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Gorakhpur News: आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण में नहीं मिले बच्चे, संचालिका ने नहीं दिखाया रजिस्टर
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राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने किया दो आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण
गोरखपुर। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी के आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण में कोई बच्चा नहीं मिला। वहां देखकर ऐसा नहीं लगा कि आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से जब रजिस्टर मांगा गया तो वह उपलब्ध नहीं करा सकी। नाराज होकर उपाध्यक्ष ने इसकी शिकायत निदेशक बाल विकास से करने की चेतावनी दी।
चारू चौधरी ने बताया कि उन्होंने हांसुपुर व हांसूपुर चौराहा आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। वहां आंगनबाड़ी घर में संचालित है। दोनों केंद्रों पर न बच्चे थे और न ही माहौल। हांसूपुर व हासूपुर चौराहा केंद्रों पर क्रमश: 30 और 15 बच्चे पंजीकृत हैं। संचालिका ने पूछे जाने पर जवाब दिया अभी रजिस्टर नहीं है। सुपरवाइजर सुनीता सिंह को पहले भी आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि सरकार जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए पोषाहार देती है। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। लेकिन केंद्रों की हालत बद से बदतर है। केंद्र पर जब बच्चे ही नहीं आते हैं तो उनके नाम पर लिया जाने वाला पोषाहार क्या हो रहा है? उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत वह मुख्यमंत्री से भी करेंगी।
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वर्जन-
उपाध्यक्ष के निरीक्षण की जानकारी होने पर मैने मुख्य सेविका से स्पष्टीकरण मांगा है। मुख्य सेविका को चेतावनी देते हुए उसका एक माह का वेतन रोक दिया है। जब तक बच्चों की उपस्थिति आंगनबाड़ी केंद्र पर सुनिश्चित नहीं होगी तब तक वेतन नहीं मिलेगा।
- अभिनव कुमार मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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गोरखपुर। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी के आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण में कोई बच्चा नहीं मिला। वहां देखकर ऐसा नहीं लगा कि आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से जब रजिस्टर मांगा गया तो वह उपलब्ध नहीं करा सकी। नाराज होकर उपाध्यक्ष ने इसकी शिकायत निदेशक बाल विकास से करने की चेतावनी दी।
चारू चौधरी ने बताया कि उन्होंने हांसुपुर व हांसूपुर चौराहा आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। वहां आंगनबाड़ी घर में संचालित है। दोनों केंद्रों पर न बच्चे थे और न ही माहौल। हांसूपुर व हासूपुर चौराहा केंद्रों पर क्रमश: 30 और 15 बच्चे पंजीकृत हैं। संचालिका ने पूछे जाने पर जवाब दिया अभी रजिस्टर नहीं है। सुपरवाइजर सुनीता सिंह को पहले भी आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश दिए।
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उन्होंने बताया कि सरकार जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए पोषाहार देती है। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। लेकिन केंद्रों की हालत बद से बदतर है। केंद्र पर जब बच्चे ही नहीं आते हैं तो उनके नाम पर लिया जाने वाला पोषाहार क्या हो रहा है? उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत वह मुख्यमंत्री से भी करेंगी।
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उपाध्यक्ष के निरीक्षण की जानकारी होने पर मैने मुख्य सेविका से स्पष्टीकरण मांगा है। मुख्य सेविका को चेतावनी देते हुए उसका एक माह का वेतन रोक दिया है। जब तक बच्चों की उपस्थिति आंगनबाड़ी केंद्र पर सुनिश्चित नहीं होगी तब तक वेतन नहीं मिलेगा।
- अभिनव कुमार मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी