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Gorakhpur News: रकम दोगुनी करने का झांसा देकर 80 लाख की ठगी, एफआईआर दर्ज
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- एप और आईडी बंद बंद होते ही खुला राज, रुपये मांगने पर धमकी
- पुणे में है कंपनी का मेन ब्रांच, कुछ महीने बाद बंद हो गई आईडी
गोरखपुर। निवेश पर रकम दोगुनी करने का झांसा देकर करीब 80 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने पुराने मित्रवत संबंधों का फायदा उठाकर 10 से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाया। भरोसा जीतने के लिए कंपनी के दस्तावेज और बैंक खातों का विवरण दिखाया गया। निवेश के बाद रकम की कथित ग्रोथ देखने के लिए एप डाउनलोड कराया गया, लेकिन कुछ महीने बाद एप और सभी आईडी बंद हो गईं।
रुपये वापस मांगने पर पहले तकनीकी खराबी और एप अपग्रेड होने की बात कही गई। बाद में आरोपियों पर फोन नहीं उठाने और पीड़ितों को जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। मामले में कैंट थाने में छह नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। गौरव कुमार, देवेश वैश्य, पुनीत कुमार पांडेय, विश्वजीत सिंह, रितेश प्रताप, अभिषेक प्रताप शाही, आदित्य विक्रम शाही, मनोज कुमार, धर्मेंद्र गुप्ता, सुनील गुप्ता और संतोष कुमार यादव ने सोमवार को कैंट थाने में तहरीर दी।
पीड़ितों के अनुसार, आरोपियों में जितेंद्र सिंह, मणिशंकर पाल, पुणे निवासी गणेश गोडसे, महराजगंज निवासी राजकुमार, सर्वेश सिंह और नरेंद्र सिंह शामिल हैं। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपियों ने जून में फिबिट इनफोटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में निवेश की जानकारी दी। बताया गया कि कंपनी की मुख्य शाखा पुणे में है और जीडीए टॉवर में भी कार्यालय है। दावा किया गया कि निवेश की रकम कम समय में दोगुनी हो जाएगी।
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आधार-पैन और ब्लैंक चेक लिए
आरोप है कि आईडी और अकाउंट बनाने के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, हस्ताक्षर और ब्लैंक चेक लिए गए। आरोपियों ने बताया कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करती है और निवेश डॉलर में किया जाता है। इसके लिए नकद या यूपीआई से रुपये देने को कहा गया। निवेश की निगरानी के लिए एक एप डाउनलोड कराया गया। इसमें लोगों की आईडी बनाई गई और निवेश की ग्रोथ दिखाई जाती थी। कुछ महीने बाद अचानक एप बंद हो गया और आईडी भी हटा दी गईं।
रुपए मांगने पर धमकी का आरोप
पीड़ितों के मुताबिक, एप बंद होने पर आरोपियों ने तकनीकी खराबी बताकर समय मांगा। कई महीने बाद भी रकम नहीं मिली तो लोगों ने रुपये वापस मांगने शुरू किए। आरोप है कि इसके बाद आरोपी फोन बंद करने लगे और दबाव बनाने पर जान से मारने, झूठे मुकदमे में फंसाने तथा ब्लैंक चेक का गलत इस्तेमाल करने की धमकी दी। पीड़ितों ने दावा किया है कि शहर और आसपास के सैकड़ों लोग भी इस योजना में पैसा लगा चुके हैं। उन्होंने देशभर में हजारों लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने का भी आरोप लगाया है। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि तहरीर के आधार पर छह नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच जारी है।
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- पुणे में है कंपनी का मेन ब्रांच, कुछ महीने बाद बंद हो गई आईडी
गोरखपुर। निवेश पर रकम दोगुनी करने का झांसा देकर करीब 80 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने पुराने मित्रवत संबंधों का फायदा उठाकर 10 से अधिक लोगों को अपने जाल में फंसाया। भरोसा जीतने के लिए कंपनी के दस्तावेज और बैंक खातों का विवरण दिखाया गया। निवेश के बाद रकम की कथित ग्रोथ देखने के लिए एप डाउनलोड कराया गया, लेकिन कुछ महीने बाद एप और सभी आईडी बंद हो गईं।
रुपये वापस मांगने पर पहले तकनीकी खराबी और एप अपग्रेड होने की बात कही गई। बाद में आरोपियों पर फोन नहीं उठाने और पीड़ितों को जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। मामले में कैंट थाने में छह नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। गौरव कुमार, देवेश वैश्य, पुनीत कुमार पांडेय, विश्वजीत सिंह, रितेश प्रताप, अभिषेक प्रताप शाही, आदित्य विक्रम शाही, मनोज कुमार, धर्मेंद्र गुप्ता, सुनील गुप्ता और संतोष कुमार यादव ने सोमवार को कैंट थाने में तहरीर दी।
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पीड़ितों के अनुसार, आरोपियों में जितेंद्र सिंह, मणिशंकर पाल, पुणे निवासी गणेश गोडसे, महराजगंज निवासी राजकुमार, सर्वेश सिंह और नरेंद्र सिंह शामिल हैं। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपियों ने जून में फिबिट इनफोटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में निवेश की जानकारी दी। बताया गया कि कंपनी की मुख्य शाखा पुणे में है और जीडीए टॉवर में भी कार्यालय है। दावा किया गया कि निवेश की रकम कम समय में दोगुनी हो जाएगी।
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आधार-पैन और ब्लैंक चेक लिए
आरोप है कि आईडी और अकाउंट बनाने के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, हस्ताक्षर और ब्लैंक चेक लिए गए। आरोपियों ने बताया कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करती है और निवेश डॉलर में किया जाता है। इसके लिए नकद या यूपीआई से रुपये देने को कहा गया। निवेश की निगरानी के लिए एक एप डाउनलोड कराया गया। इसमें लोगों की आईडी बनाई गई और निवेश की ग्रोथ दिखाई जाती थी। कुछ महीने बाद अचानक एप बंद हो गया और आईडी भी हटा दी गईं।
रुपए मांगने पर धमकी का आरोप
पीड़ितों के मुताबिक, एप बंद होने पर आरोपियों ने तकनीकी खराबी बताकर समय मांगा। कई महीने बाद भी रकम नहीं मिली तो लोगों ने रुपये वापस मांगने शुरू किए। आरोप है कि इसके बाद आरोपी फोन बंद करने लगे और दबाव बनाने पर जान से मारने, झूठे मुकदमे में फंसाने तथा ब्लैंक चेक का गलत इस्तेमाल करने की धमकी दी। पीड़ितों ने दावा किया है कि शहर और आसपास के सैकड़ों लोग भी इस योजना में पैसा लगा चुके हैं। उन्होंने देशभर में हजारों लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने का भी आरोप लगाया है। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि तहरीर के आधार पर छह नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच जारी है।