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गीताप्रेस ने जनमानस को धर्म व संस्कृति से जोड़कर रखा: राष्ट्रपति
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गोरखपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि लगभग 100 वर्षों से गीताप्रेस ने भारत के जनमानस को धर्म व संस्कृति से जोड़े रखने का कार्य किया है। गीताप्रेस का प्रकाशन संस्कृत व हिंदी के अलावा अनेक भाषाओं में उपलब्ध है। ओड़िया भागवत के नाम से विख्यात अतिबड़ी जगन्नाथ दास द्वारा रचित भागवत महापुराण को ओडिशा के लोग बहुत सम्मान से पढ़ते हैं।
वे महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के लोकार्पण के बाद वहां मौजूद जनसमूह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में कुछ वर्षों से इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत तेज गति से विकास हो रहा है। गोरखपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (गीडा) की गतिविधियों का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है। यहां के टेराकोटा के कलात्मक उत्पाद देश-विदेश में निरंतर लोकप्रिय हो रहे हैं। यहां के निवासियों में ऐसी अनेक उपलब्धियों से नई ऊर्जा व आकांक्षा का संचार हो रहा है।
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चिकित्सा शिक्षा के लिए मील का पत्थर बनेगा आयुष विश्वविद्यालय
राष्ट्रपति ने कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ से जुड़ा यह यह विश्वविद्यालय समृद्ध, प्राचीन परंपराओं का नवनिर्मित व प्रभावशाली आधुनिक केंद्र है। यह उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चिकित्सा शिक्षा व चिकित्सा सेवा के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
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जैसा माहौल हो, वैसा बनिए
राष्ट्रपति ने कहा कि जनता के प्रतिनिधि अथक परिश्रम करते हैं। अथक मतलब होता है बिना थके काम करने वाला। वे निद्राजीत बनते हैं। मतलब नींद पर विजय पाते हैं। जनता की सुविधा के लिए बने चिकित्सा संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों, डॉक्टरों को भी अथक परिश्रम करना है, उन्हें निद्राजीत बनना है। जिस संस्थान में कार्य करिए उसके लिए जैसी जरूरत है, वैसा खुद को ढाल लीजिए। कोई भी कार्य समर्पण भाव से करें।
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नाथ योगियों ने खोजा था भस्म
राष्ट्रपति ने कहा कि इस विश्वविद्यालय का लोकार्पण समारोह आयुष पद्धतियों के पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण उत्सव है। आयुष में समाहित आयुर्वेद, योग व सिद्ध पद्धतियां विश्व समुदाय को भारत की अनमोल सौगात है। नाथ परंपरा के योगियों ने चिकित्सा के लिए खनिजों व धातुओं पर आधारित भस्म की खोज की थी। हठयोग की प्रतिष्ठा करके महायोगी गोरखनाथ ने राष्ट्र का समग्र पुनर्जागरण किया है। योग के क्षेत्र में गुरु गोरक्षनाथ की महानता को समझाने के लिए गोस्वामी तुलसीदास ने कहा था- गोरख जगायो जोग यानी गुरु गोरखनाथ ने योग की परंपरा को फिर से जगाया था।
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आयुष पद्धतियों की लोकप्रियता बढ़ेगी
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अपने-अपने देश में योग पद्धति का प्रचार-प्रसार करने वाले विदेशी नागरिकों को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। आयुष पद्धतियों पर आधारित चिकित्सा की लोकप्रियता बढ़ रही है। यह विश्वविद्यालय आयुष पद्धतियों की लोकप्रियता को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाएगा। इन पद्धतियों की वैज्ञानिक स्वीकार्यता को बढा़ने में भी ऐसे विश्वविद्यालय का निर्णायक योगदान रहेगा। आयुष विश्वविद्यालय परंपरा व आधुनिकता के संगम का नया प्रतिमान स्थापित करेगा और भविष्य में महान संस्थान के रूप में पहचान बनाएगा।
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आदि शंकराचार्य के बाद गुरु गोरखनाथ सबसे प्रभावशाली
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महायोगी गुरु गोरखनाथ की चर्चा करते हुए कहा कि उनके बारे में कहा गया है कि आदि गुरु शंकराचार्य के बाद इतना प्रभावशाली महापुरुष भारत में दोबारा नहीं हुआ। गुरु गोरखनाथ ने इस क्षेत्र को अक्षय आध्यात्मिक ऊर्जा से समृद्ध किया। यह परमहंस योगानंद की जन्मभूमि भी है। आप सभी ऐसे महान स्थानीय परंपरा से जुड़े हैं, जिनका राष्ट्रीय महत्व और मानवता पर प्रभाव है। नाथ पंथ भारत के कोने-कोने और अन्य देशों में भी मानवता के कल्याण में सक्रिय है। 18वीं सदी के संन्यासी विद्रोह से लेकर 1857 के स्वाधीनता संग्राम तक गोरखपुर नाथ पंथ के योगी, जनकल्याण और स्वाधीनता संग्राम का सूत्रधार रहे हैं। इस धरती से बाबू बंधू सिंह व रामप्रसाद बिस्मिल जैसे बलिदानियों की गाथाएं जुड़ी हैं।
