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शारदीय नवरात्र : सजे मां के दरबार, आज से माता के मंदिरों में गूंजेगा जयघोष

Mon, 22 Sep 2025 01:57 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Sep 2025 01:57 AM IST
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Gorakhpur News: Sharadiya Navratri: Mother's court decorated, chants will resonate in Mother's temples from today
नवरात्रि की तैयारी में पूजा के सामानों की खरिदारी करते लोग ।
फूलों से सजाए गए मंदिर, प्रथम दिन के साथ सप्तमी व अष्टमी में होगी ज्यादा भीड़
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गोरखपुर। शारदीय नवरात्र सोमवार यानी आज से शुरू हो रहा है। महानगर में तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। माता के प्रमुख मंदिर गोलघर काली मंदिर, दाउदपुर काली मंदिर, बुढि़या माता, जंगल कौड़िया स्थित दुर्गा मंदिर, रेती चौक का कालीबाड़ी मंदिर, जाफरा बाजार का शीतला माता, चौरी-चौरा के तरकुलहा माता समेत सभी मंदिरों को फूलों सजा दिया गया है। मंदिरों के बाहर नारियल चुनरी की दुकानें सज गईं हैं। रविवार को लोगों ने देर रात तक पूजन सामग्रियों की खरीदारी की।

रविवार को माता के प्रमुख मंदिरों की साफ-सफाई की गई। दाउदपुर काली मंदिर के पुजारी पंडित विजय शंकर पांडेय ने बताया कि मंदिर की सफाई के बाद फूलों से सजाया जा रहा है। यहां सुबह कलश स्थापना किया जाएगा। श्रद्धालु दूर-दूर से आकर माता के दर्शन करेंगे। मंदिर के कपाट सुबह चार बजे से खोल दिया जाएगा। गोलघर काली मंदिर के पुजारी सरवन कुमार सैनी ने बताया कि मंदिर प्रबंधन द्वारा मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की यहां काफी भीड़ होगी। लोग माता को नारियल चुनरी भेंट कर धूप-कपूर जलाकर मनोकामना पूर्ति की कामना करेंगे। मंदिर का कपाट सुबह 4 बजे खुलेगा। इसके साथ ही चौरीचौरा स्थित माता तरकुलहा देवी मंदिर, कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माता मंदिर में कपट ब्रह्म मुहूर्त में तीन बजे खोल दिए जाएंगे।
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- घर,पंडाल व मंदिर में होगी कलश स्थापना
गोरखनाथ मंदिर के संस्कृत विद्यापीठ के आचार्य पं. डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि शारदीय नवरात्र के पहले दिन सोमवार को घर, मंदिर व जगह-जगह बने पंडालों में कलश स्थापना की जाएगी। बताया जा रहा है कि नवरात्र के प्रथम दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग न होने से कलश स्थापना के लिए कोई बाधा नहीं रहेगी। सुबह 06:01 बजे से शाम छह बजे तक कभी भी कलश को स्थापित किया जा सकता है। गोरखनाथ मंदिर के संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य पं. डॉ. प्रांगेश कुमार कुमार मिश्र ने बताया कि पूरे दस दिनों तक माता की आराधना की जाएगी।
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आज मां शैलपुत्री की होगी आराधना
आज मां शैलपुत्री की आराधना होगी। शैलीपुत्री हिमालय की पुत्री हैं। इसी वजह से मां के इस स्वरूप को शैलपुत्री कहा जाता है। इनकी आराधना से हम सभी मनोवांछित फल प्राप्त होता है। मां शैलपुत्री का प्रसन्न करने के लिए ध्यान मंत्र जपना चाहिए। इसके प्रभाव से माता जल्दी ही प्रसन्न होती हैं और भक्त की सभी कामनाएं पूर्ण करती हैं।
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पंडालों में तैयारी पूरी
शहर में जगह-जगह माता के पंडाल लगाए गए हैं। जिसे सजाया जा रहा है। सोमवार को कलश स्थापना की जाएगी। एनई रेलवे दुर्गा पूजा कमेटी के अध्यक्ष राजेश पांडेय ने बताया कि हरिद्वार से गंगा जल आ चुका है। 28 को रेलवे जीएम की ओर से प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। दुर्गाबाड़ी बंगाली समिति के सचिव अभिषेक चटर्जी ने बताया कि सोमवार को पंडाल में प्रतिमा स्थापित रख दी जाएगी।

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नवमी में होगा कन्या पूजन व हवन

शारदीय नवरात्र की नवमी एक अक्तूबर को है। इसको लेकर कन्या पूजन व हवन नवमी में होगा। मां दुर्गा के व्रत करने वाले व्रतियों के लिए आश्विन शुक्ल नवमी तिथि को हवन करना सर्वोत्तम माना गया है। एक अक्तूबर को सुबह 6:06 मिनट के बाद दिन में 2:37 मिनट तक उत्तम रहेगा। मां दुर्गा की प्रसन्नता के लिए नवमी तिथि में हवन सर्वोत्तम माना जाता है। मां दुर्गा के व्रतारंभ और हवन में राहु काल का विचार नहीं किया जाता है।
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