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Gorakhpur News: पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनें आज रखेंगी निर्जल व्रत
Fri, 10 Oct 2025 02:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 10 Oct 2025 02:27 AM IST
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रात 7:58 बजे होगा चंद्रोदय, पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का करेंगी पारायण
गोरखपुर। पति की दीर्घायु के लिए शुक्रवार को सुहागिनें करवा चौथ का व्रत रहेंगी। पूरे दिन निर्जल व्रत रहकर शाम को पूजन-अर्चन करेंगी। रात 7:58 बजे चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर देंगी। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारायण करेंगी।
बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी ने बताया कि पंचांग के अनुसार चंद्रोदय रात में 7 बजकर 58 मिनट पर है। इस दिन सिद्धि एवं छत्र नामक औदायिक योग भी है। चंद्रमा की स्थिति परमोच्च का होने से यह परिवार में शुभता प्रदान करने वाला और दांपत्य जीवन में मधुरता का संचार करने वाला होगा।
गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र ने बताया कि इस दिन केवल चंद्र देवता की पूजा नहीं होती है, बल्कि शिव-पार्वती और स्वामी कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है।
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जिस प्रकार शैलपुत्री पार्वती ने घोर तपस्या कर भगवान शंकर को प्राप्त कर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था वैसे ही महिलाएं प्रार्थना करती हैं कि उन्हें भी अखंड सौभाग्य प्राप्त हो। गौरी पूजन का कुंवारी कन्याओं और विवाहित स्त्रियों के लिए विशेष महत्व है।
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गोरखपुर। पति की दीर्घायु के लिए शुक्रवार को सुहागिनें करवा चौथ का व्रत रहेंगी। पूरे दिन निर्जल व्रत रहकर शाम को पूजन-अर्चन करेंगी। रात 7:58 बजे चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर देंगी। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारायण करेंगी।
बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी ने बताया कि पंचांग के अनुसार चंद्रोदय रात में 7 बजकर 58 मिनट पर है। इस दिन सिद्धि एवं छत्र नामक औदायिक योग भी है। चंद्रमा की स्थिति परमोच्च का होने से यह परिवार में शुभता प्रदान करने वाला और दांपत्य जीवन में मधुरता का संचार करने वाला होगा।
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गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र ने बताया कि इस दिन केवल चंद्र देवता की पूजा नहीं होती है, बल्कि शिव-पार्वती और स्वामी कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है।
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जिस प्रकार शैलपुत्री पार्वती ने घोर तपस्या कर भगवान शंकर को प्राप्त कर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था वैसे ही महिलाएं प्रार्थना करती हैं कि उन्हें भी अखंड सौभाग्य प्राप्त हो। गौरी पूजन का कुंवारी कन्याओं और विवाहित स्त्रियों के लिए विशेष महत्व है।