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Gorakhpur News: शुगर-बीपी जैसी बीमारियों के लिए खराब पाचन तंत्र अहम कारण
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गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी डॉक्टरों का प्रदेश स्तरीय दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस शुरू
दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी समेत कई बड़े शहरों से आए हैं गैस्ट्रो विशेषज्ञ
गोरखपुर। लिवर केवल पाचन का अंग नहीं बल्कि शरीर के मेटाबोलिक संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लिवर की गड़बड़ी से शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसके कारण करीब 20 फीसदी लोग मधुमेह और 15 फीसदी ब्लड प्रेशर के शिकार हो जाते हैं।
यह बात गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. ऋषभ गुप्ता ने शनिवार को शुरू हुई दो दिवसीय गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी सोसाइटी की राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में कहीं। विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती जीवनशैली, तनाव और गलत खानपान पाचन तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं, जो आगे चलकर लिवर की गंभीर बीमारियों में परिवर्तित हो जाते हैं। सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को पाचन रोगों के उन्नत उपचार और रोकथाम पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।
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गैस, डकार और अपच का है सटीक इलाज
कॉन्फ्रेंस में गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. उपेंद्र गुप्ता ने कहा कि अब गैस, खट्टी डकार, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं के लिए उन्नत चिकित्सा उपलब्ध है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इरिटेबल बॉउल सिंड्रोम (आईबीएस) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह रोग मुख्यतः तनाव और अनियमित जीवनशैली के कारण होता है। 90 प्रतिशत मामलों में यह गंभीर नहीं होता लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर समस्या बन जाती है।
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बच्चों में बढ़ रहा पेंक्रियाटिस का खतरा
गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. सुनील केजरीवाल ने बताया कि बच्चों में फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन लिवर और पेंक्रियाज को नुकसान पहुंचा रहा है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और पैकेट वाले स्नैक्स बच्चों के पाचन तंत्र को कमजोर कर रहे हैं। मोटापे से ग्रस्त बच्चों में पेंक्रियाटिस डिजीज तेजी से बढ़ रही है, जो आगे चलकर लिवर संक्रमण और पाचन विकार का कारण बनती है। आमतौर पर यह बीमारी 15 वर्ष की आयु तक सामने आ जाती है।
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दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी समेत कई बड़े शहरों से आए हैं गैस्ट्रो विशेषज्ञ
गोरखपुर। लिवर केवल पाचन का अंग नहीं बल्कि शरीर के मेटाबोलिक संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लिवर की गड़बड़ी से शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसके कारण करीब 20 फीसदी लोग मधुमेह और 15 फीसदी ब्लड प्रेशर के शिकार हो जाते हैं।
यह बात गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. ऋषभ गुप्ता ने शनिवार को शुरू हुई दो दिवसीय गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी सोसाइटी की राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में कहीं। विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती जीवनशैली, तनाव और गलत खानपान पाचन तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं, जो आगे चलकर लिवर की गंभीर बीमारियों में परिवर्तित हो जाते हैं। सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को पाचन रोगों के उन्नत उपचार और रोकथाम पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।
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गैस, डकार और अपच का है सटीक इलाज
कॉन्फ्रेंस में गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. उपेंद्र गुप्ता ने कहा कि अब गैस, खट्टी डकार, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं के लिए उन्नत चिकित्सा उपलब्ध है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इरिटेबल बॉउल सिंड्रोम (आईबीएस) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह रोग मुख्यतः तनाव और अनियमित जीवनशैली के कारण होता है। 90 प्रतिशत मामलों में यह गंभीर नहीं होता लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर समस्या बन जाती है।
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बच्चों में बढ़ रहा पेंक्रियाटिस का खतरा
गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. सुनील केजरीवाल ने बताया कि बच्चों में फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन लिवर और पेंक्रियाज को नुकसान पहुंचा रहा है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और पैकेट वाले स्नैक्स बच्चों के पाचन तंत्र को कमजोर कर रहे हैं। मोटापे से ग्रस्त बच्चों में पेंक्रियाटिस डिजीज तेजी से बढ़ रही है, जो आगे चलकर लिवर संक्रमण और पाचन विकार का कारण बनती है। आमतौर पर यह बीमारी 15 वर्ष की आयु तक सामने आ जाती है।