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Gorakhpur News: बारिश की बूंदाें के बीच उदयीमान सूर्य को अर्घ्य
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छठ पर्व पर गोरखनाथ मंदिर स्थित भीम सरोवर में पूजा करते श्रद्धालु।
बारिश से श्रद्धालुओं के उत्साह में नहीं आई कमी, घाटों पर लगा रहा मेला
उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ चार दिवसीय छठ पर्व का हुआ समापन
गोरखपुर। सूर्योपासना का महापर्व छठ मंगलवार को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण हो गया। सुबह बारिश की बूंदों के बीच निर्जल व्रती महिलाओं ने अर्घ्य दिया। बारिश को कारण लोगों की आस्था कम नहीं हुई। छठ घाटों पर मेले जैसा माहौल रहा। साथ ही उगा हो सुरुजदेव भिन भिनसरवा... व केलवा के पात पर उगेलन सूरूज देव झांपे झूंपे... आदि भजनों से छठ घाट गूंजायमान रहा। कई जगहों पर भजन-कीर्तन भी हुए। छठ घाट चकाचौंध रोशनी से नहाया हुआ रहा।
मंगलवार भोर में लगभग 3.30 बजे राप्ती तट पर लगभग 70 प्रतिशत श्रद्धालु छठ घाट पर पहुंच चुके थे। श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी था। हाथ में कलश, सिर पर दउरा लिए मंगल गीता गाते श्रद्धालु आ रहे थे। लोग अपनी जगहों पर बैठ रहे थे जहां उन्होंने शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया था। घाट पर ऐसा लग रहा था मानों रात नहीं दिन है।
वहीं सुबह 04:10 बजे गोरखनाथ के भीम सरोवर पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा था। लगभग सभी श्रद्धालु अपनी जगह पर थे। छठ माता की श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की जा रही थी। साथ में आए लोग इस मनोरम दृश्य को मोबाइल के कैमरों से संजोने में लगे रहे। पूरा परिसर उत्साह व आस्था से भरा था। कई श्रद्धालु लेटकर छठ घाट पहुंच रहे थे। पूजा-अर्चना करने आए अभिषेक ने बताया कि हर साल हमारा पूरा परिवार यहां छठ माता की पूजा-अर्चना के लिए आता है।
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वहीं लगभग 04:40 बजे मानसरोवर पोखरे के चारों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ थी। पोखरे तक जाना मुश्किल था। मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहा। मंदिर के लोग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था किए थे। इधर, लगभग 05:15 बजे सूर्यकुंड धाम में माहौल पूरा भक्ति से सराबोर रहा। एक तरफ महिलाएं छठ घाट पर पूजन-अर्चन कर रही थीं तो दूसरी तरफ भजन-कीर्तन चल रहा था। लगभग 10 से 15 मिनट बाद बारिश की बूंदें गिरनी शुरु हो गईं लेकिन व्रती महिलाओं की आस्था देखने लायक रही। बारिश भी महिलाओं की आस्था पर भारी नहीं पड़ सकी। बारिश में ही महिलाएं मंगल गीत गाते हुए पानी में उतरकर सूर्य को अर्घ्य देने का इंतजार कर रही थीं। बारिश बीच में थोड़ी तेज हुई तो कुछ महिलाओं ने सामानों को समेट लिया व आस्था के साथ सूर्य के उगने के समय पर अर्घ्य देकर भीगते हुए घर को प्रस्थान किया। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर भी लगाया। छठ घाट पर प्रसाद वितरण किया गया। इसके बाद घर पहुंच कर महिलाओं ने पारण कर छठ व्रत को पूर्ण किया।
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सूर्यकुंड धाम में गूंजे भजन-कीर्तन
