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Gorakhpur News: पापा...अब मेरी मम्मी और हमारा ख्याल कौन रखेगा
Wed, 28 Oct 2026 03:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 28 Oct 2026 03:07 AM IST
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- सऊदी अरब से छठवें दिन गांव पहुंचा कमलेश का शव, बेटियों के विलाप से नम हुईं आंखें
- बेटे की अर्थी को कंधा देते समय छलका पिता का दर्द, अंतिम दर्शन के लिए उमड़े ग्रामीण
बांसगांव। सऊदी अरब से कमलेश पांडेय का शव छठवें दिन मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे पैतृक गांव किशुनपुर बगही पहुंचा तो परिवार की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। शव देखते ही पत्नी बार-बार बेसुध होने लगी। वहीं, दोनों मासूम बेटियां तन्वी और तान्या रोते-बिलखते बार-बार यही कह रही थीं कि अब मेरी मम्मी और हमारा ख्याल कौन रखेगा। परिवार के इस असहनीय दुख को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
बेटे की मौत से टूट चुके बुजुर्ग पिता हरिश्चंद्र पांडेय के लिए यह दुख असहनीय था। बेटे का शव सामने देखकर उनका दर्द छलक पड़ा। भर्राए गले से वह बार-बार यही कह रहे थे कि उम्र के इस पड़ाव पर कमलेश को मुझे श्मशान घाट पहुंचाना था, लेकिन आज उल्टा मुझे ही उसे लेकर जाना पड़ रहा है। जिससे बुढ़ापे में सहारा मिलने की उम्मीद थी, उसी को अंतिम विदाई देने की नौबत आई।
हरिश्चंद्र के शब्दों में बेटे को खोने का दर्द और जीवन के इस पड़ाव पर अकेले पड़ जाने की पीड़ा साफ झलक रही थी। उनकी व्यथा सुनकर वहां मौजूद लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके। कमलेश का अंतिम संस्कार बड़हलगंज स्थित मुक्तिधाम पर मंगलवार को कर दिया गया। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पीछे छूटी पत्नी, दोनों बेटियों और बुजुर्ग पिता की पीड़ा ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है।
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अंतिम दर्शन के लिए उमड़े ग्रामीण
कमलेश का शव गांव पहुंचने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं अंतिम दर्शन के लिए जुट गए। घर पर शोक संवेदना जताने वालों का तांता लगा रहा। हर कोई दुखी परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पत्नी की बदहवासी और बेटियों की पुकार के बीच किसी के पास उन्हें सांत्वना देने के लिए शब्द नहीं थे। शव के साथ उपजिलाधिकारी बांसगांव मलखान सिंह और बांसगांव थाने की पुलिस भी गांव पहुंची। शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने वालों में बांसगांव ब्लॉक प्रमुख शिवाजी सिंह, पूर्व सांसद कमल किशोर और कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव गया प्रसाद सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।
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यह था मामला
कमलेश पिछले पांच वर्षों से सऊदी अरब के दम्माम हवाई अड्डे पर पुशबैक ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे थे। बीते 21 अक्तूबर को हवाई अड्डे पर हूतियों के ड्रोन हमले में कमलेश पांडेय (36) समेत दो लोगों की मौत हो गई थी। भारतीय दूतावास ने बृहस्पतिवार को परिवार को कमलेश की मौत की सूचना दी थी। इसके बाद परिजनों ने सरकार से अनुरोध कर शव घर लाने की अपील की थी।
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- बेटे की अर्थी को कंधा देते समय छलका पिता का दर्द, अंतिम दर्शन के लिए उमड़े ग्रामीण
बांसगांव। सऊदी अरब से कमलेश पांडेय का शव छठवें दिन मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे पैतृक गांव किशुनपुर बगही पहुंचा तो परिवार की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। शव देखते ही पत्नी बार-बार बेसुध होने लगी। वहीं, दोनों मासूम बेटियां तन्वी और तान्या रोते-बिलखते बार-बार यही कह रही थीं कि अब मेरी मम्मी और हमारा ख्याल कौन रखेगा। परिवार के इस असहनीय दुख को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
बेटे की मौत से टूट चुके बुजुर्ग पिता हरिश्चंद्र पांडेय के लिए यह दुख असहनीय था। बेटे का शव सामने देखकर उनका दर्द छलक पड़ा। भर्राए गले से वह बार-बार यही कह रहे थे कि उम्र के इस पड़ाव पर कमलेश को मुझे श्मशान घाट पहुंचाना था, लेकिन आज उल्टा मुझे ही उसे लेकर जाना पड़ रहा है। जिससे बुढ़ापे में सहारा मिलने की उम्मीद थी, उसी को अंतिम विदाई देने की नौबत आई।
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हरिश्चंद्र के शब्दों में बेटे को खोने का दर्द और जीवन के इस पड़ाव पर अकेले पड़ जाने की पीड़ा साफ झलक रही थी। उनकी व्यथा सुनकर वहां मौजूद लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके। कमलेश का अंतिम संस्कार बड़हलगंज स्थित मुक्तिधाम पर मंगलवार को कर दिया गया। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पीछे छूटी पत्नी, दोनों बेटियों और बुजुर्ग पिता की पीड़ा ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है।
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अंतिम दर्शन के लिए उमड़े ग्रामीण
कमलेश का शव गांव पहुंचने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं अंतिम दर्शन के लिए जुट गए। घर पर शोक संवेदना जताने वालों का तांता लगा रहा। हर कोई दुखी परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पत्नी की बदहवासी और बेटियों की पुकार के बीच किसी के पास उन्हें सांत्वना देने के लिए शब्द नहीं थे। शव के साथ उपजिलाधिकारी बांसगांव मलखान सिंह और बांसगांव थाने की पुलिस भी गांव पहुंची। शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने वालों में बांसगांव ब्लॉक प्रमुख शिवाजी सिंह, पूर्व सांसद कमल किशोर और कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव गया प्रसाद सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।
यह था मामला
कमलेश पिछले पांच वर्षों से सऊदी अरब के दम्माम हवाई अड्डे पर पुशबैक ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे थे। बीते 21 अक्तूबर को हवाई अड्डे पर हूतियों के ड्रोन हमले में कमलेश पांडेय (36) समेत दो लोगों की मौत हो गई थी। भारतीय दूतावास ने बृहस्पतिवार को परिवार को कमलेश की मौत की सूचना दी थी। इसके बाद परिजनों ने सरकार से अनुरोध कर शव घर लाने की अपील की थी।