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Gorakhpur News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर 10 को मंथन करेंगे शिक्षाविद्

Mon, 04 Aug 2025 12:47 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:47 AM IST
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Gorakhpur News: Educationists will brainstorm on National Education Policy on 10th
गोरखपुर विश्वविद्यालय करेगा मेजबानी, यूपी से जुटेंगे एनईपी के 200 मर्मज्ञ
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गोरखपुर समेत प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपति और शिक्षाविद् आमंत्रित
गोरखपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के उत्तर प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गोरखपुर में बड़ी कार्यशाला आयोजित होने जा रही है। दस अगस्त को होने वाली इस कार्यशाला की मेजबानी दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय करेगा। इसमें प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद् व शोधार्थी जुटेंगे। छात्र संगठन के रूप में अभाविप इस आयोजन में अहम भूमिका निभा रहा है।

डीडीयू की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि एनईपी के लागू हुए करीब पांच साल पूरे हो गए हैं। इसे देखते हुए एनईपी के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश के प्रमुख शैक्षिक हितधारकों की सहभागिता से इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य एनईपी के क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करते हुए सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करना है।
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चार सत्रों में होगा आयोजन
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि ''''राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: संकल्प, प्रयास और चुनौतियां'''' विषय पर कार्यशाला आयोजित हो रही है। इसमें एनईपी के क्रियान्वयन से जुड़े प्रमुख बिंदुओं के साथ ही उच्च शिक्षा आयोग की अवधारणा, उच्च शिक्षा में वित्त, कौशल शिक्षा एवं रोजगारपरकता, भारतीय भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा व शिक्षा में भारतीयता, उद्यमिता एवं नवाचार, राष्ट्रीय शोध संस्थान व नैक जैसे पहलुओं पर कुल चार सत्र आयोजित किए जाएंगे।
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वर्जन
एनईपी सैद्धांतिक स्तर पर बहुत लोकप्रिय हुई है लेकिन जब तक प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होगा, तब तक परिणाम वैसे नहीं आएंगे, जैसा हम चाहते हैं। एनईपी के समक्ष क्या चुनौतियां आ रही हैं और इसका क्रियान्वयन कैसे करें, इस पर सभी हितधारक मिलकर विमर्श करेंगे। एनईपी का सफल क्रियान्वयन होगा तो इसका लाभ छात्रों को मिलेगा और सही नहीं हुआ तो नुकसान भी छात्रों का ही होगा। इसलिए कार्यशाला में शिक्षाविद्, छात्र और समाज के अन्य घटकों को भी शामिल किया जा रहा है।
-प्रो. राजशरण शाही, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अभाविप
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