सूर्यकुंड धाम विकास समिति की ओर से आयोजित सूर्यकुंड धाम के 33वें छठ महोत्सव में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं और व्रतियों से धाम खचाखच भर उठा। समस्त धार्मिक कार्यक्रम पंडित अवनीश शुक्ला ने संपन्न कराया। छठ माता की पूजा-अर्चना के साथ ही लोगों ने भजनों का आनंद भी लिया। इस दौरान भोजपुरी गायक व नायक मनोज मिश्र मिहिर ने छठ मैया के भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को छठमय कर दिया। उग हे सूरूज देव...आदि भजनों का बारिश में भी लोगों ने आनंद लिया।
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बारिश में भी सूर्य उदय के समय ही अर्घ्य देना शुभ
इस बार अर्घ्य देने के समय बारिश होने से बादलों के बीच से सूर्य के दर्शन अर्घ्य के समय नहीं हो सका। इसके बाद भी श्रद्धालुओं ने उगते हुए सूर्य को समय से अर्घ्य दिया। इस पर गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि मंगलवार को सूर्योदय के समय भगवान इंद्र खुशी से प्रफुल्लित दिखे हैं। जिस प्रकार अच्छे अवसर पर फूलों की बारिश होती है उसी प्रकार अर्घ्य के समय बारिश हुई है यह काफी शुभ है। उन्होंने कहा कि सूर्य के उदय के समय ही अर्घ्य देना शुभ है चाहे सूर्य दिखें या बादलों में रहें दोनों परिस्थितियों में लाभ उतना ही होता है। क्योंकि सूर्य अपने समय से उगे रहते हैं। वहीं श्रद्धालु बिंदू देवी बताती हैं कि हमारे जानकारी में आज पहली बार छठ में बारिश हुई है।
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कोट
छठ माता की पूजा-अर्चना व चार दिनों का छठ महापर्व पूर्ण कर मन काफी प्रसन्न है कि हमने छठ माता की आराधना बड़े ही आस्था भाव से कर लिया। निर्जल व्रत में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई है।
-अंकिता बजाज
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कोट
छठ के चार दिन माता की आराधना व पूजा की तैयारी आदि में बीता है। इस पर्व का दिवाली से भी ज्यादा इंतजार रहता है। मंगलवार को बारिश के बावजूद भी भीगते हुए अर्घ्य दिया गया है।
- रुपाली सिंह
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उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ चार दिवसीय छठ पर्व का हुआ समापन
गोरखपुर। सूर्योपासना का महापर्व छठ मंगलवार को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण हो गया। सुबह बारिश की बूंदों के बीच निर्जल व्रती महिलाओं ने अर्घ्य दिया। बारिश को कारण लोगों की आस्था कम नहीं हुई। छठ घाटों पर मेले जैसा माहौल रहा। साथ ही उगा हो सुरुजदेव भिन भिनसरवा... व केलवा के पात पर उगेलन सूरूज देव झांपे झूंपे... आदि भजनों से छठ घाट गूंजायमान रहा। कई जगहों पर भजन-कीर्तन भी हुए। छठ घाट चकाचौंध रोशनी से नहाया हुआ रहा।
मंगलवार भोर में लगभग 3.30 बजे राप्ती तट पर लगभग 70 प्रतिशत श्रद्धालु छठ घाट पर पहुंच चुके थे। श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी था। हाथ में कलश, सिर पर दउरा लिए मंगल गीता गाते श्रद्धालु आ रहे थे। लोग अपनी जगहों पर बैठ रहे थे जहां उन्होंने शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया था। घाट पर ऐसा लग रहा था मानों रात नहीं दिन है।
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वहीं सुबह 04:10 बजे गोरखनाथ के भीम सरोवर पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा था। लगभग सभी श्रद्धालु अपनी जगह पर थे। छठ माता की श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की जा रही थी। साथ में आए लोग इस मनोरम दृश्य को मोबाइल के कैमरों से संजोने में लगे रहे। पूरा परिसर उत्साह व आस्था से भरा था। कई श्रद्धालु लेटकर छठ घाट पहुंच रहे थे। पूजा-अर्चना करने आए अभिषेक ने बताया कि हर साल हमारा पूरा परिवार यहां छठ माता की पूजा-अर्चना के लिए आता है।
