{"_id":"68d054c5bd012f4119014e99","slug":"gorakhpur-news-flood-after-uttarasot-now-erosion-has-started-in-malav-too-gorakhpur-news-c-7-hsr1010-1078187-2025-09-22","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर में बाढ़ का संकट: उतरासोत के बाद अब मलांव में भी कटान शुरू, 16 गांवों में लगाई गई 22 नावें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर में बाढ़ का संकट: उतरासोत के बाद अब मलांव में भी कटान शुरू, 16 गांवों में लगाई गई 22 नावें
Mon, 22 Sep 2025 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Sep 2025 01:10 AM IST
सार
बेलीपार थाना क्षेत्र के मलांव गांव के पास रविवार शाम को बेला मलांव बांध के किनारे हनुमान मंदिर के पास राप्ती नदी कटान करने लगी। इसकी जानकारी मिलने पर एसडीओ प्राची पांडेय, एक्सईएन विपिन बिहारी व जेई नवनीत वर्मा आदि मौके पर पहुंचे। वहां बांस, बल्ली, मिट्टी, बंबू, बरेसिंग, गैम्बियान बंबू आदि डलवाकर कटान रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
बहरामपुर प्राथमिक विद्यालय के पास बाढ़ का पानी में कुत्ता को लेकर बाहर आते हुए।
विस्तार
राप्ती नदी का जलस्तर रविवार को बर्डघाट (नौसड़) गेज पर खतरे के निशान से 22 सेमी ऊपर पहुंच गई। नदी का पानी शहर से सटे बहरामपुर और तकियाघाट मोहल्ले के घरों में भरने लगा है। इससे प्रभावित लोग सामान समेत सड़क पर आ गए हैं। वहीं, गाहासाड़-कोलिया तटबंध के किनारे बसे उतरासोत गांव के पास तेजी से कटान कर रही है।
रविवार को कटान का दायरा करीब 100 मीटर बढ़कर लगभग 600 मीटर हो गया है। वहीं देर शाम कौड़ीराम इलाके के मलांव गांव के सामने भी कटान शुरू होने से सिंचाई विभाग के अफसरों की चिंता बढ़ गई है। अभियंता कटान स्थल पर बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। राहत की बात यह है कि नदी का जलस्तर स्थिर हो गया है। वहीं सरयू नदी का जलस्तर कम होने लगा है।
विज्ञापन
रविवार को कटान का दायरा करीब 100 मीटर बढ़कर लगभग 600 मीटर हो गया है। वहीं देर शाम कौड़ीराम इलाके के मलांव गांव के सामने भी कटान शुरू होने से सिंचाई विभाग के अफसरों की चिंता बढ़ गई है। अभियंता कटान स्थल पर बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। राहत की बात यह है कि नदी का जलस्तर स्थिर हो गया है। वहीं सरयू नदी का जलस्तर कम होने लगा है।
विज्ञापन
नेपाल में पहाड़ी से लेकर मैदानी इलाकों में बारिश थमने के बाद भी राप्ती व रोहिन का जलस्तर बढ़ रहा है। रविवार को बर्डघाट में राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 22 सेमी ऊपर पहुंच गया। इससे निचले इलाके में कई स्थानोंं में पानी भर गया।
दूसरी तरफ से रोहिन नदी तिनमुहानी घाट में खतरे के निशान से 94 सेमी ऊपर पहुंच गई है। हालांकि 24 घंटे में नदी का जलस्तर तीन सेमी ही बढ़ा है। वहीं भौराबारी में नदी खतरे के निशान से 48 सेमी ऊपर पहुुंच गई है। इस बीच राहत वाली खबर यह है कि सरयू नदी बरहज में खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर नीचे आ गई है।
रविवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर खतरा बिंदु से 95 सेमी ऊपर था, जबकि सुबह आठ बजे नदी एक मीटर ऊपर थी। वहीं, राप्ती की सहयोगी गोर्रा नदी खतरे के निशान से अब भी 40 सेमी नीचे बह रही है लेकिन उसके बढ़ने का क्रम जारी है।
दूसरी तरफ से रोहिन नदी तिनमुहानी घाट में खतरे के निशान से 94 सेमी ऊपर पहुंच गई है। हालांकि 24 घंटे में नदी का जलस्तर तीन सेमी ही बढ़ा है। वहीं भौराबारी में नदी खतरे के निशान से 48 सेमी ऊपर पहुुंच गई है। इस बीच राहत वाली खबर यह है कि सरयू नदी बरहज में खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर नीचे आ गई है।
रविवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर खतरा बिंदु से 95 सेमी ऊपर था, जबकि सुबह आठ बजे नदी एक मीटर ऊपर थी। वहीं, राप्ती की सहयोगी गोर्रा नदी खतरे के निशान से अब भी 40 सेमी नीचे बह रही है लेकिन उसके बढ़ने का क्रम जारी है।
विज्ञापन
बाढ़ प्रभावित 16 गांवों में लगाई गई हैं 22 नावें
सरयू, राप्ती व रोहिन के बढ़ते जलस्तर के कारण जिले के 16 गांव बाढ़ से काफी प्रभावित हो गए हैं। इनमें से 12 गांव गोला तहसील के हैं जो बड़हलगंज ब्लाॅक में आते हैं। दो गांव कैंपियरंगज तहसील और दो गांव सदर तहसील के हैं। इन गांवों में नागरिकों के आने-जाने के लिए 22 नावों को लगाया गया है।
इन गांवों के नागरिकों के लिए कम्युनिटी किचन के माध्यम से तैयार भोजन के 400 पैकेट वितरित किए गए। पशुओं के लिए भूसा की भी व्यवस्था की जा रही है।
सरयू, राप्ती व रोहिन के बढ़ते जलस्तर के कारण जिले के 16 गांव बाढ़ से काफी प्रभावित हो गए हैं। इनमें से 12 गांव गोला तहसील के हैं जो बड़हलगंज ब्लाॅक में आते हैं। दो गांव कैंपियरंगज तहसील और दो गांव सदर तहसील के हैं। इन गांवों में नागरिकों के आने-जाने के लिए 22 नावों को लगाया गया है।
इन गांवों के नागरिकों के लिए कम्युनिटी किचन के माध्यम से तैयार भोजन के 400 पैकेट वितरित किए गए। पशुओं के लिए भूसा की भी व्यवस्था की जा रही है।
नदी के बढ़ने की रफ्तार धीमी हो गई है। नदी जब नीचे आती है तब कटान तेज करती है। अभी कटान का दायरा उतरासोत गांव के पास बढ़कर 600 मीटर हो गया है। वहां पर लगातार कटान निरोधक कार्य कराए जा रहे हैं। लगभग 200 मजदूरों को लगाया गया है। कहीं कोई चिंता की बात नही है। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है: केपी सिंह, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
चौथी जगह कटान शुरू होने से ग्रामीणों में दहशत
जंगल कौड़िया। रविवार सुबह राप्ती नदी ने गाहासाड़-कोलिया तटबंध के पास उतरासोत गांव के सामने चौथी जगह कटान शुरू होने से लोगों में दहशत है। इससे पहले नदी इसी तटबंध के पास तीन जगह कटान कर चुकी थी। अब चौथे स्थान पर पानी की धारा ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रशासन की तरफ से पेड़-पौधों, ईंट-पत्थरों और मिट्टी से भरी बोरियों को कटान वाली जगह पर डालने का काम तेजी से चल रहा है।
चौथी जगह कटान शुरू होने से ग्रामीणों में दहशत
जंगल कौड़िया। रविवार सुबह राप्ती नदी ने गाहासाड़-कोलिया तटबंध के पास उतरासोत गांव के सामने चौथी जगह कटान शुरू होने से लोगों में दहशत है। इससे पहले नदी इसी तटबंध के पास तीन जगह कटान कर चुकी थी। अब चौथे स्थान पर पानी की धारा ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रशासन की तरफ से पेड़-पौधों, ईंट-पत्थरों और मिट्टी से भरी बोरियों को कटान वाली जगह पर डालने का काम तेजी से चल रहा है।
मलाव गांव के पास भी राप्ती नदी में कटान शुरू
बेलीपार थाना क्षेत्र के मलांव गांव के पास रविवार शाम को बेला मलांव बांध के किनारे हनुमान मंदिर के पास राप्ती नदी कटान करने लगी। इसकी जानकारी मिलने पर एसडीओ प्राची पांडेय, एक्सईएन विपिन बिहारी व जेई नवनीत वर्मा आदि मौके पर पहुंचे। वहां बांस, बल्ली, मिट्टी, बंबू, बरेसिंग, गैम्बियान बंबू आदि डलवाकर कटान रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय गांव मलांव, करवलिया, कनईल, माझीगावा आदि के ग्रामीण मौके पर मौजूद हैं।
बेलीपार थाना क्षेत्र के मलांव गांव के पास रविवार शाम को बेला मलांव बांध के किनारे हनुमान मंदिर के पास राप्ती नदी कटान करने लगी। इसकी जानकारी मिलने पर एसडीओ प्राची पांडेय, एक्सईएन विपिन बिहारी व जेई नवनीत वर्मा आदि मौके पर पहुंचे। वहां बांस, बल्ली, मिट्टी, बंबू, बरेसिंग, गैम्बियान बंबू आदि डलवाकर कटान रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय गांव मलांव, करवलिया, कनईल, माझीगावा आदि के ग्रामीण मौके पर मौजूद हैं।