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Gorakhpur News: कमलेश ने हासिल किया महावीर जैसा राजनीतिक कद
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गोरखपुर। मानीराम विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने के बाद पिता की विरासत को संभालने वाले कमलेश पासवान ने बांसगांव लोकसभा क्षेत्र को कर्मभूमि बनाया। कमलेश के लिए नई जगह आसान नहीं थी। उनके सामने कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्व राज्यपाल महावीर प्रसाद थे, लेकिन सारे समीकरण ध्वस्त कर कमलेश ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया और जीत हासिल की। अब राज्यमंत्री का ओहदा मिलने से कद्दावर नेता महावीर प्रसाद जैसे राजनीतिक कद हो गया है।
बांसगांव संसदीय सीट का नाम आते ही दिवंगत महावीर प्रसाद का नाम सबकी जुबां पर आ जाता है। दलित नेता के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। बांसगांव में महावीर प्रसाद पहले ऐसे नेता थे जिन्होंने 80, 84 व 89 जीत की हैट्रिक लगाई थी। इसके बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। 2004 में वह एक बार फिर मैदान में कूदे और जीत हासिल की। चार जीत का रिकॉर्ड उनके नाम था, जिसकी बराबरी कमलेश ने कर ली है। साथ ही बांसगांव के इतिहास में पहले नेता बने हैं, जिन्होंने लगातार चार बार जीत हासिल की है। हालांकि, इस चुनाव में वे कांटे की लड़ाई में हारते-हारते बचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल में कमलेश को राज्यमंत्री बनाकर उनका राजनीतिक कद बढ़ा दिया है।
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पिता ओम प्रकाश की हत्या के बाद संभाली सियासी विरासत
कमलेश पासवान ने अपने पिता दिवंगत ओम प्रकाश पासवान की राजनीतिक विरासत को न सिर्फ संभाला बल्कि राष्ट्रीय फलक पर नाम रोशन किया। कमेलश के पिता ओमप्रकाश पासवान सपा के प्रदेश महासचिव रहे और उनकी गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी। गोरखनाथ मंदिर से बेहद करीबी रहे ओमप्रकाश ने मानीराम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक चुने गए। बाद में मंदिर से दूरियां बढ़ी तो सपा में शामिल हो गए। वर्ष 1996 में ओम प्रकाश पासवान ने बांसगांव संसदीय सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू की। चुनावी सभा के दौरान उनकी बम मारकर हत्या कर दी गई। इस दौरान कमलेश पढ़ाई कर रहे थे और उनकी उम्र कम थी। लिहाजा सपा ने कमलेश की मां सुभावती पासवान को टिकट दिया और वह सांसद चुनी गई। उधर, मानीराम से कमलेश के चाचा चंद्रेश पासवान चुनाव लड़े और विधायक बने। वर्ष 2002 में कमलेश मानीराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते और इसके बाद 2009 से 2024 तक लगातार चार बार सांसद चुने गए। अब उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बनाया गया है।
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कमलेश ने सपा से की राजनीति की शुरुआत
मोदी सरकार में राज्य मंत्री बनाए गए कमलेश पासवान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत समाजवादी पार्टी से की। 2002 में मानीराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और विधायक चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया और गोरक्षपीठ का आशीर्वाद हासिल कर लिया। भाजपा ने 2009 में उन्हें बांसगांव लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। कमलेश ने बसपा के सदल प्रसाद को मात दी और सांसद चुने गए। इसके बाद 2014, 2019 और इस बार 2024 में भाजपा ने कमलेश पर भरोसा जताया।
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परिवार की प्राेफाइल
47 वर्षीय कमलेश पासवान ने प्रारंभिक शिक्षा शिक्षा सेंटपॉल स्कूल से पूरी करने के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई करने के बाद उन्होंने व्यापार के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाने की शुरुआत की। परिवार में उनकी मां सुभावती पासवान, पत्नी रितु, एक बेटा जय और दो बेटियां रक्षा व तनु हैं।
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मानीराम से कमलेश के परिवार में कब-कौन जाता
1989: ओम प्रकाश पासवान, हिंदू महासभा
