{"_id":"6847335d77e577277f00595a","slug":"gorakhpur-news-ho-kota-the-game-will-be-exposed-through-applications-and-suspicious-mobile-numbers-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-965256-2025-06-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: एचओ कोटाः आवेदनों और संदिग्ध मोबाइल नंबरों से खुलेगा खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: एचओ कोटाः आवेदनों और संदिग्ध मोबाइल नंबरों से खुलेगा खेल
विज्ञापन
गोरखपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस में रेल अफसर का फर्जी पैड लगाकर कराया था टिकट कंफर्म
रेलवे विजिलेंस और आरपीएफ इंटेलिजेंस कर रही अलग-अलग जांच
गोरखपुर। रेल अफसर का फर्जी लेटरपैड का इस्तेमाल कर एचओ कोटा के तहत टिकट कंफर्म कराने के मामले में कुछ संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर लगाए गए हैं। वहीं, रेलवे विजिलेंस और आरपीएफ इंटेलिजेंस की टीमें पिछले दो महीने में आए सारे आवेदनों का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
गोरखपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस में पिछले महीने टिकट कंफर्म कराने के लिए एचओ (हेड ऑफिस) कोटा के तहत एक रेल अफसर का लेटर पैड आया था। कोटा आवंटन में जिसकी ड्यूटी थी, वे उस अफसर को जानते थे और उनका हस्ताक्षर भी पहचानते थे। शक होने पर उन्होंने अफसर से बात करवाई तो पता चला कि उन्होंने कोटा के लिए कोई आवेदन नहीं भेजा है।
इसके बाद इसकी जानकारी विजिलेंस को दी गई और टिकट कंफर्म कर ट्रेन में यात्री से पूछताछ कराई गई। यात्री ने किसी दलाल के मार्फत टिकट कंफर्म कराने की बात कही। इस मामले की जांच में पता चला है कि पहले भी इस तरह के लेटर हेड का प्रयोग किया गया है। इसके बाद अब दो महीने का डिटेल खंगाला जा रहा है।
विज्ञापन
इसके अलावा काॅमर्शियल के अलावा इलेक्टि्रकल विभाग के कुछ कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कोटा के लिए आए आवेदन पर यात्री का मोबाइल नंबर सही है या फर्जी। इसके लिए कोटा के तहत जिनके टिकट कंफर्म हुए हैं, उन्हें फोन भी किया जा रहा है। जल्द ही इस मामले में खुलासा हो सकता है।
विज्ञापन
रेलवे विजिलेंस और आरपीएफ इंटेलिजेंस कर रही अलग-अलग जांच
गोरखपुर। रेल अफसर का फर्जी लेटरपैड का इस्तेमाल कर एचओ कोटा के तहत टिकट कंफर्म कराने के मामले में कुछ संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर लगाए गए हैं। वहीं, रेलवे विजिलेंस और आरपीएफ इंटेलिजेंस की टीमें पिछले दो महीने में आए सारे आवेदनों का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
गोरखपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस में पिछले महीने टिकट कंफर्म कराने के लिए एचओ (हेड ऑफिस) कोटा के तहत एक रेल अफसर का लेटर पैड आया था। कोटा आवंटन में जिसकी ड्यूटी थी, वे उस अफसर को जानते थे और उनका हस्ताक्षर भी पहचानते थे। शक होने पर उन्होंने अफसर से बात करवाई तो पता चला कि उन्होंने कोटा के लिए कोई आवेदन नहीं भेजा है।
विज्ञापन
इसके बाद इसकी जानकारी विजिलेंस को दी गई और टिकट कंफर्म कर ट्रेन में यात्री से पूछताछ कराई गई। यात्री ने किसी दलाल के मार्फत टिकट कंफर्म कराने की बात कही। इस मामले की जांच में पता चला है कि पहले भी इस तरह के लेटर हेड का प्रयोग किया गया है। इसके बाद अब दो महीने का डिटेल खंगाला जा रहा है।
विज्ञापन
इसके अलावा काॅमर्शियल के अलावा इलेक्टि्रकल विभाग के कुछ कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कोटा के लिए आए आवेदन पर यात्री का मोबाइल नंबर सही है या फर्जी। इसके लिए कोटा के तहत जिनके टिकट कंफर्म हुए हैं, उन्हें फोन भी किया जा रहा है। जल्द ही इस मामले में खुलासा हो सकता है।