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वहीं लगभग 04:40 बजे मानसरोवर पोखरे के चारों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ थी। पोखरे तक जाना मुश्किल था। मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहा। मंदिर के लोग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था किए थे। इधर, लगभग 05:15 बजे सूर्यकुंड धाम में माहौल पूरा भक्ति से सराबोर रहा। एक तरफ महिलाएं छठ घाट पर पूजन-अर्चन कर रही थीं तो दूसरी तरफ भजन-कीर्तन चल रहा था। लगभग 10 से 15 मिनट बाद बारिश की बूंदें गिरनी शुरु हो गईं लेकिन व्रती महिलाओं की आस्था देखने लायक रही। बारिश भी महिलाओं की आस्था पर भारी नहीं पड़ सकी। बारिश में ही महिलाएं मंगल गीत गाते हुए पानी में उतरकर सूर्य को अर्घ्य देने का इंतजार कर रही थीं। बारिश बीच में थोड़ी तेज हुई तो कुछ महिलाओं ने सामानों को समेट लिया व आस्था के साथ सूर्य के उगने के समय पर अर्घ्य देकर भीगते हुए घर को प्रस्थान किया। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर भी लगाया। छठ घाट पर प्रसाद वितरण किया गया। इसके बाद घर पहुंच कर महिलाओं ने पारण कर छठ व्रत को पूर्ण किया।
सूर्यकुंड धाम में गूंजे भजन-कीर्तन
सूर्यकुंड धाम विकास समिति की ओर से आयोजित सूर्यकुंड धाम के 33वें छठ महोत्सव में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं और व्रतियों से धाम खचाखच भर उठा। समस्त धार्मिक कार्यक्रम पंडित अवनीश शुक्ला ने संपन्न कराया। छठ माता की पूजा-अर्चना के साथ ही लोगों ने भजनों का आनंद भी लिया। इस दौरान भोजपुरी गायक व नायक मनोज मिश्र मिहिर ने छठ मैया के भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को छठमय कर दिया। उग हे सूरूज देव...आदि भजनों का बारिश में भी लोगों ने आनंद लिया।
बारिश में भी सूर्य उदय के समय ही अर्घ्य देना शुभ
इस बार अर्घ्य देने के समय बारिश होने से बादलों के बीच से सूर्य के दर्शन अर्घ्य के समय नहीं हो सका। इसके बाद भी श्रद्धालुओं ने उगते हुए सूर्य को समय से अर्घ्य दिया। इस पर गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि मंगलवार को सूर्योदय के समय भगवान इंद्र खुशी से प्रफुल्लित दिखे हैं। जिस प्रकार अच्छे अवसर पर फूलों की बारिश होती है उसी प्रकार अर्घ्य के समय बारिश हुई है यह काफी शुभ है। उन्होंने कहा कि सूर्य के उदय के समय ही अर्घ्य देना शुभ है चाहे सूर्य दिखें या बादलों में रहें दोनों परिस्थितियों में लाभ उतना ही होता है। क्योंकि सूर्य अपने समय से उगे रहते हैं। वहीं श्रद्धालु बिंदू देवी बताती हैं कि हमारे जानकारी में आज पहली बार छठ में बारिश हुई है।
कोट
छठ माता की पूजा-अर्चना व चार दिनों का छठ महापर्व पूर्ण कर मन काफी प्रसन्न है कि हमने छठ माता की आराधना बड़े ही आस्था भाव से कर लिया। निर्जल व्रत में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई है।
-अंकिता बजाज
कोट
छठ के चार दिन माता की आराधना व पूजा की तैयारी आदि में बीता है। इस पर्व का दिवाली से भी ज्यादा इंतजार रहता है। मंगलवार को बारिश के बावजूद भी भीगते हुए अर्घ्य दिया गया है।
- रुपाली सिंह