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पशु तस्करी: बिहार-बंगाल तक फैला है नेटवर्क...25 हजार में बॉर्डर पार कराते हैं एक खेप

Tue, 23 Sep 2025 01:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 23 Sep 2025 01:31 AM IST
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Gorakhpur News: Animal smuggling: The network extends to Bihar and Bengal... A consignment is transported across the border for Rs 25,000.
नस्ल और वजन के हिसाब से तय होता है पशु का रेट, लोकल तस्कर लादकर पहुंचाते हैं बिहार
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बिहार से ट्रक से इन्हें बंगाल पहुंचाते हैं तस्कर

गोरखपुर। पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और बंगाल तक फैला पशु तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। इस नेटवर्क में गाड़ियों से लेकर ड्राइवर तक विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं। ड्राइवरों को एक-एक इलाके के रास्तों की पूरी जानकारी होती है ताकि पुलिस की भनक लगते ही वे तुरंत दूसरा मार्ग पकड़कर भाग सकें। यह तस्करी सुनियोजित ढंग से होती है और हर स्तर पर मुनाफे का बड़ा खेल छिपा होता है। एक ट्रिप के दौरान तस्करों को 25 से 30 हजार रुपये तक का मुनाफा होता है।
सूत्रों ने बताया कि एक पिकअप वाहन में आमतौर पर दो से तीन तस्कर शामिल होते हैं। ये लोग एक बार में चार पशुओं को लोड करते हैं। गोरखपुर से पशु लादकर इन्हें कुशीनगर के रास्ते बिहार तक पहुंचाया जाता है। वहां से बड़े ट्रकों में लादकर इनकी खेप पश्चिम बंगाल रवाना होती है। एक ट्रिप के दौरान तस्करों को 25 से 30 हजार रुपये तक का मुनाफा होता है। वहीं, गोरखपुर से बिहार तक पशु पहुंचाने वाले स्थानीय तस्करों को चार से पांच हजार रुपये की आमदनी होती है।
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बाजार भाव के अनुसार, पशु का दाम उसकी नस्ल और वजन पर तय होता है। बिहार में पशुओं का रेट लगने के बाद उन्हें बंगाल भेजा जाता है। यहां एक पशु 25 से 30 हजार रुपये में आसानी से बिक जाता है। इस अवैध कारोबार से तस्करों की जेब भरती है, जबकि कानून और व्यवस्था को बड़ी चुनौती मिलती है।
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हर जगह होते हैं मुखबिर
पशु तस्करी का यह नेटवर्क सिर्फ ड्राइवरों और तस्करों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जगह-जगह फैले मुखबिर भी शामिल हैं। ये मुखबिर पुलिस की गतिविधियों और रास्तों की जानकारी तस्करों तक पहुंचाते हैं, जिससे वे आसानी से बच निकलते हैं। यही कारण है कि कई बार कार्रवाई के बावजूद पूरा गिरोह पकड़ में नहीं आता। सूत्रों की मानें तो इस नेटवर्क के तार पश्चिमी यूपी से लेकर बिहार और बंगाल तक फैले हैं, जिसमें छोटे स्तर के तस्करों से लेकर बड़े कारोबारी तक शामिल हैं।



कोड वर्ड से भेजे जाते हैं पशु
सूत्रों ने बताया कि बिहार, हरियाणा और यूपी से पशुओं की खेप बंगाल के बाॅर्डर के अलावा असम, मिजोरम, मेघालय से होते हुए बांग्लादेश तक तस्करी होती है। पशु मंडियों में एक गाय की औसत कीमत 55 हजार रुपये तक होती है। असम बॉर्डर पार करवाते ही बांग्लादेश में गाय की कीमत एक लाख रुपये तक हो जाती है।
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