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वे महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के लोकार्पण के बाद वहां मौजूद जनसमूह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में कुछ वर्षों से इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत तेज गति से विकास हो रहा है। गोरखपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (गीडा) की गतिविधियों का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है। यहां के टेराकोटा के कलात्मक उत्पाद देश-विदेश में निरंतर लोकप्रिय हो रहे हैं। यहां के निवासियों में ऐसी अनेक उपलब्धियों से नई ऊर्जा व आकांक्षा का संचार हो रहा है।
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चिकित्सा शिक्षा के लिए मील का पत्थर बनेगा आयुष विश्वविद्यालय
राष्ट्रपति ने कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ से जुड़ा यह यह विश्वविद्यालय समृद्ध, प्राचीन परंपराओं का नवनिर्मित व प्रभावशाली आधुनिक केंद्र है। यह उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चिकित्सा शिक्षा व चिकित्सा सेवा के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
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जैसा माहौल हो, वैसा बनिए
राष्ट्रपति ने कहा कि जनता के प्रतिनिधि अथक परिश्रम करते हैं। अथक मतलब होता है बिना थके काम करने वाला। वे निद्राजीत बनते हैं। मतलब नींद पर विजय पाते हैं। जनता की सुविधा के लिए बने चिकित्सा संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों, डॉक्टरों को भी अथक परिश्रम करना है, उन्हें निद्राजीत बनना है। जिस संस्थान में कार्य करिए उसके लिए जैसी जरूरत है, वैसा खुद को ढाल लीजिए। कोई भी कार्य समर्पण भाव से करें।
नाथ योगियों ने खोजा था भस्म
राष्ट्रपति ने कहा कि इस विश्वविद्यालय का लोकार्पण समारोह आयुष पद्धतियों के पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण उत्सव है। आयुष में समाहित आयुर्वेद, योग व सिद्ध पद्धतियां विश्व समुदाय को भारत की अनमोल सौगात है। नाथ परंपरा के योगियों ने चिकित्सा के लिए खनिजों व धातुओं पर आधारित भस्म की खोज की थी। हठयोग की प्रतिष्ठा करके महायोगी गोरखनाथ ने राष्ट्र का समग्र पुनर्जागरण किया है। योग के क्षेत्र में गुरु गोरक्षनाथ की महानता को समझाने के लिए गोस्वामी तुलसीदास ने कहा था- गोरख जगायो जोग यानी गुरु गोरखनाथ ने योग की परंपरा को फिर से जगाया था।
आयुष पद्धतियों की लोकप्रियता बढ़ेगी
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अपने-अपने देश में योग पद्धति का प्रचार-प्रसार करने वाले विदेशी नागरिकों को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। आयुष पद्धतियों पर आधारित चिकित्सा की लोकप्रियता बढ़ रही है। यह विश्वविद्यालय आयुष पद्धतियों की लोकप्रियता को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाएगा। इन पद्धतियों की वैज्ञानिक स्वीकार्यता को बढा़ने में भी ऐसे विश्वविद्यालय का निर्णायक योगदान रहेगा। आयुष विश्वविद्यालय परंपरा व आधुनिकता के संगम का नया प्रतिमान स्थापित करेगा और भविष्य में महान संस्थान के रूप में पहचान बनाएगा।
आदि शंकराचार्य के बाद गुरु गोरखनाथ सबसे प्रभावशाली
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महायोगी गुरु गोरखनाथ की चर्चा करते हुए कहा कि उनके बारे में कहा गया है कि आदि गुरु शंकराचार्य के बाद इतना प्रभावशाली महापुरुष भारत में दोबारा नहीं हुआ। गुरु गोरखनाथ ने इस क्षेत्र को अक्षय आध्यात्मिक ऊर्जा से समृद्ध किया। यह परमहंस योगानंद की जन्मभूमि भी है। आप सभी ऐसे महान स्थानीय परंपरा से जुड़े हैं, जिनका राष्ट्रीय महत्व और मानवता पर प्रभाव है। नाथ पंथ भारत के कोने-कोने और अन्य देशों में भी मानवता के कल्याण में सक्रिय है। 18वीं सदी के संन्यासी विद्रोह से लेकर 1857 के स्वाधीनता संग्राम तक गोरखपुर नाथ पंथ के योगी, जनकल्याण और स्वाधीनता संग्राम का सूत्रधार रहे हैं। इस धरती से बाबू बंधू सिंह व रामप्रसाद बिस्मिल जैसे बलिदानियों की गाथाएं जुड़ी हैं।