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Gorakhpur News: मऊ के माफिया रमेश सिंह काका को गोरखपुर जेल प्रशासन ने लेने से किया इंकार
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सोमवार की रात मऊ जेल प्रशासन ने काका को भिजवाया था गोरखपुर जेल
सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जेल प्रशासन ने काका को लौटाया
गोरखपुर। मुख्तार अंसारी के बाद मऊ के दूसरे बड़े माफिया रमेश सिंह काका को गोरखपुर जेल प्रशासन ने लेने से इंकार कर दिया है। 25 हजार के इनामी इस अपराधी पर 67 मामले दर्ज हैं। आठ साल पहले भी यह गोरखपुर जेल में बंद रहा चुका है, तब विवाद के चलते दूसरी जगह शिफ्ट किया गया था। अब जेल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से इस कैदी को लौटा दिया है। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने जालसाजी के मामले में चार साल की सुनाई है। सजा सुनाने के बाद मऊ जेल प्रशासन उसे गोरखपुर लेकर आया था।
मऊ जिले के सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कैथवली गांव निवासी माफिया रमेश सिंह काका को 17 नवंबर 2017 को आजमगढ़ जेल से गोरखपुर लाया गया था। आजमगढ़ में उसने जेल में पूर्व मंत्री अंगद यादव से विवाद कर लिया था। गोरखपुर जेल में भी उसके व्यवहार में परिवर्तन नहीं आया। आजमगढ़ के जेलर दीप सागर सिंह की हत्या का भी यह आरोपी रहा है। इसके अलावा वाराणसी के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी के हत्या का भी आरोप है।
गोरखपुर जेल में दीप सागर के बेटे अनिल सिंह लिपिक पद पर तैनात थे। रमेश ने जेल में गुटबाजी तो कराई ही, जेल स्टाफ पर दबाव बनाने और अनुशासन तोड़ने की घटनाएं भी हुई थीं। जुलाई 2018 में प्रशासनिक आधार पर उसे नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। अब सजा सुनाए जाने के बाद सोमवार रात मऊ जेल प्रशासन गोरखपुर जेल में शिफ्ट कराने ले आया था। जेल सूत्रों ने बताया कि नियमों के अनुसार, प्रशासनिक आधार पर हटाए गए किसी भी बंदी को शासन की पूर्व अनुमति के बिना उसी जेल में दोबारा नहीं रखा जा सकता। जिस दिन सजा सुनाई गई थी, रमेश कोर्ट नहीं पहुंचा था, बाद में वह हाजिर हुआ था। सोमवार की रात उसे गोरखपुर लाया गया था।
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सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जेल प्रशासन ने काका को लौटाया
गोरखपुर। मुख्तार अंसारी के बाद मऊ के दूसरे बड़े माफिया रमेश सिंह काका को गोरखपुर जेल प्रशासन ने लेने से इंकार कर दिया है। 25 हजार के इनामी इस अपराधी पर 67 मामले दर्ज हैं। आठ साल पहले भी यह गोरखपुर जेल में बंद रहा चुका है, तब विवाद के चलते दूसरी जगह शिफ्ट किया गया था। अब जेल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से इस कैदी को लौटा दिया है। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने जालसाजी के मामले में चार साल की सुनाई है। सजा सुनाने के बाद मऊ जेल प्रशासन उसे गोरखपुर लेकर आया था।
मऊ जिले के सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कैथवली गांव निवासी माफिया रमेश सिंह काका को 17 नवंबर 2017 को आजमगढ़ जेल से गोरखपुर लाया गया था। आजमगढ़ में उसने जेल में पूर्व मंत्री अंगद यादव से विवाद कर लिया था। गोरखपुर जेल में भी उसके व्यवहार में परिवर्तन नहीं आया। आजमगढ़ के जेलर दीप सागर सिंह की हत्या का भी यह आरोपी रहा है। इसके अलावा वाराणसी के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी के हत्या का भी आरोप है।
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गोरखपुर जेल में दीप सागर के बेटे अनिल सिंह लिपिक पद पर तैनात थे। रमेश ने जेल में गुटबाजी तो कराई ही, जेल स्टाफ पर दबाव बनाने और अनुशासन तोड़ने की घटनाएं भी हुई थीं। जुलाई 2018 में प्रशासनिक आधार पर उसे नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। अब सजा सुनाए जाने के बाद सोमवार रात मऊ जेल प्रशासन गोरखपुर जेल में शिफ्ट कराने ले आया था। जेल सूत्रों ने बताया कि नियमों के अनुसार, प्रशासनिक आधार पर हटाए गए किसी भी बंदी को शासन की पूर्व अनुमति के बिना उसी जेल में दोबारा नहीं रखा जा सकता। जिस दिन सजा सुनाई गई थी, रमेश कोर्ट नहीं पहुंचा था, बाद में वह हाजिर हुआ था। सोमवार की रात उसे गोरखपुर लाया गया था।
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