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Gorakhpur News: नशीली दवाओं का भी बड़ा बाजार बन रहा भालोटिया मार्केट
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गोरखपुर। भलोटिया मार्केट पूर्वांचल ही नहीं यूपी-बिहार और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में भी नशीली दवाओं को पहुंचाने का सबसे बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। यहां की कुछ फर्मों से नशीली दवाएं बिना कागजी कोरमपूर्ति के ही बाहर भेजी जा रहीं हैं। अभी जो मामले सामने आए हैं, उसमें तो दुकान ही कागज में संचालित होने की बात सामने आई है। एक साल के अंदर दूसरा मामला है जबकि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स की टीम ने बाजार में पहुंचकर छानबीन की है।
दवा की थोक मंडी भलोटिया में हर दिन करीब दो करोड़ रुपये की दवाओं का कारोबार होता है। सुबह 10 बजे से रात आठ बजे तक इस बाजार में चलने की जगह नहीं मिलती। यहां की दुकानों से गोरखपुर-बस्ती मंडल के फुटकर विक्रेताओं के अलावा पड़ोसी प्रांत बिहार और नेपाल के बाॅर्डर इलाके में भी दवाएं भेजी जाती हैं। यहां हर कंपनी और हर ब्रांड की दवाएं मिलती हैं। दवाओं के इस बड़े कारोबार के बीच ही कई धंधेबाजों ने भी अपनी जगह बना ली है। वे यहां से प्रतिबंधित दवाओं को भी अन्य दवाओं के साथ ही आसानी से फुटकर बाजारों में पहुंचा देते हैं। शहर के मेडिकल कॉलेज रोड स्थित झुंगिया बाजार, मोहद्दीपुर स्थित एक दुकान और चौरीचौरा क्षेत्र के जगदीशपुर में पकड़ी नशीली दवा के खेप से यह बात पहले भी स्पष्ट हो चुकी है कि भलोटिया मार्केट के कुछ दुकानदार सारे नियमों को किनारे रखकर नशीली और प्रतिबंधित दवाएं भी बेच रहे हैं। लगातार मामले पकड़ में आने के बाद भी इनकी जांच नहीं हो रही है।
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अंबर फाॅर्मा की जगह पर कैसे मिल गया दूसरी फर्म को लाइसेंस
भालोटिया मार्केट में कागज में चल रही दवा की जिस दुकान से लगभग 10 लाख टेबलेट नशीली दवाएं बेची गई हैं, उसकी शनिवार को ड्रग विभाग ने जांच शुरू कर दी। बड़ा सवाल यह है कि आरोपी अंबर फाॅर्मा की जगह दूसरी एजेंसी चल रही थी और ड्रग विभाग को भनक नहीं थी। जबकि लाइसेंस के लिए हुए आवेदन की विधिवत जांच होती है। अंबर फाॅर्मा का लाइसेंस निरस्त भी नहीं है और दूसरी फाॅर्मा एजेंसी को भी लाइसेंस मिला है। शुक्रवार को भालोटिया मार्केट स्थित पशुपति मार्केट में अंबर फाॅर्मा की जांच करने पहुंची सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम दुकान नंबर 19 पर पहुंची तो वहां दूसरे नाम का फर्म संचालित हो रहा था। पूछताछ में बताया गया कि करीब छह महीने पहले अंबर फाॅर्मा की दुकान बंद हो गई थी। हालांकि उसका लाइसेंस अभी उपयोग किया जा रहा है। शनिवार को असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग गोरखपुर के निर्देश पर इंस्पेक्टर राहुल कुमार ने दुकानों की जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा ड्रग विभाग ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स से गोरखपुर से खरीदी गई दवाओं के बारे में भी जानकारी मांगी है।
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इससे पहले पटना में पकड़ा गया था मामला
लखनऊ से पहले पटना में भी नशीली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। तब भी नारकोटिक्स ब्यूरो की एक टीम गोरखपुर आई थी। टीम ने यहां तीन दुकानों की जांच के अलावा कुछ और जानकारी भी जुटाई थी। हालांकि उस प्रकरण में आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते नशीली दवाओं के धंधेबाज भालोटिया से बेरोक-टोक दवाएं बेचते रहे। ड्रग्स विभाग ने भी इससे पहले मेडिकल कॉलेज रोड, मोहद्दीपुर और जगदीशपुर में नशीली दवाओं की खेप पकड़ी थी। उन दवाओं को भी भलोटिया मार्केट से ही भेजा गया था।
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कोट
हम लोग दवा विक्रेताओं को इस मुद्दे पर जागरूक करने के लिए जल्द ही एक बैठक बुलाएंगे। सभी को यह संदेश भी दिया गया है कि नारकोटिक्स श्रेणी की दवा डॉक्टर के पर्चा देखकर और रजिस्टर में नाम-पता दर्ज करके ही दें। प्रयास रहे कि हर जरूरतमंद तक दवा पहुंचे और बेवजह किसी दुकानदार को भी परेशान न होना पड़े।
आलोक चौरसिया, महामंत्री दवा विक्रेता समिति
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कोट
मार्केट में कुछ ही लोग अपने फायदे के लिए धंधेबाजी करते हैं, लेकिन इससे बदनामी सभी दुकानदारों की होती है। प्रशासन को भी देखना चाहिए कि फुटकर विक्रेताओं के बजाय इनके होल सेलर की जांच करें और यह चेक करें कि उनके रिकार्ड दुरुस्त हैं या नहीं। फुटकर मेडिकल स्टोर वालों को जांच की आड़ में परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
दिलीप सिंह, महामंत्री केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
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वर्जन
मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर से पहले की और नई फर्म के लाइसेंस के बारे में पूरी जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नाॅरकोटिक्स के संपर्क में भी हैं। जांच के बाद दुकानों के लाइसेंस भी निरस्त हो सकते हैं। जो भी लोग दवाओं की कालाबाजारी में लगे हैं, उनकी जांच कराकर सख्त कार्रवाई होगी।
पूरन चंद, असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग, गोरखपुर
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दवा की थोक मंडी भलोटिया में हर दिन करीब दो करोड़ रुपये की दवाओं का कारोबार होता है। सुबह 10 बजे से रात आठ बजे तक इस बाजार में चलने की जगह नहीं मिलती। यहां की दुकानों से गोरखपुर-बस्ती मंडल के फुटकर विक्रेताओं के अलावा पड़ोसी प्रांत बिहार और नेपाल के बाॅर्डर इलाके में भी दवाएं भेजी जाती हैं। यहां हर कंपनी और हर ब्रांड की दवाएं मिलती हैं। दवाओं के इस बड़े कारोबार के बीच ही कई धंधेबाजों ने भी अपनी जगह बना ली है। वे यहां से प्रतिबंधित दवाओं को भी अन्य दवाओं के साथ ही आसानी से फुटकर बाजारों में पहुंचा देते हैं। शहर के मेडिकल कॉलेज रोड स्थित झुंगिया बाजार, मोहद्दीपुर स्थित एक दुकान और चौरीचौरा क्षेत्र के जगदीशपुर में पकड़ी नशीली दवा के खेप से यह बात पहले भी स्पष्ट हो चुकी है कि भलोटिया मार्केट के कुछ दुकानदार सारे नियमों को किनारे रखकर नशीली और प्रतिबंधित दवाएं भी बेच रहे हैं। लगातार मामले पकड़ में आने के बाद भी इनकी जांच नहीं हो रही है।
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अंबर फाॅर्मा की जगह पर कैसे मिल गया दूसरी फर्म को लाइसेंस
भालोटिया मार्केट में कागज में चल रही दवा की जिस दुकान से लगभग 10 लाख टेबलेट नशीली दवाएं बेची गई हैं, उसकी शनिवार को ड्रग विभाग ने जांच शुरू कर दी। बड़ा सवाल यह है कि आरोपी अंबर फाॅर्मा की जगह दूसरी एजेंसी चल रही थी और ड्रग विभाग को भनक नहीं थी। जबकि लाइसेंस के लिए हुए आवेदन की विधिवत जांच होती है। अंबर फाॅर्मा का लाइसेंस निरस्त भी नहीं है और दूसरी फाॅर्मा एजेंसी को भी लाइसेंस मिला है। शुक्रवार को भालोटिया मार्केट स्थित पशुपति मार्केट में अंबर फाॅर्मा की जांच करने पहुंची सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम दुकान नंबर 19 पर पहुंची तो वहां दूसरे नाम का फर्म संचालित हो रहा था। पूछताछ में बताया गया कि करीब छह महीने पहले अंबर फाॅर्मा की दुकान बंद हो गई थी। हालांकि उसका लाइसेंस अभी उपयोग किया जा रहा है। शनिवार को असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग गोरखपुर के निर्देश पर इंस्पेक्टर राहुल कुमार ने दुकानों की जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा ड्रग विभाग ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स से गोरखपुर से खरीदी गई दवाओं के बारे में भी जानकारी मांगी है।
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इससे पहले पटना में पकड़ा गया था मामला
लखनऊ से पहले पटना में भी नशीली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। तब भी नारकोटिक्स ब्यूरो की एक टीम गोरखपुर आई थी। टीम ने यहां तीन दुकानों की जांच के अलावा कुछ और जानकारी भी जुटाई थी। हालांकि उस प्रकरण में आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते नशीली दवाओं के धंधेबाज भालोटिया से बेरोक-टोक दवाएं बेचते रहे। ड्रग्स विभाग ने भी इससे पहले मेडिकल कॉलेज रोड, मोहद्दीपुर और जगदीशपुर में नशीली दवाओं की खेप पकड़ी थी। उन दवाओं को भी भलोटिया मार्केट से ही भेजा गया था।
कोट
हम लोग दवा विक्रेताओं को इस मुद्दे पर जागरूक करने के लिए जल्द ही एक बैठक बुलाएंगे। सभी को यह संदेश भी दिया गया है कि नारकोटिक्स श्रेणी की दवा डॉक्टर के पर्चा देखकर और रजिस्टर में नाम-पता दर्ज करके ही दें। प्रयास रहे कि हर जरूरतमंद तक दवा पहुंचे और बेवजह किसी दुकानदार को भी परेशान न होना पड़े।
आलोक चौरसिया, महामंत्री दवा विक्रेता समिति
कोट
मार्केट में कुछ ही लोग अपने फायदे के लिए धंधेबाजी करते हैं, लेकिन इससे बदनामी सभी दुकानदारों की होती है। प्रशासन को भी देखना चाहिए कि फुटकर विक्रेताओं के बजाय इनके होल सेलर की जांच करें और यह चेक करें कि उनके रिकार्ड दुरुस्त हैं या नहीं। फुटकर मेडिकल स्टोर वालों को जांच की आड़ में परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
दिलीप सिंह, महामंत्री केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
वर्जन
मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर से पहले की और नई फर्म के लाइसेंस के बारे में पूरी जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नाॅरकोटिक्स के संपर्क में भी हैं। जांच के बाद दुकानों के लाइसेंस भी निरस्त हो सकते हैं। जो भी लोग दवाओं की कालाबाजारी में लगे हैं, उनकी जांच कराकर सख्त कार्रवाई होगी।
पूरन चंद, असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग, गोरखपुर