1991: ओम प्रकाश, भारतीय जनता पार्टी
1993: ओम प्रकाश, भारतीय जनता पार्टी
1996: चंद्रेश पासवान , समाजवादी पार्टी
2002: कमलेश पासवान , समाजवादी पार्टी
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बांसगांव संसदीय सीट से कब-कौन जीता
1996: सुभावती देवी , समाजवादी पार्टी
2009 : कमलेश पासवान, भाजपा
2014 : कमलेश पासवान, भाजपा
2019 : कमलेश पासवान, भाजपा
2024 : कमलेश पासवान, भाजपा
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बांसगांव संसदीय सीट का नाम आते ही दिवंगत महावीर प्रसाद का नाम सबकी जुबां पर आ जाता है। दलित नेता के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। बांसगांव में महावीर प्रसाद पहले ऐसे नेता थे जिन्होंने 80, 84 व 89 जीत की हैट्रिक लगाई थी। इसके बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। 2004 में वह एक बार फिर मैदान में कूदे और जीत हासिल की। चार जीत का रिकॉर्ड उनके नाम था, जिसकी बराबरी कमलेश ने कर ली है। साथ ही बांसगांव के इतिहास में पहले नेता बने हैं, जिन्होंने लगातार चार बार जीत हासिल की है। हालांकि, इस चुनाव में वे कांटे की लड़ाई में हारते-हारते बचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल में कमलेश को राज्यमंत्री बनाकर उनका राजनीतिक कद बढ़ा दिया है।
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पिता ओम प्रकाश की हत्या के बाद संभाली सियासी विरासत
कमलेश पासवान ने अपने पिता दिवंगत ओम प्रकाश पासवान की राजनीतिक विरासत को न सिर्फ संभाला बल्कि राष्ट्रीय फलक पर नाम रोशन किया। कमेलश के पिता ओमप्रकाश पासवान सपा के प्रदेश महासचिव रहे और उनकी गिनती कद्दावर नेताओं में होती थी। गोरखनाथ मंदिर से बेहद करीबी रहे ओमप्रकाश ने मानीराम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक चुने गए। बाद में मंदिर से दूरियां बढ़ी तो सपा में शामिल हो गए। वर्ष 1996 में ओम प्रकाश पासवान ने बांसगांव संसदीय सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू की। चुनावी सभा के दौरान उनकी बम मारकर हत्या कर दी गई। इस दौरान कमलेश पढ़ाई कर रहे थे और उनकी उम्र कम थी। लिहाजा सपा ने कमलेश की मां सुभावती पासवान को टिकट दिया और वह सांसद चुनी गई। उधर, मानीराम से कमलेश के चाचा चंद्रेश पासवान चुनाव लड़े और विधायक बने। वर्ष 2002 में कमलेश मानीराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते और इसके बाद 2009 से 2024 तक लगातार चार बार सांसद चुने गए। अब उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बनाया गया है।
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कमलेश ने सपा से की राजनीति की शुरुआत
मोदी सरकार में राज्य मंत्री बनाए गए कमलेश पासवान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत समाजवादी पार्टी से की। 2002 में मानीराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और विधायक चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया और गोरक्षपीठ का आशीर्वाद हासिल कर लिया। भाजपा ने 2009 में उन्हें बांसगांव लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। कमलेश ने बसपा के सदल प्रसाद को मात दी और सांसद चुने गए। इसके बाद 2014, 2019 और इस बार 2024 में भाजपा ने कमलेश पर भरोसा जताया।
परिवार की प्राेफाइल
47 वर्षीय कमलेश पासवान ने प्रारंभिक शिक्षा शिक्षा सेंटपॉल स्कूल से पूरी करने के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई करने के बाद उन्होंने व्यापार के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाने की शुरुआत की। परिवार में उनकी मां सुभावती पासवान, पत्नी रितु, एक बेटा जय और दो बेटियां रक्षा व तनु हैं।
मानीराम से कमलेश के परिवार में कब-कौन जाता
1989: ओम प्रकाश पासवान, हिंदू महासभा
1991: ओम प्रकाश, भारतीय जनता पार्टी
1993: ओम प्रकाश, भारतीय जनता पार्टी
1996: चंद्रेश पासवान , समाजवादी पार्टी
2002: कमलेश पासवान , समाजवादी पार्टी
बांसगांव संसदीय सीट से कब-कौन जीता
1996: सुभावती देवी , समाजवादी पार्टी
2009 : कमलेश पासवान, भाजपा
2014 : कमलेश पासवान, भाजपा
2019 : कमलेश पासवान, भाजपा
2024 : कमलेश पासवान, भाजपा