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Gorakhpur News: रक्षाबंधन के एक दिन पहले पहुंचे भाई के शव से लिपट कर रोईं बहनें, मचा कोहराम
Sat, 09 Aug 2025 01:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 09 Aug 2025 01:38 AM IST
सार
शुक्रवार सुबह एंबुलेंस से जैसे ही उपेंद्र का शव गांव लाया गया, मां दहाड़ मारकर रोने लगी। वहीं, रक्षाबंधन के एक दिन पहले भाई का शव देख दोनों बहनें पूजा और नेहा का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घर के बाहर एकत्रित हुई महिलाएं मां-बेटियों को संभालने में लगी रहीं। घर के बाहर एकत्रित लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि उपेंद्र अब इस दुनिया में नहीं रहा।
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मृतक उपेंद्र की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मप्र के सिहाेर स्थित कुबेरेश्वर धाम में दर्शन के दौरान संदिग्ध हालात में जान गंवाने वाले पिपराइच के मोगलपुरा बड़ा टोला निवासी उपेंद्र (22) का शव शुक्रवार सुबह गांव लाया गया। छोटे बेटे की मौत से मां का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं रक्षाबंधन के एक दिन पहले भाई का शव घर पहुंचते ही बहनें दहाड़ मारकर रोने लगीं। घर के बाहर एकत्रित महिलाओं और बच्चियों की भी आंखें भर आई।
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उपेंद्र गुप्ता बीते सोमवार को अपने जीजा बृजेश गुप्ता, रिश्तेदार विजय गुप्ता और दोस्त विजय यादव के साथ मप्र के सिहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में जल चढ़ाने गया था। बृहस्पतिवार सुबह उसके पेट में दर्द उठा। साथ गए लोग उसे उपचार के लिए पास से अस्पताल ले गए, जहां उसकी मौत हो गई थी।
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इधर, बेटे की मौत की खबर सुनकर मां रंभा बेसुध हो गई। वहीं पिता प्रेमचंद्र गम के सागर में डूब गए। मौके एक दिन पहले ही उपेंद्र ने उज्जैन से एक वीडियो भेजा था, वह सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था।
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शुक्रवार सुबह एंबुलेंस से जैसे ही उपेंद्र का शव गांव लाया गया, मां दहाड़ मारकर रोने लगी। वहीं, रक्षाबंधन के एक दिन पहले भाई का शव देख दोनों बहनें पूजा और नेहा का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घर के बाहर एकत्रित हुई महिलाएं मां-बेटियों को संभालने में लगी रहीं। घर के बाहर एकत्रित लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि उपेंद्र अब इस दुनिया में नहीं रहा।
गांव में पसरा सन्नाटा, कई घरों के नहीं जले चूल्हे
उपेंद्र की मौत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची वहां सन्नाटा छा गया। ग्रामीण उपेंद्र के घर पहुंच गए। लोगों ने जब मौत की वजह जानने का प्रयास किया तो गम के सागर में डूबे पिता प्रेमचंद्र गुप्ता अपने आंसू नहीं रोक पाए। उपेंद्र की मौत से गांव में सन्नाटा पसरा रहा तो कई घरों के चूल्हे तक नहीं जले।