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डिजिटल अरेस्ट : म्यांमार और कंबोडिया में बैठकर ठगी कर रहे जालसाज
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एक साल में प्रदेश में 10 गुना बढ़ गए डिजिटल अरेस्ट के मामले
डीजीपी ने सभी जिलों को जारी की है गाइडलाइन
गोरखपुर। प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्ष 2023 में जहां केवल 18 मामले सामने आए थे, वहीं वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 196 तक पहुंच गया है। यानी एक वर्ष में ये मामले 10 गुना से ज्यादा बढ़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है ठग म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों से लोगों को शिकार बना रहे हैं।
मामलों में वृद्धि को देखते हुए डीजीपी ने सभी जिलों को गाइडलाइन जारी की है। निर्देश दिए गए हैं कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में पुलिस तुरंत केस दर्ज करे। अगर मामला विदेश से जुड़ा हो तो केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय बनाकर कार्रवाई की जाए। साथ ही, जिन नंबरों से ठगी की कॉल आती है, उन्हें पहचान कर संबंधित कंपनी से तुरंत ब्लॉक कराया जाए। डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि पुलिस को जनजागरूकता अभियान चलाना होगा। लोगों को बताना होगा कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई वास्तविक प्रक्रिया नहीं होती। जालसाज अक्सर मादक पदार्थ तस्करी या अन्य अपराधों में नाम आने का झांसा देकर लोगों को डराते हैं और रुपये वसूलते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति के साथ इस तरह की ठगी होती है तो उसे तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इससे न केवल ठगों पर कार्रवाई आसान होगी, बल्कि अन्य लोगों को भी बचाया जा सकेगा। गोरखपुर समेत कई जिलों में ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं, हालांकि यहां अब तक सिर्फ दो मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि जागरूकता ही इस नई तरह की साइबर ठगी से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।
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डीजीपी ने सभी जिलों को जारी की है गाइडलाइन
गोरखपुर। प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्ष 2023 में जहां केवल 18 मामले सामने आए थे, वहीं वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 196 तक पहुंच गया है। यानी एक वर्ष में ये मामले 10 गुना से ज्यादा बढ़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है ठग म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों से लोगों को शिकार बना रहे हैं।
मामलों में वृद्धि को देखते हुए डीजीपी ने सभी जिलों को गाइडलाइन जारी की है। निर्देश दिए गए हैं कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में पुलिस तुरंत केस दर्ज करे। अगर मामला विदेश से जुड़ा हो तो केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय बनाकर कार्रवाई की जाए। साथ ही, जिन नंबरों से ठगी की कॉल आती है, उन्हें पहचान कर संबंधित कंपनी से तुरंत ब्लॉक कराया जाए। डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि पुलिस को जनजागरूकता अभियान चलाना होगा। लोगों को बताना होगा कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई वास्तविक प्रक्रिया नहीं होती। जालसाज अक्सर मादक पदार्थ तस्करी या अन्य अपराधों में नाम आने का झांसा देकर लोगों को डराते हैं और रुपये वसूलते हैं।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति के साथ इस तरह की ठगी होती है तो उसे तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इससे न केवल ठगों पर कार्रवाई आसान होगी, बल्कि अन्य लोगों को भी बचाया जा सकेगा। गोरखपुर समेत कई जिलों में ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं, हालांकि यहां अब तक सिर्फ दो मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि जागरूकता ही इस नई तरह की साइबर ठगी से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।
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