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Gorakhpur News: नकली चायपत्ती बेचने के आरोपी पर केस दर्ज

Wed, 30 Jul 2025 02:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jul 2025 02:20 AM IST
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Gorakhpur News: Case registered against accused of selling fake tea leaves
कंपनी के प्रतिनिधि की तहरीर पर केस दर्ज कर पुलिस मामले की छानबीन में जुटी
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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 44 हजार पैकेट पकड़े थे
गोरखपुर। नकली चायपत्ती बेचने के आरोपी गौरी बाजार निवासी अश्वनी यादव पर तिवारीपुर थाने में मंगलवार को केस दर्ज कर लिया गया। ब्रुकबांड ताजा कंपनी के प्रतिनिधि की तहरीर पर केस दर्ज कर पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को बिहार से आ रही एक पिकअप को तिवारीपुर पुलिस ने रूटीन जांच के दौरान रोका। इस पर ब्रुकबांड ताजा कंपनी की चायपत्ती लदी थी। चायपत्ती किस व्यापारी के गोदाम जा रही है, इसकी जानकारी पिकअप चालक ने नहीं दी। पुलिस की सूचना पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की तब चायपत्ती के नकली होने की आशंका हुई। इसके बाद ब्रुकबांड ताजा कंपनी के एजेंट के जरिये कंपनी के अफसरों को सूचना दी गई। देर शाम एक अफसर ने तिवारीपुर थाने पहुंचकर मामले की जानकारी ली। चायपत्ती 10 रुपये वाले पैकेट में थी। कुल 44 हजार पैकेट थे।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने चायपत्ती के सैंपल लेकर सारा माल जब्त कर लिया। मंगलवार को कंपनी के प्रतिनिधि की तहरीर पर गौरी बाजार के अश्वनी यादव के विरुद्ध पुलिस ने कॉपीराइट अधिनियम में केस दर्ज किया। तिवारीपुर थाना प्रभारी गौरव वर्मा ने बताया कि केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
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बिहार से गौरी बाजार आता था माल...गोरखपुर मंडल में होती थी सप्लाई
दिल्ली से ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट खरीदकर बिहार में नकली चायपत्ती भरते थे धंधेबाज

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भी नकली चायपत्ती की सप्लाई गौरी बाजार से हो रही थी। वहां पर बिहार से माल आता था। इसके बाद ऑर्डर के मुताबिक पिकअप से माल को गोदाम तक पहुंचा दिया जाता था। ब्रांड का पैकेट होने की वजह से किसी को शक भी नहीं होता था। गोरखपुर मंडल में इसकी सप्लाई हो रही थी।
बताया जा रहा है कि धंधेबाज ब्रांडेड कंपनी के रैपर को दिल्ली से मंगाते थे। इसके बाद बिहार में इसमें चायपत्ती भरी जाती थी। गोरखपुर में गौरी बाजार से ही नकली चायपत्ती की सप्लाई हो रही थी। सूत्रों ने बताया कि गौरी बाजार में कई ब्रांड की नकली चायपत्ती आती थी। ऑर्डर के अनुसार इसकी सप्लाई होती थी। वहां से देवरिया, कुशीनगर सहित बलिया तक माल जाता था।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि चायपत्ती लेकर आने वाले व्यक्ति से पूछताछ में पता चला कि केवल ब्रांडेड कंपनी के रैपर का इस्तेमाल किया गया है। दिल्ली से खरीदे गए ब्रुकबांड ताजा चायपत्ती के पैकेट में बिहार में एक जगह कम गुणवत्ता वाली सस्ती चायपत्ती भरी जाती है। इस तरह से तैयार पैकेट को गोरखपुर में नौसड़ के पास बांध पर गाड़ी खड़ी करके बेच दिया जाता है। बिहार से यहां आने व बिक्री करने पर करीब तीन गुना फायदा होता है।

नामी ब्रांड पर आसानी से हो जाता है भरोसा
नकली चायपत्ती का यह धंधा ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर ही अधिक होता है। इसपर लोगों को शक नहीं होता। धंधेबाज इसी का फायदा उठाते हैं। वे ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट खरीद लेते हैं जिसमें सस्ती चाय भरकर बेच देते हैं। फुटपाथ की दुकानों पर इसकी सबसे अधिक खपत है।
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बाहर की चाय हो सकती है जहरीली...दुकानों पर खपाई जा रही नकली चायपत्ती
चाय की दुकानों पर है सबसे अधिक खपत, सस्ते में मिल जाती है

छोटे दाने वाली चायपत्ती जल्द घुलती है, रंग आता है गाढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर। सड़क किनारे चाय की दुकानों पर नकली चायपत्ती की सबसे अधिक खपत है। थकान मिटाने के लिए लोग यहां चुस्की लेते हैं लेकिन यह उनके लिए जहरीली हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार रंग वाली चायपत्ती सेहत के लिए खतरनाक है।

दुकानों पर खराब चायपत्ती को भी खपा दिया जाता है। सस्ती और मिलावटी चायपत्ती का अड्डा गोरखपुर के अलावा पड़ोसी जिलों देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में भी है। देवरिया के गौरी बाजार वाले अड्डे से कई जगहों पर सप्लाई की जाती है। इसके अलावा कुशीनगर और महराजगंज में भी इसका बड़ा सेंटर है।
25 किलो के बोरे में खुली चायपत्ती भी बड़े पैमाने पर आती है। ब्रांडेड चायपत्ती जहां 350 से 450 रुपये किलो की है, वहीं खुली चायपत्ती 120 से 150 रुपये किलो में मिल जाती है। सस्ती होने के चलते इस चायपत्ती की दुकानों पर अधिक मांग रहती है। चाय के दुकानदारों के अलावा अन्य ग्राहक भी इसे सस्ती होने के नाते खरीदते हैं। चाय बेचने वाले दुकानदार अशोक ने बताया कि खुले में बिकने वाली चायपत्ती ज्यादा सही होती है। इससे रंग अच्छा आता है और स्वाद भी।

चाय के दुकानदार बिट्टू का कहना है कि बड़ा दाना घुलने में अधिक समय लेता है और रंग भी अच्छा नहीं आता। वहीं महीन दाने वाली खुली चायपत्ती का एक चम्मच पड़ते ही रंग आ जाता है। लोग इस चाय की तारीफ करते हैं।
नकली चायपत्ती से लिवर पर असर
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. बीके सुमन ने कहा कि चाय में कैफीन पाई जाती है। यह शरीर के लिए उत्प्रेरक का का काम करती है। इसकी अधिक मात्रा लिवर को प्रभावित करती है। इससे पाचन क्रिया पर असर बुरा असर पड़ता है। नकली चायपत्ती या रंग वाली चायपत्ती से लिवर को नुकसान पहुंच सकता है।


वर्जन
नकली चायपत्ती के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। यहां बड़े पैमाने पर मिलावटी चायपत्ती का धंधा फैला है। सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आते ही केस दर्ज कराया जाएगा।

- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य
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