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Gorakhpur News: आधे से कम रेट पर खरीदते हैं ब्रांडेड कंपनियों की एक्सपायर नमकीन .....रि पैकिंग कर बेच देते हैं

Sun, 29 Dec 2024 01:06 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 29 Dec 2024 01:06 AM IST
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Gorakhpur News: Buy expired namkeen of branded companies at less than half the rate and sell it after repacking.
गोरखपुर।
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सस्ते के चक्कर में खुले में बिकने वाली नमकीन खरीदते हैं तो जरा ठहरिए। मिलावटखोरों ने इसे भी नहीं बख्शा है। ब्रांडेड कंपनियों की एक्सपायर हो चुकी नमकीन के पैकेट सस्ते में खरीदकर धंधेबाज अपने यहां बनने वाली लोकल नमकीन में मिला देते हैं और फिर इसे बिना रैपर वाले पैकेट में डालकर छोटी दुकानों पर सप्लाई कर देते हैं। इस तरह से तैयार नमकीन 150 से 180 रुपये किलो के भाव दुकानदार को मिल जाता है, जिसे वह 400 रुपये किलो के हिसाब से बेच देते हैं। इस तरह से बिकने वाली नमकीन पर न तो निर्माता का नाम पता होता है और न ही इस पर उत्पादन या एक्सपायरी डेट होती है, जिससे दुकानदार इसे जब तक चाहे बेच सकते हैं।
मिठाई की तरह ही नमकीन भी हर घर की जरूरत है। खुद के अलावा मेहमानवाजी में भी इसका उपयोग होता है। इपी डिमांड की वजह से यह धंधेबाजों की नजर में है। शहर में मिठाई की दुकानों के अलावा कई लोगों ने नमकीन बनाने का भी कारखाना लगा रखा है, जहां नमकीन को पांच व 10 किलो के पैकेट में तैयार कर दुकानों पर भेजा जाता है। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस नमकीन को चटपटा और स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें ब्रांडेड कंंपनियों की नमकीन भी मिलाई जाती है। चूंकि वह नमकीन महंगा होता है, लिहाजा धंधेबाज अच्छी क्वालिटी वाली कंपनी के नमकीन का एक्सपायर माल खरीदते हैं। आमतौर पर जिस महीने कंपनी वाले नमकीन की एक्सपायरी डेट होती है, उस महीने उसे आधी से कम कीमत पर ही थोक विक्रेता बेचकर अपना गोदाम खाली कर लेते हैं। धंधेबाज इसे खरीदकर अपने गोदाम में पड़े लोकल नमकीन में मिलाकर बिना स्टीकर वाले पैकेट में डाल देते हैं।
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किराना की दुकानों पर खूब है इसकी डिमांड
मेडिकल कॉलेज रोड पर किराना की दुकान चलाने वाले विनय गुप्ता ने बताया कि बिना स्टीकर वाला यह नमकीन गली-मोहल्ले के जनरल स्टोर पर खूब बिकती है। जार में रखकर बिक रही इस नमकीन को मध्यम आय वर्ग वाले लोग सस्ता होने के चलते खरीद लेते हैं। चूंकि इस पर कोई उत्पादन या एक्सपायरी डेट नहीं होता, इसलिए इस पर कोई आपत्ति भी नहीं करता। आमतौर पर इसके खरीदार 100 ग्राम से लेकर 250 ग्राम तक वाले ही होते हैं, इसलिए इसकी खपत भी जल्द हो जाती है। खाने वाले को तत्काल कोई दिक्कत नहीं होती तो धंधे में भी कोई परेशानी नहीं आती।
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हाईकोर्ट जता चुका है चिंता
बीते जुलाई में हाईकोर्ट ने इस तरह खुले में बिक रहे नमकीन का स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया था। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने नमकीन बनाने वाले बड़े कारोबारियों को नोटिस भी जारी किया था। इसके बाद कारोबारियों ने खाद्य सुरक्षा विभाग को यह लिखित तौर पर बताया था कि वे अपने यहां एक्सपायरी डेट वाले नमकीन को नष्ट करा देते हैं, लेकिन पूरे शहर में ऐसा कोई स्थान ही नहीं है, जहां खराब नमकीन को नष्ट कराया जाए या किया जाता हो। बल्कि एक्सपायरी डेट वाले महीने में ही माल खपा दिया जाता है।

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वर्जन
खुले में बिकने वाली नमकीन की निगरानी कराई जा रही है। हर महीने अभियान चलाकर मिठाई की दुकानों के अलावा नमकीन बनाने वाले कारखानों की जांच की जाती है। रि पैकिंग की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जल्द ही फिर से नमकीन बनाने वाले कारखानों की जांच की जाएगी।
डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा
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