शवों की अदला-बदली का मामला: जिंदगीभर शरीर से जूझे दुखी...मौत के बाद परिजन 'सिस्टम' से, कब्र से निकला शव
गुलरिहा इलाके में रहने वाले दुखी यादव (70) दिव्यांगता की वजह से जिंदगीभर अकेले चुनौतियों से लड़ते रहे। उनकी मौत के बाद अब परिजनों की सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग व पुलिस की लापरवाही की वजह से शवों की अदला-बदली का मामला उजागर हुआ तो रविवार को कब्र से दुखी का शव निकालकर पहचान कराने के बाद दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया।
इसके बाद परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों ने शाम को अंतिम संस्कार कर दिया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में दो शवों की अदला-बदली की वजह से सहजनवां के 25 वर्ष का युवक समझकर 70 साल के दुखी के शव का पोस्टमार्टम कराकर राजघाट में दफना कर अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
देवरिया से दुखी के परिजन शनिवार को मोर्चरी में पहुंचे तो उनका शव लापता था। जांच पड़ताल हुई तो शव बदलने की सचाई सामने आई। बता दें कि अज्ञात में मिले शव को पुलिस जमीन में दफन कराती है।
सहजनवां और गुलरिहा पुलिस ने प्रशासन से अनुमति लेने के बाद रविवार दोपहर बाद कब्र खोदकर दुखी यादव का शव बाहर निकलवाया। इसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज लेकर आए। मोर्चरी में सहजनवां के राहुल यादव (25) और दुखी यादव (70) के शव का उनके परिजनों से पहचान कराई गई।
शिनाख्त होने पर पंचनामा भरकर राहुल यादव और दूसरी बार दुखी यादव का पोस्टमार्टम कराया गया। दुखी यादव की मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर बिसरा प्रिजर्व कर लिया गया। जबकि राहुल यादव की ट्रेन से कटकर मरने की पुष्टि हुई। दोनों शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद परिजनों ने भी देर शाम अंतिम संस्कार कर दिया।
राहुल यादव के पिता रामवृक्ष यादव का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि 72 घंटे इंतजार के बाद बेटे का अज्ञात में दाह संस्कार कर दिया गया है। तभी से उसे आखिरी बार नहीं देखने की मलाल थी। रविवार को दोबारा मेडिकल कॉलेज बुलाकर बेटे का शव सौंपा गया। आखिरी बार उसका चेहरा देख लिया, इसका सुकून है।
देवरिया जिले के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के कोरवां निवासी दुखी के भाई महंथ यादव उन्हें यादकर रोने लगे। मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर अपने भाइयों के साथ बैठे महंथ ने बताया कि प्रत्येक माह में तीन चार बार हमलोग मिलने गुलरिहा आते थे।
होली के दिन 14 मार्च को दिन में खाना लेकर आए तो उनकी मौत के बारे में पता चला। शुक्रवार को थाने गए तो वहां शनिवार को पोस्टमार्टम के लिए बुलाया गया। दूसरे दिन जाने पर शव लापता होने की बात सामने आई। यह बहुत बड़ी लापरवाही है। दुखी एक पैर से दिव्यांग थे, इसलिए उन्होंने शादी नहीं की थी। हमलोग के समझाने पर भी वह गांव नहीं आए, यहां अकेले रहते थे।
यह है मामला
सहजनवां में आठ मार्च को एक युवक की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। शव कब्जे में लेकर पुलिस ने पहचान कराने की कोशिश की। शिनाख्त न होने पर शव को बीआरडी मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखवा दिया।72 घंटे पूरे होने के बाद जब शिनाख्त नहीं हुई तब नियमानुसार, सहजनवां पुलिस 12 मार्च को युवक का पोस्टमार्टम कराने पहुंची।
पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों की लापरवाही से 25 वर्षीय युवक की जगह 70 साल के दुखी का पोस्टमार्टम कर शव पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने भी शव बिना देखे राजघाट ले जाकर दफना दिया। 13 मार्च को सहजनवां के मईला गांव से रामवृक्ष यादव पहुंचे।
उन्होंने फोटो के आधार पर ट्रेन से कटने वाले युवक की पहचान अपने बेटे राहुल यादव (25) के रूप में की। तब पुलिस ने उनके बेटे को दफनाए जाने की जानकारी भी दे दी। दुखी के परिजनों के आने पर शव दिखाया गया तो जींस और टी-शर्ट में एक युवक का था। उसे देखकर हैरानी जाहिर करते हुए कहा कि बुजुर्ग लूंगी पहनते थे। इसके बाद सचाई सामने आई। सोमवार को दुखी के भाई महंथ और राहुल यादव के पिता रामवृक्ष को शव सौंप दिया गया।
प्रशासन से अनुमति के बाद शव को निकलवाया गया है। दोबारा उसका पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों का सौंप दिया गया। मोर्चरी में पोस्टमार्टम के समय लापरवाही हुई है। इस वजह से ऐसा हुआ है: अभिनव त्यागी, एसपी सिटी