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Gorakhpur News: छठ के तीसरे दिन महिलाओं ने कोशी भरकर मांगी मन्नत

Tue, 28 Oct 2025 02:10 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 Oct 2025 02:10 AM IST
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Gorakhpur News: On the third day of Chhath, women filled the Koshi and made a wish.
छठ पूजा के बाद कोशी भरने की तैयारी करती हुई महिलाएं।
कोशी में महिलाएं सभी प्राकृतिक सामग्री का होता है इस्तेमाल
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गन्ने और मिट्टी के कलश में रखा जाता है ठेकुआ और फल
गोरखपुर। छठ महापर्व के तीसरे दिन पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोमवार की शाम को महिलाओं ने परंपरागत रीति से कोशी भरने की रस्म पूरी की और सूर्य देव व छठी मैया से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी उम्र तथा परिवार की खुशहाली की कामना की।
छठ पर्व के तीसरे दिन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह दिन संध्या अर्घ्य से पहले का होता है। इस दिन व्रती महिलाएं पूजा की तैयारी में जुटी रहती हैं। घर के आंगन, छत या नदी-घाट पर विशेष पूजा स्थल बनाया जाता है, जहां कोशी भरने की रस्म निभाई जाती है। कोशी में उपयोग की जाने वाली सभी वस्तुएं पूर्णत प्राकृतिक होती हैं। मिट्टी, गन्ना, केले के पत्ते, और मिट्टी के कलश से पूजा स्थल सजाया जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह प्राकृतिक वस्तुएं ही देवी छठ की प्रिय मानी जाती हैं। व्रती महिलाएं पांच या सात दीपों से कोशी सजाती हैं, जिन्हें गन्ने के डंडों से बांधकर एक मंडप का आकार दिया जाता है। महिलाओं ने बताया कि गन्ने का मंडप बनकर बीच में कलश में जल, ठेकुआ, फल, और अन्य प्रसाद रखे जाते हैं।
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महिलाओं ने बामचीत
कोशी भरने की रस्म के दौरान पारंपरिक गीत गाया जाता है। व्रती महिलाएं कथा सुनती हैं और घर के सभी सदस्य इस आयोजन में सहभागी बनते हैं। माना जाता है कि कोशी की ज्योति से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और देवी छठ की कृपा से हर मनोकामना पूर्ण होती है।
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- संगीता सिंह
कोशी भरने के समय परिवार के सभी लोग का मौजूद रहना जरूरी होता है। छठ पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति, जल और सूर्य के प्रति आभार प्रकट करने का उत्सव भी है। प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध अटूट है।
- बबीता सिंह
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