी अर्हता तिथि 19 जनवरी 2005 से कार्यरत रही हैं, जबकि अब सीनियर बताए जा रहे दूसरे प्रोफेसर ने उनके बाद कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने दावा किया कि डीडीयू प्रशासन की तरफ से 6 अक्तूबर 2010 को जारी उपाचार्य संवर्ग की वरिष्ठता सूची में उनका वरिष्ठता क्रमांक 14वां था, जबकि दूसरे प्रोफेसर का क्रमांक उनसे काफी पीछे था।
पत्र में यह भी दावा किया है कि जुलाई 2016 में कार्य परिषद की बैठक में एक ही साथ दोनों शिक्षक प्रोफेसर पद पर प्रोन्नत हुए।
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न्याय नहीं मिला तो राजभवन में शिकायत
प्रो. सुधा यादव ने कहा कि उन्होंने कुलपति और कुलसचिव कार्यालय में अपनी आपत्ति दर्ज कराकर न्याय की मांग की है। यदि न्याय नहीं मिला तो वे राजभवन में इस मामले को ले जाएंगी।
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एक और प्रोफेसर ने कसा तंज
डीडीयू के कला संकाय की एक प्रोफेसर ने डीडीयू प्रशासन पर तंज कसा है। वे विभागाध्यक्ष थीं, लेकिन उन्हें अचानक कनिष्ठ बताकर दूसरे प्रोफेसर को रातों-रात चार्ज दिलाया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज भी कसा है। उनके मामले में कोई कमेटी भी नहीं बनाई गई। उन्हें इस आधार पर चुप रहने के लिए कहा गया कि दूसरे प्रोफेसर कुछ समय में रिटायर होने वाले हैं।
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कुलपति और कुलसचिव को पत्र लिखकर की शिकायत, पुरानी सूची का भी किया उल्लेख
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में दो शिक्षकों के वरिष्ठता निर्धारण का मामला गरमा गया है। केमिस्ट्री की प्रो. सुधा यादव ने असंतुष्टि जताते हुए शुक्रवार को अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कुलपति और कुलसचिव को पत्र लिखकर अपने पक्ष में कई तथ्यों को रखा है।
प्रो. सुधा की शिकायत के मुताबिक, कॅरिअर एडवांसेमेंट स्कीम (कैस) के तहत केमिस्ट्री के उपाचार्य पद पर प्रोन्नत होकर अपनी अर्हता तिथि 19 जनवरी 2005 से कार्यरत रही हैं, जबकि अब सीनियर बताए जा रहे दूसरे प्रोफेसर ने उनके बाद कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने दावा किया कि डीडीयू प्रशासन की तरफ से 6 अक्तूबर 2010 को जारी उपाचार्य संवर्ग की वरिष्ठता सूची में उनका वरिष्ठता क्रमांक 14वां था, जबकि दूसरे प्रोफेसर का क्रमांक उनसे काफी पीछे था।
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पत्र में यह भी दावा किया है कि जुलाई 2016 में कार्य परिषद की बैठक में एक ही साथ दोनों शिक्षक प्रोफेसर पद पर प्रोन्नत हुए।
न्याय नहीं मिला तो राजभवन में शिकायत
प्रो. सुधा यादव ने कहा कि उन्होंने कुलपति और कुलसचिव कार्यालय में अपनी आपत्ति दर्ज कराकर न्याय की मांग की है। यदि न्याय नहीं मिला तो वे राजभवन में इस मामले को ले जाएंगी।
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एक और प्रोफेसर ने कसा तंज
डीडीयू के कला संकाय की एक प्रोफेसर ने डीडीयू प्रशासन पर तंज कसा है। वे विभागाध्यक्ष थीं, लेकिन उन्हें अचानक कनिष्ठ बताकर दूसरे प्रोफेसर को रातों-रात चार्ज दिलाया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज भी कसा है। उनके मामले में कोई कमेटी भी नहीं बनाई गई। उन्हें इस आधार पर चुप रहने के लिए कहा गया कि दूसरे प्रोफेसर कुछ समय में रिटायर होने वाले हैं।