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एमएमएमयूटी: विशिष्टता दिखाने पर अब तीन साल से पहले पूरी हो जाएगी पीएचडी
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गोरखपुर। मदनमोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। अब उनको पीएचडी का शोध प्रबंध जमा करने के लिए तीन साल की तय अवधि का इंतजार नहीं करना होगा। यदि वह निर्धारित समय से पहले ही शोध कार्य पूरा कर लेते हैं तो विश्वविद्यालय उनका शोध-प्रबंधन जमा कराकर साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू देगा।
विश्वविद्यालय इसके लिए शोधार्थियों को निर्धारित समय से पहले शोध के लिए तय 72 क्रेडिट प्राप्त करने का अवसर देगा। अतिरिक्त कार्य पर अतिरिक्त क्रेडिट हासिल करने का विकल्प देगा। विश्वविद्यालय ने इसकी न केवल कार्ययोजना बना ली है बल्कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विद्या परिषद की स्वीकृति भी प्राप्त कर ली है। प्रबंध बोर्ड की स्वीकृति मिलते ही यह व्यवस्था विश्वविद्यालय में लागू कर दी जाएगी। इसके पीछे विश्वविद्यालय की मंशा शोध की संख्या व गुणवत्ता बढ़ाने की है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग सुधारने की है। साथ ही साथ शीघ्र व प्रभावी शोध करने के लिए शोधार्थियों का हौसला बढ़ाने की है।
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क्रेडिट मानक पूरा करने को मिलेगा विकल्प
पीएचडी पूरा करने के लिए कम से कम दो शोधपत्रों के प्रकाशन की बाध्यता है। ऐसे में कोई अतिरिक्त लाभ न मिलने के कारण बहुत से शोधार्थी केवल दो प्रकाशन की चिंता करते हैं, जिसका प्रभाव शोध की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। नई व्यवस्था में दो शोधपत्रों के प्रकाशन के बाद हर प्रकाशन पर उन्हें छह क्रेडिट मिलेंगे। यही नहीं पेटेंट के आवेदन व प्रकाशन पर भी छह अतिरिक्त क्रेडिट की व्यवस्था की गई है। ऐसे में शोधपत्रों का अतिरिक्त प्रकाशन कर व पेटेंट के लिए आवेदन कर शोधार्थी अपने शोध का क्रेडिट मानक समय से पहले पूरा कर सकेंगे और शोध प्रबंध को समय से पहले जमा करने का अवसर पा सकेंगे। ऐसा करके वह शोध की नई प्रक्रिया शुरू करने की ओर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। इससे उनका अकादमिक करियर तो जल्द आगे बढ़ेगा ही, विश्वविद्यालय की शोध गुणवत्ता व शोध संख्या भी बढ़ जाएगी।
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वर्जन
विश्वविद्यालय में शोध की संख्या व गुणवत्ता किसी भी अकादमिक संस्थान की सफलता का मानक होती है। ऐसे में हम इसे बढ़ाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। निरंतर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में शोध के लिए निर्धारित क्रेडिट को जल्द पूरा करने का शोधार्थियों को अवसर व विकल्प देने कार्ययोजना बनाई गई है। हर प्रकाशन व पेटेंट पर अतिरिक्त क्रेडिट देने की व्यवस्था की गई है। जल्द इस कार्ययोजना को लागू कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय को इसका लाभ रैंकिंग सुधारने में भी मिलेगा।
प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, एमएमएमयूटी
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विश्वविद्यालय इसके लिए शोधार्थियों को निर्धारित समय से पहले शोध के लिए तय 72 क्रेडिट प्राप्त करने का अवसर देगा। अतिरिक्त कार्य पर अतिरिक्त क्रेडिट हासिल करने का विकल्प देगा। विश्वविद्यालय ने इसकी न केवल कार्ययोजना बना ली है बल्कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विद्या परिषद की स्वीकृति भी प्राप्त कर ली है। प्रबंध बोर्ड की स्वीकृति मिलते ही यह व्यवस्था विश्वविद्यालय में लागू कर दी जाएगी। इसके पीछे विश्वविद्यालय की मंशा शोध की संख्या व गुणवत्ता बढ़ाने की है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग सुधारने की है। साथ ही साथ शीघ्र व प्रभावी शोध करने के लिए शोधार्थियों का हौसला बढ़ाने की है।
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क्रेडिट मानक पूरा करने को मिलेगा विकल्प
पीएचडी पूरा करने के लिए कम से कम दो शोधपत्रों के प्रकाशन की बाध्यता है। ऐसे में कोई अतिरिक्त लाभ न मिलने के कारण बहुत से शोधार्थी केवल दो प्रकाशन की चिंता करते हैं, जिसका प्रभाव शोध की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। नई व्यवस्था में दो शोधपत्रों के प्रकाशन के बाद हर प्रकाशन पर उन्हें छह क्रेडिट मिलेंगे। यही नहीं पेटेंट के आवेदन व प्रकाशन पर भी छह अतिरिक्त क्रेडिट की व्यवस्था की गई है। ऐसे में शोधपत्रों का अतिरिक्त प्रकाशन कर व पेटेंट के लिए आवेदन कर शोधार्थी अपने शोध का क्रेडिट मानक समय से पहले पूरा कर सकेंगे और शोध प्रबंध को समय से पहले जमा करने का अवसर पा सकेंगे। ऐसा करके वह शोध की नई प्रक्रिया शुरू करने की ओर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। इससे उनका अकादमिक करियर तो जल्द आगे बढ़ेगा ही, विश्वविद्यालय की शोध गुणवत्ता व शोध संख्या भी बढ़ जाएगी।
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वर्जन
विश्वविद्यालय में शोध की संख्या व गुणवत्ता किसी भी अकादमिक संस्थान की सफलता का मानक होती है। ऐसे में हम इसे बढ़ाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। निरंतर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में शोध के लिए निर्धारित क्रेडिट को जल्द पूरा करने का शोधार्थियों को अवसर व विकल्प देने कार्ययोजना बनाई गई है। हर प्रकाशन व पेटेंट पर अतिरिक्त क्रेडिट देने की व्यवस्था की गई है। जल्द इस कार्ययोजना को लागू कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय को इसका लाभ रैंकिंग सुधारने में भी मिलेगा।
प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, एमएमएमयूटी